"बेटी"
October 8, 2019 • रंजना सिन्हा सैराहा
            "बेटी"
 
बेटी श्री रूपा संस्कृति की,
  बेटी संसृति शक्ति सनातन।
हर पर्याय शब्द बेटी  का, 
    जन-जन करो तुम आराधन ।।
बेटी स्नेह कीराग-रागनी,
     स रे ग म जिसके हैं  स्वर  ।
कोख में मारी जाएंकभी नहिं,
      प्यार दुलार चुंबन हों अक्षर।।
बेटी जग की भाव-भारती  ,
       दीप्ति ,रीत,नीति की कविता ।
देवी की छवियों में  दमके
         प्रथाओं परंपरा की आराधन।।
           
रंजना सिन्हा सैराहा
(सेवानिवृत्त प्राचार्या)
सम्प्रति--आस्टिन, टेक्सास, अमरीका