अपोलो हॉस्पीटल्स ने वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर से निपटने को  आई एम ए व  डी एम ए  के साथ गठजोड़ किया
June 5, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

नई दिल्ली। अपोलो हॉस्पीटल्स ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ;आईएमएद्ध के साथ मिलकर विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। इस मौके पर प्रदूषण के बढ़ते और कमजोर करने वाले प्रभावों पर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश की गई। इस मौके पर अपोलो हॉस्पीटल्सए आईएमए और दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ;डीएमएद्ध के अग्रणी विशेषज्ञों ने बढ़ते वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों की पहचान बताई तथा आंकड़ों के साथ बताया कि कैसे यह लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल रहा है। इस मौके पर आईएमए से डॉ वी के मोंगा चेयरमैन एचबीआईए डॉ डी आर राय पूर्व सेक्रेट्री जनरलए आईएमए डॉ रमेश दत्ता मानद वित्त सचिव डॉ नरेन्द्र सैनी पूर्व सेक्रेट्री जनरलए आईएमए मौजूद थे।
कांफ्रेंस इस साल के थीम वायु  प्रदूषण को पछाड़िए के क्रम में था और सभी नागरिकों से कार्रवाई की अपील की गई। इसका मकसद वायु प्रदूषण के अंतरराष्ट्रीय संकट से व्यैक्तिक स्तर पर निपटने की अपील थी। विशेषज्ञों ने बताया कि हरेक व्यक्ति औसतन इस वायु प्रदूषण में कितना योगदान करता है। इसके अलावाए समाज के सामूहिक प्रयासों से वायु प्रदूषण कम करने के तरीके भी बताए गए।
पैनल ने वायु प्रदूषण के भिन्न कारणों की चर्चा की। मुमकिन है लोगों को इन कारणों की जानकारी हो पर इससे बचाव के उपायों को नजर अंदाज करते हों।
अपोलो हॉस्पीटल्स की संयुक्त प्रबंध निदेशक  संगीता रेड्डी ने कहा श्विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। इससे पता चलता है कि 10 में से 9 लोग उच्च स्तर का वायु प्रदूषण झेलते हैं। हमारे देश में उद्योग परिवहन कृषि घरेलू सामान कूड़ा जलाने और कुछ प्राकृतिक तत्वों जैसे धूल भरी आंधी से वायु प्रदूषण की गंभीरता हर साल काफी बढ़ती है। यह ऐसा मामला नहीं है जिससे सरकार अकेले निपट सके। इस राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय मामले से निपटने के लिए हर किसी को एकजुट होना चाहिए। वायु प्रदूषण से संबंधित जागरूकता बढ़ाने के लिए आईएमए और डीएमए से जुड़े होने और इस खतरे से निपटने में अपना योगदान करते हुए।श्
अपोलो हॉस्पीटल्स डिविजन के प्रेसिडेंट डॉ के हरिप्रसाद ने कहा बढ़ते  शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण वायु प्रदूषण स्वास्थ्य से संबंधित जोखिमों में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन गया है। समय आ गया है कि जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम एकजुट हों और इस मामले से निपटें तथा पृथ्वी को रहने के लिए हरा.भरा स्वास्थ्य कर और खुशहाल बनाएं। 
अपोलो हॉस्पीटल्स ग्रुप के ग्रुप मेडिकल डायरेकटरए डॉ अनुपम सिबल ने कहा श्वायु प्रदूषण का लोगों की सांस प्रणाली  कार्डियो वस्कुलर सिस्टम और मस्तिष्क पर बहुत नुकसानदेह असर होता है। बच्चों पर वायु प्रदूषण का असर ज्यादा होता है क्योंकि शरीर के भिन्न अंगों का विकास कर रहा होता है और ये आसानी से क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इससे पहले कि वायु प्रदूषण कोई ऐसा नुकसान करे जिसे हम ठीक न कर सकेंए हमें इसे नियंत्रित करने की आवश्यकता है। 
डॉ विनोद क्षेत्रपाल  चेयरमैनए वर्ल्ड एनवायरमेंट डे दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन ने आगे बताया औधोगिक  कचरा वायु प्रदूषण के सबसे बड़े आम कारणों में एक है। इसके अलावा कृषि अपशिष्ट भी हर साल वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर में योगदान करता है। मिथेन और अमोनिया पैदा करने वाले पशु तथा कृषि अपशिष्ट को जलाने से भी प्रदूषण होता है। दुनिया भर में जो ग्रीन हाउस गैस अत्सर्जित हो रहे हैं उसमें से करीब 24 प्रतिशत कृषि वनीकरण और भूमि के अन्य उपयोग के कारण है। 
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ गिरीश त्यागी ने कहा खुले  में कूड़ा जलाना भी प्रदूषण का स्तर बढ़ने के कारणों में एक है। कचड़े से गड्ढा भरने वाली जगहों पर ऑर्गेनिक वेस्ट से नुकसानदेह डायऑक्सनए फुरन मिथेन और ब्लैक कार्बन आदि जैसी गैस निकलती हैं और वायुमंडल में मिलती हैं। अनुमान है कि दुनिया भर में खाने.पीने की चीजों में करीब 40 प्रतिशत कूड़ा खुले में जलाया जाता है। इसके अलावाए ज्वालामुखी जैसी बाधाएंए धूल भरी आंधी और अन्य प्राकृतिक प्रक्रियाएं भी प्रदूषण के बढ़ते स्तर में योगदान करती है। रेल और धूल की आंधी खसतौर से चिन्ताजनक है।
अंत में डॉ अनिल गोयल संयोजक वर्ल्ड एनवायरमेंट डे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने कहा भिन्न  किस्म के प्रदूषण को समझना और यह जानना कि हमारे स्वास्थ्य तथा पर्यावरण के लिए यह कितना हानिकारक इसे समझने से हमें हवा की गुणवत्ता बेहतर करने की दिशा में कदम उठाने में हमारी सहायता करेगा। इससे हम अपने आस.पास की हवा की गुणवत्ता को सुधार सकेंगे। अक्सर हम इसे देख भी नहीं सकते पर वायु प्रदूषण हमारे आस.पास भी जगह में हर जगह रैं। हम सांस लेना रोक नहीं सकते हैंए पर निश्चित रूप से हम छोटी पहल कर सकते हैं जिससे हवा की गुणवत्ता बेहतर हो। 


विशेषज्ञों ने वायु प्रदूषण कम करने के ये 10 तरीके गिनाए जिससे हम इसमें योगदान कर सकते हैं

1 .  सार्वजनिक परिवहन का उपयोग,  वायु प्रदूषण कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कीजिए। तथ्यों और आंकड़ों के मुताबिकए कार्बन डायऑक्साइड के उत्सर्जन में 30ः गाड़ियों की आवा.जाही से पैदा होता है।

2.  ऊर्जा कुशल वाहनों की खरीद, गाड़ी खरीदते समय ईंधन कुशल और वैकल्पिक ईंधन वाले वाहनों की खरीद पर विचार कीजिए।

3.  ग्रोइंग ग्रीनश् पर विचार कीजिए, ग्रोइंग  ग्रीनश् का मतलब है पर्यावरण अनुकूल और पारिस्थितिकी के लिहाज से जिम्मेदार जीवनशैली व्यवहार में लाना ध् अपनाना। यही नहीं ऐसे निर्णय लेना जिससे पर्यावरण की रक्षा हो और प्राकृतिक संसाधन बने रहें।

4. बगीचा लगाइए, पौधे लगाने से हमें ताजी हवा पाने में सहायता मिलेगी और वायु प्रदूषण कम होगा।

5.  जरूरत न हो तो बत्तियां बुझा दें,  ऊर्जा और धन बर्बाद न करें। बत्तियों और बिजली के उपकरणों जैसे पंखेए एयर कंडीशनर आजि के मामले में सावधान और सतर्क रहिए तथा जब कभी इनकी जरूरत न हो इन्हें ऑफ कर दीजिए। बच्चों में भी ऐसी आदत डालिए।

6.  प्लास्टिक की थैलियों से बचिए,  प्लास्टिक की थैली के उपयोग से बचने की कोशिश कीजिए और बचिए क्योंकि ये अपने आप नष्ट नहीं होते हैं और इन्हें खत्म करना मुश्किल है।

7.  सौर ऊर्जा का उपयोग कीजिए,  सौर ऊर्जा से आप बिजली की भारी बचत कर सकते हैं और इससे भी बड़ी बात यह है कि आप लंबे समय में ढेर सारी नकदी भी बचा सकते हैं।

8.  हमेशा ऐसे उत्पादों का उपयोग करें, जिन्हें रीसाइकिल किया जा सके रू हमेशा ऐसे उत्पादों का उपयोग करना चाहिए जिसे रीसाइकिल किया जा सके।

9.  धूम्रपान छोड़िए, धूम्रपान स्वास्थ्य और आपके आस.पास के लोगों के लिए खतरनाक है।

10.  अपने साथ वालों को शिक्षित कीजिए,  अपने आस.पास के लोगों को बताइए कि हवा को साफ रखने में वे कैसे योगदान कर सकते हैं। उन्हें इससे संबधित सभी तरीके बताइए।