इमरजेंसी के खिलाफ लड़ाई में अकाली दल अग्रणी था-सुखबीर सिंह बादल
June 26, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

दिल्ली। शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज कहा कि पंजाब तथा पंजाबी आज के दिन 1975 में लगाई गई इमरजेंसी के कारण इस दिन को 'काले दिवस' के तौर पर मनाना जारी रखेंगे तथा कांग्रेस पार्टी तथा गांधी परिवार द्वारा सिखों पर  बार बार किए गए अत्याचारों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।

आज दिल्ली में सिख गुरुद्वारा मैंनेजमेंट कमेटी द्वारा करवाए गए एक समागम में बोलते हुए सरदार बादल ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सभी ताकतें अपने हाथ में लेकर लोकतंत्र का गला घोट दिया था तथा शिरोमणी अकाली दल के पास सिवाए इस बेइंसाफी के विरूद्व लड़ने के और कोई विकल्प नही छोड़ा था। उन्होने कहा कि इमरजेंसी पूरे देश में लगी थी, पर यह सिर्फ अकाली दल ही था, जिसने सबसे पहले इस लोकतंत्र विरोधी कदम के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन शुरू करने का फैसला किया था। उन्होने कहा कि सरदार परकाश सिंह बादल ने 9 जुलाई 1975 को शुरू हुए इन रोष प्रदर्शन का नेतृत्व किया था तथा गिरफतारियां देने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के पहले जत्थे का खुद नेतृत्व किया था।

सरदार बादल ने कहा कि ऐसे तानाशाही कदम का विरोध करने में अकाली दल के योगदान को इस तथ्य से देख जा सकता है कि देश में इमरजेंसी के दौरान गिरफतार किए गए 90 हजार व्यक्तियों में से 60 हजार सिर्फ पंजाब से थे। उन्होने कहा कि अकाली दल इमरजेंसी के खिलाफ लड़ा था तथा सिखों  पर हुए सभी अत्याचार चाहे श्री दरबार साहिब पर तोपों तथा टैंको से हमला हो यां 1984 में दिल्ली में सिख कत्लेआम हो, के विरूद्व अपनी लड़ाई जारी रखेगा। उन्होने कहा कि उससे पहले अकाली दल ने स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी थी तथा विभाजन के बाद देश के निर्माण में बहुत बड़ा योगदान दिया था।  उन्होने कहा कि हम अपने आदर्शों के प्रति वचनबद्व हैं तथा अगले साल पार्टी के 100 साल पूरे होने के जश्नों के अवसर पर दोबारा एक नए जोश तथा उर्जा के साथ खुद को पार्टी के आदर्शों प्रति समर्पित करेंगे।

अकाली दल अध्यक्ष ने कहा कि यदि स्वतंत्रता के बाद पंजाब को तकलीफे सहनी पड़ी हैं तो यह सब नेहरू-गांधी परिवार द्वारा पंजाबियों से किए भेदभाव के कारण हुआ है। उन्होने कहा कि पंजाब अकेला ऐसा राज्य था, जिसकी अपनी कोई राजधानी नही थी। उन्होने कहा कि यहां तक कि पंजाबी बोलने वाले इलाकों को राज्य से छीन लिया गया था। इसके दरियाई पानी को अनुचित ढं़ग से दूसरे राज्यों को दिए जाने के कारण पंजाब संकट का सामना कर रहा है।

इस अवसर पर बोलते हुए डीएसजीएमसी के अध्यक्ष सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान अकाली दल लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ा था। हम सभी देश की लोकतांत्रिक परम्पराओं की रक्षा करने के लिए वचनबद्व है। उन्होने आज बाबा बंदा सिंह बहादुर को उनके शहीदी दिवस पर अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

इस अवसर पर अन्य के अलावा डाॅ़ दलजीत सिंह चीमा तथा सरदार हरमीत सिंह कालका भी उपस्थित थे।