इसरो ने रचा इतिहास, सुरक्षा होगी चाकचौबंद
May 24, 2019 • हर्ष शर्मा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पृथ्वी निगरानी उपग्रह रिसैट-2 बी को बुधवार तड़के सफलतापूर्वक प्रक्षेपित करके इतिहास रच दिया। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी 46 के साथ भारत के हर मौसम के रडार इमेजिंग पृथ्वी निगरानी उपग्रह आरआईसैट-2 बी का सफल प्रक्षेपण किया। यह प्रक्षेपण बुधवार सुबह साढ़े 5 बजे किया गया। पीएसएलपी 46 ने आरआईसैट-2 बी को पृथ्वी की निचली कक्षा में सफल तौर पर स्थापित किया। भारत का नया निगरानी उपग्रह अच्छी व स्पष्ट तस्वीरें भेजेगा जिनका उपयोग कृषि, वन विभाग और आपदा प्रबंधन में सहयोग में किया जा सकेगा. उपग्रह से ली गई तस्वीरों का उपयोग खुफिया निगरानी के लिए भी किया जाएगा। यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में भारत के लिए आंख के तौर पर काम करेगी। इससे भारतीय सुरक्षा बलों को अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी रखने में काफी सहायता होगी। इस सैटेलाइट से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आतंकी शिविरों की गतिविधियों पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी।
जी हां आपने सही सुना, इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने अभी तक कई उपलब्धियां हासिल की हैं। हमारे वैज्ञानिक लगातार अनेकों उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं। इसरो अपने लागत-कुशल और विश्वसनीय लॉन्च सिस्टम के लिए जाना जाता है। 2017 में, , इसरो ने पीएलएसवी - 37 का उपयोग करते हुए एक ही बार में 104 उपग्रहों को लॉन्च करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उनकी प्रगति से प्रभावित होकर, सरकार ने इसरो के वार्षिक बजट में 23 प्रतिशत की वृद्धि की। एजेंसी पुन प्रयोज्य लॉन्च वाहनों के विकास, एकल और दो-चरण की कक्षाओं के वाहनों, अर्ध-क्रायोजेनिक इंजन और मानव स्पेसफ्लाइट परियोजनाओं के विकास के साथ आगे बढ़ रही है। इसरो दुनिया के शीर्ष 5 अंतरिक्ष अनुसंधान संगठनों के अंतर्गत आता है और साल-दर-साल तेजी से बढ़ रहा है।
इसकी स्थापना पहले भारतीय उपग्रह, आर्यभट्ट से रोहिणी, ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण वाहन ( पीएलएसवी ) और जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च वाहन ख्जीएलएसवी, से शुरू हुई। आज इसरो के स्पेस लॉन्च व्हीकल्स का उपयोग अमेरिका, यूके जैसे देश भी कर रहे है। इसरो पहले से ही कुछ बेहतरीन परियोजनाएं कर रहा है और अब भविष्य की अधिक महत्वाकांक्षी योजनाएं बना रहा है।
भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान ( पीएलएसवी- 46) ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा से उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह श्रीहरिकोटा से 72 वां लॉन्च वाहन मिशन था और फर्स्ट लॉन्च पैड से 36 वां लॉन्च था। पीएलएसवी- 46 ने फर्स्ट लॉन्च पैड से लिफ्ट-ऑफ किया और रिसेट-2 ठ को 556 किमी की कक्षा में, लिफ्ट-ऑफ के लगभग 15 मिनट और 25 सेकंड बाद इंजेक्ट किया। अलग होने के बाद, सौर सरणियों को स्वचालित रूप से और इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क को बेंगलुरु में उपग्रह के नियंत्रण में तैनात किया गया था। आने वाले दिनों में, उपग्रह को अपने अंतिम परिचालन विन्यास में लाया जाएगा। रिसेट -2ठ एक रडार इमेजिंग पृथ्वी अवलोकन उपग्रह है जिसका वजन लगभग 615 किलोग्राम है। उपग्रह का उद्देश्य कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करना है। (स्रोत-इसरो)कुछ महीने पहले, चीन ने सफलतापूर्वक चंद्रमा के दूसरी तरफ जहां अभी तक कोई भी देश पहुंच नहीं पाया था वहा यान भेजने में सफलता हासिल की।
अब इसरो चंद्रयान 06 सितंबर, 2019 को एक संभावित चंद्रमा की लैंडिंग के साथ, 09 जुलाई से 16 जुलाई, 2019 की समय सीमा के दौरान चंद्र सतह पर मिशन में लॉन्च करने के लिए बिल्कुल तैयार है। वहीं इसरो भविष्य में रिसैट जैसे छह और नए उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है। इनमें रिसैट -2 बी के बाद रिसैट-1 ए, रिसैट 2 ए, रिसैट-2 बीआर 1, रिसैट-2 बीआर 2, और रिसैट-1बी प्रमुख उपग्रह हैं।
आज भारत न सिर्फ अपने अंतरिक्ष संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है बल्कि दुनिया के बहुत से देशों को अपनी अंतरिक्ष क्षमता से व्यापारिक और अन्य स्तरों पर सहयोग कर रहा है। इसका पूरा श्रेय भारत के मेहनती वैज्ञानिक और इसरो को जाता है जिसमे आज इतना बड़ा मुकाम हासिल किया है। भारतीय आन्तरिक अनुसंधान संगठन (इसरो) की शुरुआत डॉ विक्रम साराभाई ने की थी, इन्हें भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का पितामह माना जाता है। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान और चीन समेत भारत दुनिया के उन छः देशों में शामिल है जो अपनी धरती से सैटेलाइट बनाने और लान्च करने की क्षमता रखते है।