उर्दू वैश्विक स्तर पर अमन और शांति की भाषा है: सैयदा सय्यदैन हमीद
March 19, 2019 • Rakesh Raman

                  हमारे कामों में उर्दू कदम-कदम पर साथ है: मुजफ्फर अली

नई दिल्लीः- राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद् के छठे विश्व उर्दू सम्मेलन के दूसरे दिन पहला सत्र ’’उर्दू की शिक्षा में मदरसों की भूमिका’’ शीर्षक पर आयोजित हुआ जिसकी अध्यक्षता तेलंगाना उर्दू अकादमी के पूर्व चेयरमैन अब्दुल रहीम अंसारी और प्रसिद्ध धार्मिक विद्वान मौलाना फरमान नदवी ने की जबकि संचालन जुबेैर खान सईदी ने किया। इस सत्र में पहला शोधपत्र गुलाम मुहम्मद वस्तानवी का था जो बीमारी के कारण नही आ सके इसलिए उनका शोधपत्र खालिद साहब ने पढ़ा। इस सत्र में प्रोफेसर काजी हबीब, मुफ्ती अरशद देवबंदी, डा. नईम अनीस, मुफ्ती मुश्ताक तिजारवी और शाह अजमल फारूक नदवी ने अपने शोधपत्र पढ़े। सभी विद्वानों ने मदरसों मे उर्दू के विषय पर विस्तार से चर्चा की और बताया कि मदरसों ने उर्दू के विकास में अहम भूमिका अदा की है। मदरसों ने उर्दू के प्रसिद्ध साहित्यकारों, शोधकर्ताओं और शायरों को पैदा किया है।
दूसरे सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध फिल्मकार मुजफ्फ र अली और योजना आयोग की पूर्व सदस्य सैयदा सय्यदैन हमीद ने कि जबकि संचालन डा. मौहम्मद काजिम ने किया इस सत्र में प्रोफेसर नुजहत काजमी, प्रोफेसर रमेश सी. भारद्वाज और सलीम आरिफ ने अपने शोधपत्र प्रस्तुत किये। अध्यक्षीय व्याख्यान देते हुए सैयदा सय्यदैन हमीद ने कहा कि मात्रभाषा का मुझपर कर्ज है जो मैंने अदा नहीं किया। उर्दू एक सार्वभौमिक भाषा है जो पूरी दुनिया में बोली और समझी जाती है। उर्दू वैश्विक स्तर पर अमन और शांति की भाषा है। यह भाषा हिंदू मुस्लिम सिख और इसाईयों के दिलों की अभिव्यक्ति है। सत्र के दूसरे अध्यक्ष मुजफ्फर अली ने कहा कि हमारे कामों में उर्दू कदम-कदम पर साथ है। उन्होंने सुलेखन की अहमियत पर विचार व्यक्त करते हुए हजरत अली का कथन भी दोहराया कि सुलेखन हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है। यह न केवल प्राचीनकाल से चली आ रही है और अभी तक इसकी पहचान बरकरार है बल्कि इसकी लोकप्रियता मे वृद्धि हो रही है।
दोपहर के भोजन के बाद का सत्र ‘विभिन्न देशों में उर्दू की स्थिति’ विषय पर था। इस सत्र में अली बयात (ईरान),वली आलम शाहीन (अमेरिका),लूदमिला वासीलेवा (रूस),मौहिया अब्दुर्रहमान (उजबेकिस्तान),मुहम्मद अब्दुर्रहमान काजी (मिस्र),डा. मुहम्मद गुलाम रब्बानी (बांग्लादेश),नसर मलिक (डेनमार्क),जकाई करदस (तुर्की),मामिया कीन साको (जापान) ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। सत्र की अध्यक्षता प्रसिद्ध विद्वान व शोधकर्ता प्रो. अबुल कलाम कासमी (अलीगढ़),तकी आबदी (कनाडा) और मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय के चांसलर श्री फिरोज बख्त अहमद ने की। सम्मेलन के दूसरे दिन भी बड़ी संख्या में शहर के सम्मानीय लोंगो और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया।