एनजीटी द्वारा गठित मॉनिटरिंग कमेटी के निशाने पर हैं साहिबाबाद की औद्योगिक इकाइयां
April 16, 2019 • कमलेश पांडे
# ध्वनि, जल और वायु प्रदूषण के अलावा यमुना को गंदा बनाये रखने में भी इनका है बड़ा हाथ
 
# कमेटी ने गाजियाबाद में सक्रिय कई जिम्मेवार अधिकारियों को भेजा खत, मांगा सहयोग
 
गाजियाबाद। एनसीआर इलाके में दिन रात प्रदूषण उगल रही कम्पनियों में साहिबाबाद की औद्योगिक इकाइयों का भी नाम शुमार किया जा रहा है, जिस पर कभी भी कोई बड़ी कार्रवाई हो सकती है। खबर है कि यह कार्रवाई यमुना में प्रदूषण रोकने वाली मॉनिटरिंग कमिटी के दिशा निर्देश पर होगी। क्योंकि सरकार ने गत दिनों हुई बैठक के बाद दिए गए अपने निर्देश में यमुना को प्रदूषित होने से बचाने के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी गठित की है, जिसने अपनी एक समीक्षात्मक बैठक के बाद विभिन्न मुद्दों और क्षेत्रों में काम करने की जरूरत बताई है। 
 
खबर है कि उक्त कमेटी ने जिन इलाकों को कार्रवाई के लिए चिन्हित किया है, उसमें प्रमुख रूप से साहिबाबाद में चल रहे उद्योगों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात कही गई है। क्योंकि यहां के भी कई उद्योगों का पानी बिना ट्रीटमेंट किए ही सीधे नालों में प्रवेश करता है। कमेटी ने दो टूक कहा है कि इस नजरिए से वेटलैंड का विकास करना, बाढ़ वाले इलाकों की सीमा बंदी के साथ-साथ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का इंस्टॉलेशन करवाना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है। 
 
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कमेटी ने इस आशय के निर्देश गाजियाबाद के जिलाधिकारी को भी भेजे हैं। बता दें कि एनजीटी के आदेश पर उक्त मॉनिटरिंग कमिटी की बैठक गत 10 अप्रैल को सम्पन्न हुई थी जिसमें लिए गए निर्णयों की जानकारी लोनी नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी, गाजियाबाद नगर निगम के नगर आयुक्त, जीडीए वीसी, जल निगम लखनऊ के प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश पुरुष नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव, नोएडा व ग्रेटर नोएडा के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, सिचाई विभाग और औद्योगिक विभाग के प्रमुख सचिव, डीएम गाजियाबाद व गौतमबुद्ध नगर को भी भेजी है।
 
इस पत्र में स्पष्ट लिखा हुआ है कि।साहिबाबाद में चल रही उन सभी औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई की जाए, जिनका गंदा पानी किसी न किसी प्रकार से सीधे यहां के बड़े नालों में डाला जाता है। लिहाजा, कमेटी ने ऐसे सभी औद्योगिक इकाइयों पर सख्त कार्रवाई करने की जरूरत बताई है, जो ऐसे इलाकों में चल रही हैं। इसके अलावा, कमेटी ने उन इलाकों को भी चिन्हित करने को कहा है, जहां उद्योग चलाने की मंजूरी नहीं है। इसलिए उसने स्पष्ट लिखा है कि इन इलाकों में आने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों का सिलसिलेवार ढंग से गहन निरीक्षण किया जाए। इसके अलावा, सभी औद्योगिक इकाइयों में गंदा पानी साफ करने वाली तकनीक लगाई जाए, जिससे उन सभी इलाकों में अवैध रूप से संचालित फैक्टरियों से पर्यावरण व जनस्वास्थ्य प्रभावित न होने पाए।