कांग्रेस का किसान प्रेम एक छलावा था
May 18, 2019 • विष्णुगुप्त
(विष्णुगुप्त)
मध्य प्रदेश के किसान अब अपने आप को छले- ठगे महसूस कर रहे हैं, यह मान रहें हैं, कि उनके साथ वायदा खिलाफी हुई है, वोट लेकर अब कर्ज माफी योजना पर पैंतरेबाजी हो रही है। मध्य प्रदेश के किसानों को छलने वाली, ठगने वाली राजनीतिक पार्टी कौन है? मध्य प्रदेश के किसानों को छलने वाले और ठगने वाले नेता कौन-कौन हैं? जाहिर तौर पर कांग्रेस मध्य प्रदेश के किसानों को छली है, ठगी है, राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह, कमलनाथ ने मध्य प्रदेश के किसानों के साथ वायदा खिलाफी की है। क्या यह नहीं मान लिया जाना चाहिए कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस का किसान प्रेम सिर्फ एक छलावा था, किसानों को मूर्ख बनाने का हथकंडा था? राजनीतिक पार्टियां तो किसानों को बार-बार ठगती ही हैं।
                          अब हम यहां यह देखे कि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के किसानों के साथ कैसे-कैसे वायदे किये थे, कितने दिनों के अंदर पूर्ण कर्ज माफी योजना को सफल बनाने की हुंकार भरी गयी थी, खासकर कांग्रेस के राष्टीय अध्यक्ष राहुल गांधी और वर्तमान में मध्य प्रदेश के कांग्रेसी मुख्यमंत्री कमलनाथ के वायदे और बोल क्या थे। राहुल गांधी के वायदे और बोल को पहले देख लीजिये। राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में किसानों के बीच जाकर कहे थे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और शिवराज सिंह चैहान झूठे हैं, किसान विरोधी हैं, मोदी और शिवराज के राज में किसानों का भला नहीं होने वाला है, इसलिए देश से मोदी और मध्य प्रदेश से शिवराज सिंह चैहान की सरकार की विदाई होनी चाहिए, राहुल गांधी ने कांग्रेस को किसानों की हितैषी बताया था और कहा था कि अगर मध्य प्रदेश मे कांग्रेस की सरकार आयी तो फिर किसानों को आत्महत्याएं करने के लिए बाध्य नहीं होना पडेगा, सिर्फ दस दिन के अंदर किसानों का पूर्ण कर्ज माफ किया जायेगा, अगर कांग्रेस के मुख्य मंत्री किसानों के कर्ज दस दिनों में माफ नहीं किये तो फिर दंड स्वरूप मुख्यमंत्री को बदल दिया जायेगा। कांग्रेस के मध्य प्रदेश के अध्यक्ष के रूप में कमलनाथ ने सभी प्रकार के कर्ज तुरंत माफ करने का वायदा किया था। 
                       किसानों को मूर्ख बना कर कांग्रेस ने मध्य प्रदेश में चुनाव जीत लिया, पर क्या राहुल गांधी और कमलनाथ को अपने अपने वायदे याद हैं, यह एक यक्ष प्रश्न हैं, क्या राहुल गांधी ने अपने वायदे के अनुसार किसानों के कर्ज 10 दिन के अंदर माफ नहीं करने पर अपने मुख्यमंत्री कमलनाथ को हटा पाये? प्रमाणित तौर पर राहुल गांधी और कमलनाथ को अपने वायदे अब मालूम नहीं है, किसानों के लिए राहुल गांधी और कमलनाथ झूठे साबित हुए हैं, ठग साबित हुए हैं। किसानों की कर्ज माफी योजना पर अब पैंतरेबाजी हो रही है, यह कहना गलत नहीं होगा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस किसानों के साथ अन्याय पर उतर आयी है तो फिर कोई गलत बात नहीं होगी। अब यहां यह प्रश्न भी है कि किसानों की कर्ज माफी योजना को लागू करने में कांग्रेस किस प्रकार की पैंतरेबाजी कर रही है, किसानों के खिलाफ कांग्रेस किस प्रकार के खेल खेल रही है। अब कांग्रेस की मध्य प्रदेश की सरकार किसानों की कर्ज माफी के लिए वर्गीकरण पर वर्गीगरण कर रही है, कह रही है कि टैक्टर और टाॅली पर कर्ज लेने वाले किसानों का कर्ज माफी नहीं होगा। कर्जमाफी योजना को सीमा में बांध चुकी है। कमलनाथ सरकार अब कहती है कि सिर्फ 31 मार्च 2018 के पहले के कर्ज ही माफी योजना के अंतगर्त आयेंगे। कमलनाथ सरकार के इस सीमा वर्गीकरण का शिकार बडी संख्या में किसान होंगे और किसानों के एक बडे वर्ग की समस्याएं जरूर बढेंगी। सिफ्र इतना ही नहीं बल्कि कर्ज माफी योजना में छल भी बहुत हो रहा है। बहुत सारे किसानों के हजार-दो हजार रूपये ही माफ हुए हैं। जबकि कांग्रेस का वायदा था कि दो लाख तक के कर्ज में डूबे सभी किसानों के कर्ज माफ कर दिये जायेंगे। अब कांग्रेस यह बताने के लिए तैयार नहीं है कि दो लाख की सीमा को वह क्यों नहीं स्वीकार कर रही है?
                       सबसे बडी बात यह है कि कांग्रेस कर्जमाफी योजना पर गलत आंकडे प्रस्तुत कर रही है, बैंक की रिपोर्ट और सरकार की घोषणा में कोई समानता नहीं है। जब तक कमलनाथ सरकारी बैंकों को कर्ज माफी का पैसा नहीं देगी तब तक बैंक कर्ज माफी योजना को कैसे स्वीकार कर सकते हैं। मध्य प्रदेश का खजाना खाली है, मध्य प्रदेश सरकार के  किसानों के कर्ज माफ करने के लिए पैसे जुटाने के अन्य स्रोत भी अभी तक सामने नहीं आये हैं। केन्द्रीय चुनाव कांग्रेस के लिए एक हथकंडा बन गया। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि कांग्रेस ने केन्द्रीय चुनाव को एक हथकंडा के तौर पर अपना लिया। कांग्रेस की सरकार कहती है कि चुनाव अचार संहिता लग जाने के कारण उनके हाथ बंधे हुए हैं, चुनाव आयेग ने हाथ बांध रखे हैं। पर चुनाव अचार संहिता लगने से पहले भी काफी समय था। अगर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ईमानदार होती और किसानों की पीडा से जुडी होती तो फिर मध्य प्रदेश की सरकार केन्द्रीय चुनाव अचार संहिता लगने से पहले ही किसानों की कर्ज माफी कर सकती थी, पूर्ण कर्ज माफी का सर्टिफिकेट किसानों को सौंप सकती थी। निश्चित तौर पर मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ऐसा नहीं कर सकी। मध्य प्रदेश सरकार स्वयं दोषी रही है, सरकारी खजाना खाली होने के कारण लाचार भी रही है पर दोष केन्द्रीय चुनाव अचार संहिता को देती है।
                    मध्य प्रदेश ही क्यों बल्कि पूरे देश के किसान बार-बार ठगे जाते हैं, चुनाव के समय किसान प्रेम उमडता है, किसानों की राजनीतिक शक्ति सभी को चाहिए, जब किसानों की राजनीतिक शक्ति राजनीतिक पार्टियों को चाहिए तो फिर किसानों को ठगने के लिए झूठी वायदे भी किये जाते हैं, ऐसे-ऐसे वायदे भी किये जाते हैं, जिनकी पूर्ति संभव ही नहीं हो सकती है। किसान भी बार-बार झूठे वायदों में फंस जाते हैं, बहकावे में आ जाते हैं। किसान यह नहीं सोचते हैं कि जिस राजनीतिक पार्टी ने वायदे किये हैं, वह अपने वायदे किस प्रकार से पूरे कर सकती है। मध्य प्रदेश के किसानों ने पिछली शिवराज सिंह सरकार के समय बडे-बडे आंदोलन किये थे, बडी-बडी सभाएं की थी। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि किसान अपने उत्पाद को सरेआम सडको पर फेका था, दूध भी सडकों पर फेका था। दूध, सब्जियां सडकों पर फेकने पर शिवराज सिंह चैहान सरकार की बदनामी बडी हुई थी। सिर्फ मध्य प्रदेश मे ही नहीं बल्कि पूरे देश में यह संदेश गया था कि सही में मध्य प्रदेश के किसानों की समस्याएं जटिल है, मध्य प्रदेश के किसान भूखमरी के शिकार है, मघ्य प्रदेश की शिवराज सिंह चैहान सरकार  सही में किसान विरोधी है। जबकि सच्चाई यह थी कि किसानों के वेश में कांग्रेसी कार्यकर्ता आंदोलन कर रहे थे। कांग्रेसी कार्यकर्ता मार्केट से सब्जियां और दूध आदि खरीद कर सडकों पर फेंक रहे थे। किसानों के उपर जो गोलियां चली थी, किसानों के उपर जो पुलिस की लाठियां बरसी थी वह भी कांग्रेसी कार्यकर्ताओ के हथकंडे के कारण चली थी। कांग्रेसी कार्यकर्ताओ ने किसानों के वेश में आकर किसान आंदेालन में पेट्रोल डालने का कार्य किये थे। हिंसा करने और कानून तोडने के लिए कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने किसानों को उकसाये थे। 
          मध्य प्रदेश के किसानों में कांग्रेस के प्रति गुस्सा भी कम नहीं है। इस केन्द्रीय चुनाव में किसान कांग्रेसी नेताओं को आईना दिखा रहे हैं, पूर्ण कर्ज माफ नहीं करने पर प्रश्न कर रहे हैं। अब किसानों की नाराजगी कांग्रेस के लिए भारी पडने वाली है। मध्य प्रदेश में किसानों की नाराजगी के कारण कांग्रेस को केन्द्रीय चुनाव वैसी सफलता नहीं मिलेगी जैसी सफलता की उम्मीद राहुल गांधी और कमलनाथ ने पाल रखी है।