कालका-शिमला रेल सेक्शन पर झरोखा और आर.ए .100 सेल्फ प्रोपैल्ड कोच और रेल मोटर कार में चार्टर सीटों की शुरूआत की
June 14, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

 कालका-शिमला रेल सेक्शन पर पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए उत्तर रेलवे ने इस ग्रीष्मकाल में दिनांक से 13/06/2019 10/09/2019 तक झरोखा और आर.ए .100 सेल्फ प्रोपैल्ड कोच और रेल मोटर कार में चार्टर सीटों की शुरूआत की है . अब यात्री चार्टर्ड सीट आधार पर इन रेलगाडियों और डिब्बों में टिकट बुक करा सकते हैं . वर्तमान में झरोखा और आर.ए .100 सेल्फ प्रोपैल्ड कोच और रेल मोटर कार पूरे चार्टर आधार पर उपलब्ध है .

 यात्री कालका-शिमला रेलवे स्टेशनों पर बने बुकिंग काउंटरों से इन सेवाओं को बुक कर सकते हैं . झरोखा और आर.ए .100 सेल्फ प्रोपैल्ड कोच में अधिकतम 8 यात्री जबकि रेल मोटर कार में 12-14   यात्री अपने टिकट बुक करा सकते हैं. यह सभी सेवाएं मांग आधार पर परिचालित की जायेंगी . ये सेवाएं तभी संचालित की जायेंगी जब झरोखा और आर.ए .100 सेल्फ प्रोपैल्ड कोच में न्यूनतम 6 यात्रियों की बुकिंग हो. रेल मोटर कार के मामले में न्यूनतम 8 यात्रियों द्वारा टिकट बुक कराए जाने के बाद 2 घंटों के भीतर ये सेवाएं उपलब्ध होंगी. एक बार खरीदे गए टिकटों पर कोई वापसी नहीं है . किंतु झरोखा और आर.ए .100 के मामलों में यात्रियों की संख्या 6 और रेल मोटर कार के मामले में 8 न हो तो ये सेवाएं उपलब्ध नहीं होंगी. ऐसी स्थिति में शिमला और कालका रेलवे स्टेशनों के काउंटरों से पूरे किराए की वापसी होगी . इन सेवाओं के लिए खरीदे गए टिकट अहस्तांतरणीय होंगे . इन टिकटों की बुकिंग के समय पर दिए गए पहचान के दस्तावेजों की मूल प्रतियां यात्रा के दौरान यात्री को अपने साथ रखनी होंगी ऐसा न होने पर उसे बिना टिकट माना जायेगा और उससे नियमानुसार प्रभार वसूला जायेगा . चार्टर सेवा के संबंधित कोचों की अग्रिम बुकिंग के मामले में , उनकी पुष्टि एक दिन पहले ही की जाएगी और ये सेवाएं स्टॉक की उपलब्धता के अधीन होंगी . यदि किसी विशेष तिथि के लिए 'झरोखा' की बुकिंग अग्रिम रूप से हो जाती है और उस दिन वह उपलब्ध न हो तो यह सेवा विस्थापन के आधार पर उपलब्ध नहीं होगी . 5 वर्ष से अधिक की उम्र की बच्चों का पूरा किराया लगेगा और 5 वर्ष से कम के बच्चों का कोई किराया नहीं लगेगा किंतु उन्हें कोई सीट नहीं दी जायेगी .

इस क्षेत्र में बेहतर यात्रा और पर्यटन अवसरों को उत्पन्न करके राष्ट्र निर्माण में रेलवे सदैव अग्रणी रही है . इस संबंध में रेलवे ने यूनेस्को विश्व धरोहरवाली कालका -शिमला पर्वतीय रेलवे को गति देने और हिमाचल प्रदेश राज्य में पर्यटन को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है .

कालका-रेलवे भारत शिमला में द्वारा अंग्रेजों तैयार की गई नैरोगेज वाली महत्वाकांक्षी पर्वतीय रेलवे परियोजना है. दुर्गम इलाकों और कठिन स्थितियों वाले इस क्षेत्र में बेहतर इंजीनियरिंग कौशल के साथ इस परियोजना को पूरा करने में 20 वर्षों का समय लगा. यह रेलवे लाइन कालका और शिमला नगरों को आपस में जोडती है . कालका तलहटी में बसा है जबकि हिमाचल प्रदेश राज्य   की राजधानी एवं अंग्रेजी शासन के दौरान तत्कालीन ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला हिमाचल की शिवालिक पर्वत श्रेणियों में 2000 हजार मीटर की ऊँचाई पर स्थित है. 100 किलोमीटर लम्बे इस रेलमार्ग पर 102 सुरंगें, जिसमें बडोग के निकट बनी 1144 मीटर की सबसे लम्बी सुरंग, 869 पुल 18 स्टेशन और 909 मोड हैं.

कालका-शिमला रेलगाड़ी पर्यटकों का एक प्रमुख आकर्षण है. इस रेलगाड़ी की यात्रा के बिना इस पहाड़ी क्षेत्र का भ्रमण अधूरा लगता है . उत्तर रेलवे ने यहां के लिए अनेक रेल सेवाएं उपलब्ध कराई हैं जिनमें रेल मोटर कार , शिवालिक पैलेस, शिवालिक क्यून और शिवालिक डीलक्स एक्सप्रेस सेवाएं शामिल हैं . लोकप्रिय सेवाओं में झरोखा और विस्टाडोम कोच लगाए गए हैं . इस सेक्शन के सभी स्टेशनों पर निशुल्क वाई-फाई की सुविधा भी उपलब्ध है.