खुद के जाल में फंसते राहुल
May 7, 2019 • देवानंद राय
देश की सबसे पुरानी पार्टी के मुखिया अपने ही बुने बयानों के जाल में फंसते जा रहे हैं।एक ही झूठ को हर मंच से, हर प्रश्न के जवाब में, हर जगह बस एक ही रट चौकीदार चोर है पर दो बार सुप्रीम कोर्ट में माफीनामा के बाद अब एक इंटरव्यू में कहते नजर आए की प्रधानमंत्री की छवि खराब कर के रहेंगे क्योंकि उनका मानना है कि मोदी की छवि ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।आप पिछले चार महीने से बिना किसी आधार के बिना किसी तथ्य के एक ही झूठ बोलते जा रहे है।बस मोदी और अंबानी जहां जाओ बस यही सवाल पूछूं किसी विषय पर जवाब देंगे मोदी और अंबानी चोर है। मीडिया का इस तरह का मजाक शायद ही कभी हुआ हो और जो मीडिया खुद को हर मसले पर मुखर बताता है वह भी इस पर मौन हो जाता है।अब जब प्रधानमंत्री ने खुद उनके पिताजी पर तंज कसा तो पूरे कांग्रेसी इकोसिस्टम में खलबली मच गई जवाब तो दूर की बात इस तर्क का काट तक खोज नहीं पाए।नकली हिंदू बने आलू से सोना निकालने वाले बाबा अब कर्म का मर्म समझाने लगे यह पहली बार नहीं है जब राहुल जी आधारहीन बयान दिए हैं इससे पहले भी वह हिंदुओं को आतंकवादी घोषित कर दिए, किसी विदेशी राजनयिक से यह कहते हुए नजर आये कि उन्हें हिंदू आतंकवाद से सबसे ज्यादा खतरा है जबकि आज तक एक स्पष्ट सबूत तक नहीं है हिंदू आतंकवाद का। वह कहते हैं कि हिंदू मंदिर लड़की छेड़ने जाते हैं, वह कहते हैं सभी मोदी सरनेम वाले चोर हैं। मतलब हद है किसी बेदाग व्यक्ति पर दाग लगाने के लिए आप इतने उतावले हुए कि हर तरह का कीचड़ उछालने का प्रयास किया पर एक सच यह भी है कि कीचड़ उछालने वक्त कुछ छींटे खुद पर भी पढ़ती हैं और आप उसी के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं।जो व्यक्ति चोर नहीं उसे चोर-चोर कह कर सिद्ध किए जाने का प्रयास हो रहा है पर जब उसने पलट कर आपके खानदान की चोरी का चिट्ठा खोलना शुरू किया तो आप के चोर मंडली में हाहाकार मच गया|राजीव जी कैसे थे ? अच्छे थे या बुरे थे इसका आकलन इतिहास करेगा पर आप क्या है ? इसका आकलन तो हर रोज आप खुद पाते हैं यह बात और है कि आप के राज दरबारी कुछ और ही ढोल पीटते रहते हैं पर सच तो यह है कि आप बड़े है नहीं आपको बड़ा बनवाया जा रहा है और कुछ चंद चाटुकारिता के उपायों के द्वारा आपको बड़ा मनवाया जा रहा है। अपनी गलतियां स्वीकार करने से हर कोई स्वीकार कर लेता है पर आप तो खुद को भरी संसद में पप्पू मनवा कर हर जगह वही गलती करते फिरते हैं धन्य हो यह सोशल मीडिया जिसने आपकी पोल-पट्टी खोली वरना गांव, देहात, छोटे शहर का आदमी तो चंद लुटियन जोन में रहने वाले लूटेरे रूपी पत्रकार जो लिख दिया, जो छाप दिया भारतीय जनता ने अक्षरशः आंख मूंद के मान लिया।अब चाहे कोई भी पत्रकार हो या प्राइमटाइम वाले आपके चहेते कोई भी झूठ बोल कर निकल नहीं।आप हर वक्त प्रधानमंत्री से बहस की चुनौती देते हैं पर सच्चाई तो यह है कि कमल छाप वालों की युवा मोर्चा का कार्यकर्ता भी आपको डिबेट में हरा सकता है अगर आपके हाथ में पेपर न हो तो आप खुद ही नहीं समझ पाते कि क्या बोलना है ? यह बदलते भारत की नई तस्वीर है इसे स्वीकार कीजिए वह जमाने गए जो आपने कुछ भी बोला और दरबारी उसे गाजे-बाजे के साथ बजाने लगे और जनता को बहलाने फुसलाने लगे।आखिर कुछ तो कारण रहा होगा पूर्व प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल में 1984 में जिस में बोफोर्स घोटाले की बात चली थी और घोटाला किसी विपक्ष के द्वारा नहीं उठाया गया था आप ही की सरकार के वित्त मंत्री के द्वारा उठाया गया और उस घोटाले की धमक इतनी थी कि 1989 के चुनाव में आपका पूरा सफाया हो चुका था कांग्रेस की 1984 वाली जीत ही सबसे बड़ी जीत थी।मैं भी चौकीदार के जगह पर आपने कैंपेन चलाया मैं भी बेरोजगार कितने लोगों ने इसका समर्थन किया होगा ? कितने लोगों ने सोशल मीडिया पर डीपी बदली होगी ? कितने लोगों ने यह टाइटल लगाया होगा ? आपको भी पता होगा आप जैसे कार्यकर्ताओं से कटे, कार्यकर्ता भी जमीन से कटा जाहिर है कि पार्टी के लिए अब जमीन बची ही नहीं तो सो अब रोड शो में रोड नहीं दिखेंगे तो क्या लिखेंगे ? हार्दिक जैसे लोग जो चार्टर्ड प्लेन में उड़ते हैं और मैं भी बेरोजगार लिखकर खुलेआम आपके कैंपेन का मजाक उड़ाते हैं| और ठीक उसके उलट मैं भी चौकीदार कैंपेन में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, किसान से लेकर जवान तक, महिलाओं से लेकर नौजवान तक सब एक सुर में बोलते नजर आए| खुद को हारा देख प्रियंका जी को भी ले आए सब न्यूज़ चैनल से लेकर न्यूज़पेपर तक हो हल्ला मचाया नाक मिलती है, नाक मिलती है पर जनता पूछ रही थी क्या इंदिरा जी जैसे राजनीतिक कौशल के गुण मिलते हैं ? आपके आपकी पूरी मंडली मौन थी। वह जमाने ढल रहे हैं जब सिर्फ नेहरू गांधी परिवार में पैदा हर हो जाने से आप भारत रत्न हो जाते हैं।सिर्फ खोखली झूठी बात करके किसी की छवि खराब नहीं की जा सकती जिस छवि को गढ़ने में उसने दस-बीस साल का लगाए हो। झूठ में भी कुछ तो सच्चाई होनी चाहिए। अमेठी को सिंगापुर बनाने वाले पहले यह बताएं चालीस साल में अमेठी में ऐसा क्या किया ? जो वह प्रदेश ही नहीं देश का भी सबसे पिछड़ा जिला है| समय है अभी चेतने का वरना जनता तो आपको हर चुनाव दर चुनाव चेता ही रही है। प्रधानमंत्री ने तो आप को खुला चैलेंज भी दे दिया है कि अगर आप और आपके पार्टी को सच में पूर्व प्रधानमंत्री जी के मान-सम्मान की इतनी फिक्र है तो आ जाए मैदान।यही मौका है चौका मारने का आप भी एक बार खुले खुलकर मैदान में आ जाइए उन तीन जगहों दिल्ली, पंजाब,भोपाल में इसी मुद्दे पर लड़ कर दिखला दीजिए कि सच में मान-सम्मान उनका था। परंतु अफसोस कि आप ऐसा नहीं कर सकेंगे शायद सच्चाई आपको भी पता और उन सिखों के आंखों में उस शब्द का दर्द आज भी झलकता है जब किसी ने कहा था कि एक बड़ा पेड़ गिरने पर धरती हिलती है।जिस अंबानी को आज आप पानी पी पीकर कोसते हैं आंख खुली नहीं कि ट्विटर पर ट्वीट कर गर्दा मचाते हैं कभी कहते प्रधानमंत्री ने उसके खाते में कभी तीस हजार करोड़ तो कभी पैंतालिस हजार करोड़ तो कभी एक लाख करोड़ बता कर पूरे देश का गणित खराब कर दिया।बड़े से बड़े गणितज्ञ आपके द्वारा खोजे गए आंकड़ों की संख्या और आंकड़ों को बोलने का तरीका सुनकर अपना माथा पीट रहे हैं।अब तो वह अनिल जी भी आज खुलकर मैदान में आ गया वह भी पूरे सबूत के साथ कह रहा है कि आप के सरकार के समय उसे एक लाख करोड़ के ठेके मिले थे। देखते हैं अब आप कौन सा नया कहानी लाते हैं मनोरंजन के लिए जनता भी राह देख रही है अगले रैली में मनोरंजन के लिए।