गाजियाबाद में लूटपाट करने वाला दिल्ली का लुटेरा हथियार समेत इंदिरापुरम पुलिस के हत्थे चढ़ा
March 28, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो
गाजियाबाद। दिल्ली के हथियार बन्द लुटेरे गाजियाबाद में सक्रिय हैं, जिससे आनन्द बिहार बॉर्डर इलाके में अपराध को काबू करने में पुलिस नाकोदम है। इस बीच इंदिरापुरम पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जिसने एनसीआर में लूटपाट और झपटमारी की वारदात करने वाले एक शातिर लुटेरे को हथियार और लूटे गए सामानों के साथ गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उसके कब्जे से गत वर्ष चोरी की हुई एक अपाची मोटर साइकिल, नौ मोबाइल एवं तमंचा व कारतूस बरामद किया है।
 
इस बात की जानकारी सीओ इंदिरापुरम एएसपी अपर्णा गौतम ने इंदिरापुरम थाना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दी है। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनावों के मद्देनजर पुलिस अलर्ट है। जिससे बुद्धवार की सुबह ईडीएम मॉल के पास से एक बाइक सवार को पुलिस ने दबोच लिया, क्योंकि जब उस पर कुछ शक हुआ तो उसे रोकने का इशारा किया गया, लेकिन वह अपनी बाइक तेजी से भगाने लगा। जिसके बाद पुलिस ने भी उसका तेजी से पीछा किया, जिससे कुछ ही देर में वह पुलिस के हत्थे चढ़ गया। 
 
पुलिस पूछताछ में उसने अपना नाम अरबाज पुत्र हबीब निवासी उस्मानपुरी, शास्त्रीनगर, दिल्ली बताया है। उसकी तलाशी लेने पर पुलिस ने उसके पास से 315 बोर का एक तमंचा और कुछ कारतूस पाए। फिर उसकी निशानदेही पर इलाके से लूटे गए नौ एड्रायड मोबाइल फोन बरामद किए गए। पुलिस के मुताबिक, वह जिस बाइक पर सवार था, वह चोरी की है जिसे उसने गत वर्ष साहिबाबाद थाना क्षेत्र से ही चोरी किया था।
 
इस मौके पर इंदिरापुरम एसएचओ संदीप कुमार ने बताया कि यह एक शातिर गिरोह है जो दिल्ली से यहां आकर वारदात को अंजाम देता है। इस गिरोह के लोग वारदात के दौरान आधा दर्जन या फिर उससे अधिक मोबाइल, पर्स, सोने की चेन आदि लूटते हैं और फिर फरार हो जाते हैं, जिससे स्थानीय पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाते। लिहाजा, इस गिरोह की धरपकड़ के लिए पुलिस की टीमें लगी हुईँ थी, जिस क्रम में आज यह बड़ी सफलता हाथ लगी है। उन्होंने आगे बताया गया कि बरामद मोबाइल में से चार कनेक्ट कर लिए गए हैं, जबकि शेष के मालिकों के बारे में पता लगाया जा रहा है। उधर, मोटर साइकिल भी साहिबाबाद से चोरी की गई थी, जहां पर इस बाबत एक मुकदमा भी दर्ज है।
 
इस टीम में एसएचओ इंदिरापुरम संदीप कुमार के अलावा चौकी प्रभारी शरदकांत शर्मा, उपनिरीक्षक महावीर सिंह, कांस्टेबल मुकेश कुमार और सिराज का सराहनीय सहयोग रहा, जिसके लिए पुलिस अधिकारियों ने उनकी पीठ थपथपाई।