गुलाम कश्मीर में उठी पाकिस्तान से आजादी की आवाज
September 10, 2019 • विष्णुगुप्त

(विष्णुगुप्त)

धारा 370 हटाये जाने की भारत की वीरता अब पाकिस्तान के अस्तित्व पर न केवल भारी पड रही है बल्कि गुलाम कश्मीर में भी पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है, यह अलग बात है कि पाकिस्तान की पुलिस-सैनिक गुलाम कश्मीर में बज रही खतरे की घंटी को बंद करने के लिए उत्पीड़न और बर्बरता का सहारा ले रही है, फिर भी खतरे की घंटी की आवाज दुनिया तक कैसे नहीं पहुंचेगी? यह आवाज पूरी दुनिया में सुनी जा रही है, दुनिया के अखबारो की सुर्खियां भी बन रही है। जब गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान से आजादी और गुलामी को लेकर आवाज उठेगी और पाकिस्तान की बर्बरता के खिलाफ लोग सडकों पर उतरेंगे तब दुनिया की जनमत और दुनिया को नियंत्रित करने वाले अंतर्राष्टीय संगठनो पर भी दबाव जरूर पडेगा, सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान को अपनी बर्बरता और निरकुशता को समाप्त करने की नसीहत भी मिलेगी। पाकिस्तान की आंतरिक समस्या और गुलाम कश्मीर का प्रश्न भारत के लिए बडी राहतवाली रही है। पाकिस्तान प्रायोजित प्रोपगंडा दुनिया में इस लिए कारगर साबित नहीं हुआ है कि खुद पाकिस्तान अपनी आतंरिक समस्याओं को नियंत्रित करने के लिए सैनिक और पुलिस बर्बरता का सहारा लेता है। यही कारण है कि धारा 370 की भारतीय वीरता के खिलाफ पाकिस्तान के विरोध और धमकी को दुनिया लगभग अनसुनी कर डाली। गुलाम कश्मीर की आजादी का प्रश्न अब पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी जरूर बन गयी है, पाकिस्तान की सेना और पुलिस की करतूत अब मानवाधिकार हनन का भी प्रश्न बनेगा।
          अभी-अभी गुलाम कश्मीर में पाकिस्तान से मुक्ति को लेकर बहुता बडा और दुनिया की जनमत का ध्यान खीचने वाला आंदोलन हुआ है। यह आंदोलन जेकेएलएफ के प्रमुख मोहम्मद सगीर के नेतृत्व में शुरू हुआ है। पाकिस्तान विरोधी आंदोलन में हजारों लोग शामिल हुए और सभी लोगों ने पाकिस्तान से आजादी की मांग की और अंतर्राष्टीय विरादरी से आत्म निर्णय का अधिकार दिलवाने की अपील की गयी। जेकेएलएफ के इस आंदोलन ने पाकिस्तान की नींद उडाया है। पाकिस्तान की नींद इसलिए उडी है कि धारा 370 की भारतीय वीरता के खिलाफ प्रोपगंडा बेपर्द  न हो जायें और अंतर्राष्टीय नियामक खुद गुलाम कश्मीर और बलुचिस्तान में बर्बरता के खिलाफ पाकिस्तान की गर्दन न नाप लें। यही कारण है कि पाकिस्तान ने जेकेएलएफ के आंदोलन को कमजोर करने के सभी हथकंडे अपनाये। सबसे पहले इस्लाम का हवाला देकर समझाने की कोशिश की पर गुलाम कश्मीर की जनता नहीं मानी। फिर सैनिक और पुलिस उत्पीडन का सहारा लिया गया। जेकेएलएफ का दावा है कि पाकिस्तानी पुलिस ने करीब 40 लोगों को गिरफ्तार कर जेलो में डाल दिया गया है। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि आंदोलनकारी लोगों के परिजनों का भी उत्पीडन जारी है। यह सही है कि पाकिस्तान ने कश्मीर के बडे भूभाग को कब्जा तो जरूर कर लिया था पर गुलाम कश्मीर की जनता को कभी भी आजादी नहीं मिली। गुलाम कश्मीर की जनता सिर्फ और सिर्फ पाकिस्तान का गुलाम बन कर रह गयी। शसान-प्रशासन और विकास के प्रसंग पर ये भेदभाव के शिकार हैं, गुलाम कश्मीर के संशाधनों का प्रयोग पाकिस्तान की भलाई और पाकिस्तान के विकास के लिए किया जाता है पर गुलाम कश्मीर को कुछ भी नहीं मिलता है।
          गुलाम कश्मीर को सिर्फ और सिर्फ भारत विरोधी हथकंडा बना कर रखा गया है। पाकिस्तान ने गुलाम कश्मीर को कैसे हडपा था, यह कौन नहीं जानता है। पाकिस्तान की सेना ने वेश बदल कर हमला की थी। कबायलियों के वेश में आयी पाकिस्तान सेना ने कश्मीर के बडे भूभाग पर कब्जा कर ली थी। राजा हरि सिंह ने बिना शर्त जम्मू-कश्मीर का विलय भारतीय राज्य में किया था। भारतीय सेना ने वीरता दिखायी थी और पाकिस्तान सेना को बहुत दूर तक खदेड भी दी थी। जवाहर लाल नेहरू ने भारतीय सेना के हाथ बांध दिये थे। फलस्वरूप कश्मीर के एक बडे भूभाग पर पाकिस्तान का कब्जा हो गया था। भारतीय शासकों में वीरता का अभाव के कारण ही आज तक गुलाम कश्मीर पाकिस्तान के कब्जे मे ही है। अगर भारतीय शासकों में वीरता होती तो निश्चित तौर पर गुलाम कश्मीर भी हमारे देश का अंग होता। सही तो यह है कि भारतीय शासकों ने गुलाम कश्मीर को लेकर कभी भी कोई गंभीर प्रयास ही नहीं किये और न ही पाकिस्तान को अंतर्राष्टीय स्तर पर कोई गंभीर घेराबंदी करने की कोशिश की। जबकि पाकिस्तान की घेराबंदी करने के लिए तर्क भी थे और तथ्य भी थे। पाकिस्तान गुलाम कश्मीर को एक अलग क्षेत्र के रूप में स्वीकार किया था। गुलाम कश्मीर पाकिस्तान का अंग नहीं था। फिर भी पाकिस्तान ने गुलाम कश्मीर को एक अंग के रूप में तब्दील कर दिया। गुलाम कश्मीर के लोगों को चुनाव लडने या फिर किसी सरकारी कागजात हासिल करने के लिए यह कहना होता है कि वे पाकिस्तान के नागरिक हैं और पाकिस्तान के संविधान में विश्वास रखते हैं। गुलाम कश्मीर के शासन को भी पाकिस्तान के संविधान ही नियंत्रित करता है।  एक प्रश्न यह है कि गुलाम कश्मीर में सत्ता पाकिस्तान प्रायोजित होती है, पाकिस्तान विरोधी शख्सियत कभी गुलाम कश्मीर की सत्ता पर सतासीन हो ही नहीं सकते हैं। पाकिस्तान ने गुलाम कश्मीर के एक बडे भूभाग को चीन को सौंप चुका है। गुलाम कश्मीर के एक बडे भूभाग को सौंपना गुलाम कश्मीर की जनता के साथ अन्याय था। चीन ने गुलाम कश्मीर में किस प्रकार का खेल,खेल रहा है, यह भी जगजाहिर है। सच तो यह है कि चीन ने गुलाम कश्मीर में गुलाम कश्मीर की जनता की आशाओं और भविष्य की कब्र खोद रखी है। उल्लेखनीय है कि चीन के कई सामरिक ठिकाने गुलाम कश्मीर में हैं। चीन अपने सामरिक ठिकानों के माध्यम से भारत की सुरक्षा को चुनौती भी देता है बल्कि भारत को डराता-धमकाता भी है। भारत के खिलाफ पाकिस्तान और चीन का गठजोड किस प्रकार से काम करता है, यह भी जगजाहिर है। धारा 370 पर भारतीय वीरता को लेकर पाकिस्तान को दुनिया भर से हार मिली, दुनिया के देशों ने पाकिस्तान के दृष्टिकोण को खारिज कर डाला था पर चीन ही एक मात्र देश है जो पाकिस्तान के साथ खडा रहा। सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की सहायता के लिए और भारत के खिलाफ चीन सयुक्त राष्टसंघ भी गया। पर भारत की कूटनीतिक वीरता के सामने चीन और पाकिस्तान का गठजोड कोई खास करिशमा नहीं कर सका। गुलाम कश्मीर में भी पाकिस्तान और चीन का यह गठजोड भारत की सुरक्षा को हमेशा खतरे में डालता रहा है। सबसे बडी बात यह है कि पाकिस्तान के आंतकवादी संगठन और आतंकवादी भी गुलाम कश्मीर की जनता पर हिंसा बरपाती है। गुलाम कश्मीर के अंदर पाकिस्तानी आतंकवादियों के शिविर और सक्रियता से विकास और शिक्षा जैसे कार्य बाधित होते हैं। इस्लामिक आतंकवादी सिर्फ और सिर्फ इस्लाम आधारित व्यवस्थाएं ही चाहते हैं। पाकिस्तानी इस्लामिक आतंकवादियों के विरोध करने पर गुलाम कश्मीर की जनता हिंसा का शिकार होती है।
       भारत अब पाकिस्तान के खिलाफ आकामक कूटनीति पर चल रहा है, यह एक अच्छी कूटनीति है। बलुचिस्तान की अस्मिता और स्वतंत्रता को लेकर अंतर्राष्टीय स्तर पर भी भारत उठा रहा है। अब भारत को गुलाम कश्मीर के प्रश्न पर आक्रामक नीति अपनानी होगी। गुलाम कश्मीर भी हमारा अंग है। गुलाम कश्मीर में हर पाकिस्तानी करतूत को उजागर करने की जरूरत है। जब दुनिया को यह पता चलेगा कि धारा 370 की समाप्ति का विरोध करने वाला पाकिस्तान खुद गुलाम कश्मीर में हिंसा बरपा रहा है और मानवता का खून कर रहा है तो फिर पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने उजागर हो जायेगा।