चिदंबरम को जेल, नहीं मिली बेल
August 22, 2019 • बाल मुकुन्द ओझा

       (बाल मुकुन्द ओझा)

सीबीआई अदालत ने गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम को 26 अगस्त तक सीबीआई हिरासत में रखकर पूछताछ करने की मांग स्वीकार की है। चिदंबरम को बुधवार को आईएनएक्स घोटाले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों की जोरदार और गरमागरम दलीलों को सुनने के बाद चार दिन की रिमांड स्वीकार की।
गौरतलब है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस वर्ष अपनी चुनावी रैलियों में साफ तौर पर चेताया था की वर्षों सत्तासुख भोगने वाले जिन प्रभावी लोगों ने देश को लूटा है वे भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों में बेल पर है और जल्दी ही जेल भी जायेंगे। मोदी ने कहा था सत्तासुख भोगने वाले नेता अपने आप को कानून से ऊपर समझते है, उनके घोटाले सामने आते ही वे जाँच एजेंसियों और अदालतों के चक्रव्यूह में फंस गए है। मोदी का इशारा सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी, राबर्ट वाड्रा, पी चिदंबरम आदि कांग्रेस के नेताओं की ओर था जो भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरूपयोग के विभिन्न मामलों में बेल पर चल रहे है।   
आईएनएक्स भ्रष्टाचार के आरोप में देश के पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम अपने बेटे कार्ति के साथ फंसे हुए है। सीबीआई और ईडी एक लम्बे अर्से से इन प्रकरणों की जाँच में जुटे थे। बेटा जेल की हवा खा चुका मगर पिता कानूनी दावंपेचों के सहारे अग्रिम जमानत का लुत्फ उठा रहे थे। जाँच एजेंसियों का कहना था चिदंबरम जाँच एजेंसियों को सहयोग नहीं कर रहे है इसलिए उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ करनी है। आईएनएक्स मीडिया घोटाले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी। हाईकोर्ट का प्रथम दृष्टया मानना है कि प्रभावी जांच के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ जरूरी है। अदालत ने इस मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का क्लासिक केस बताया। जस्टिस सुनील गौर ने कहा कि ऐसे मामलों में जमानत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा।
हाई कोर्ट से जमानत खारिज होते ही चिदंबरम भूमिगत हो गए। इसके बाद सीबीआई की एक टीम पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम के घर पहुंची जहाँ वे नहीं मिले। सीबीआई दो घंटे में हाजिर होने का नोटिस चिपकाकर लौट आयी। तत्पश्चात सिनेमाई रहष्य, रोमांच और  मारधाड़ की फिल्म की तर्ज पर आखिर बुधवार रात्रि सीबीआई ने गिरफ्तार कर ही लिया लिया। इस हाई वोल्टेज ड्रामे को न्यूज चैनलों पर देखने के लिए देशभर के लोग शाम से रात्रि तक अपने टेलीविजन से चिपके रहे। लुकआउट नोटिस जारी करने वाली सीबीआई और ईडी की टीम उनके घर जा पहुंची। दरवाजा बंद देख सीबीआई की टीम दीवार फांदकर अंदर गई और  हाई वोल्टेज ड्रामे के बाद गिरफ्तार किया। 
 उम्मीद के मुताबिक चिदंबरम के पक्ष में कांग्रेस पार्टी खुलकर सामने आगयी। गिरफ्दारी से पूर्व कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी की अगुवाई में वकीलों की फौज आनन फानन में सुप्रीम कोर्ट गयी मगर वहां से फौरी तौर पर कोई राहत नहीं मिली। इसी बीच 30 घंटे भूमिगत रहने के बाद पूर्वमंत्री पी चिदंबरम कांग्रेस मुख्यालय में नाटकीय ढंग से प्रकट हुए और मोदी सरकार पर बदले की भावना का आरोप जड़ दिया। कांग्रेस नेता लगातार सरकार को निशाना बना रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली हाई कोर्ट और मीडिया की मंशा पर भी सवाल उठाना शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ भाजपा का कहना है कानून को अपना काम करने दीजिये। जिसने गड़बड़ घोटाला किया है वह जेल तो जायेगा ही। कांग्रेस के रुख को देखकर लगता है कांग्रेस वही गलती दुहराने जा रहे है जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी बोफोर्स के दलालों  को बचाने में की थी।  
 आखिर क्या था आईएनएक्स घोटाला जिसने देश के पूर्व वित्त मंत्री को सलाखों को पीछे पहुंचा दिया। आइये इसके तथ्यों की जानकारी करते है। चिदंबरम पर आईएनएक्स मीडिया केस में फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड से गैरकानूनी तौर पर मंजूरी दिलाने के लिए रिश्वत लेने का आरोप है। इस केस में अभी तक चिदंबरम को 20 से ज्यादा बार गिरफ्तारी से राहत मिल चुकी है, लेकिन हर बार की तरह इस बार उन्हें कोर्ट से राहत नहीं मिली। यह मामला 2007 का है जब पी. चिदंबरम यूपीए-2 सरकार में वित्त मंत्री थे। सीबीआई इस मामले में उनके बेटे कार्ति चिदंबरम को भी गिरफ्तार कर चुकी है जो फिलहाल जमानत पर हैं। 
कार्ति चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया को 2007 में एफआईपीबी से मंजूरी दिलाने के लिए कथित रूप से रिश्वत लेने के आरोप में 28 फरवरी 2018 को गिरफ्तार किया गया था।  ईडी ने सीबीआई की एक प्राथमिकी के आधार पर एक पीएमएलए का मामला दर्ज किया।  ईडी ने 2007 में विदेश से 305 करोड़ की राशि प्राप्त करने के लिए आईएनएक्स मीडिया को एफआईपीबी मंजूरी देने में कथित तौर पर अनियमितता का आरोप लगाया है।