चुप्पी चाप कमल छाप ने ध्वस्त किया ममता का किला
May 24, 2019 • हर्ष शर्मा

(हर्ष शर्मा)

लोकसभा चुनाव में ममता बनर्जी का दम्भ धराशाही हो गया है। ममता के बढ़ चढ़ कर किये जा रहे दावों की हवा निकल गयी है। भाजपा ने ममता के गढ़ में सेंध लगाकर अपनी ताकत का अहसास करा दिया है। लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की बहुत अहम भूमिका रही है, पश्चिम बंगाल मे दीदी यानी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सरकार टीएमसी (तृणमूल कांग्रेस) ने 2011 से अपना दबदबा बना रखा था, किन्तु इस चुनाव के परणामों परअगर नजर डाले तो कहीं ना कहीं काफी बड़ा नुकसान उनकी पार्टी को पहुंचा है, बंगाल की 42 में से 22 सीटें तृणमूल कांग्रेस के उम्मीद्वारो ने जीती है जबकि बीजेपी के 18 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है, इनमें कुछ सीटें तो ऐसी है जिनमे काफी हद तक कांटे की टक्कर हुई है। बीजेपी कोलकाता के शहरी अंचलों में तो अपना वर्चस्व नहीं जमा पाई लेकिन राज्य के ग्रामीण अंचलों से ज्यादा सीटें जीती है।
कुछ दिनों से बंगाल हिंसा और घोटालों के नाम पर काफी सुर्खियों में रहा है, चाहे वो जातिवाद के पक्षपात को लेकर हो या सारधा या नारादा को लेकर हो, इससे कहीं ना कहीं तृणमूल कांग्रेस पार्टी की छवि पे प्रभाव पड़ा है।
इस साल 19 जनवरी को ममता बनर्जी ने कोलकाता के ब्रिगेड मैदान में एक बहुत बड़ी रैली की थी जिसका नाम दिया गया था श्युनाइटेड इंडिया रैली श्, जिसमें विपक्ष के सभी बड़े पार्टियों के दिग्गज नेताओं ने आकर समर्थन दिया था और यहां तक कि ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को एक्सपायरी बाबू बोलकर संबोधित भी किया था लेकिन आज देश की जनता ने उन्हें भी एक गहरा संदेश दिया है।
इस 2019 के चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्य के लगभग सभी जिलों में रैलियां की है और लोगों से मिले है उनसे विकास के मुद्दों पर बाते की है और इस चुनाव के लिए उनका बंगाल की जनता के लिए नारा भी रहा है ष्चुप्पी चाप कमल छापष्।
उम्मीद है कि 2021 के विधानसभा चुनावों में बंगाल को अपने कब्जे में लेने के लिए बीजेपी अपना अभियान शुरू करेगी। आज शाम, राष्ट्रीय चुनाव में पार्टी की बड़ी जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ष्आज के परिणाम से पता चलता है कि भाजपा पश्चिम बंगाल में राज्य सरकार बनाएगी।ष्
अब देखना यह है कि भारतीय जनता पार्टी अपना वजूद बंगाल की मिट्टी पर कायम रख पाती है या नही या तृणमूल कांग्रेस आने वाले समय में इस चुनाव से कुछ सीख लेती है।