झूठ बोले कौआ काटे
July 4, 2019 • बाल मुकुन्द ओझा

                               व्यंग्य
(बाल मुकुन्द ओझा)

झूठ बोले कौआ काटे। यह कहावत हम जन्म से ही सुनते आ रहे है। ऐसा इसलिए कहा जाता है कि ताकि लोग झूठ बोलने से बचें और सत्य बोलें। बचपन से ही हमें सच बोलने की सीख दी जाती है। यह रटाया जाता है झूठ बोलना पाप है। मगर अब तो समूची सियासत ही झूठ सी काली हो गयी तो कौन क्या करें। सियासत का सच तो यह है आज झूठ को सच बताने का पूरा अभियान चल रहा है। झूठ ही सच है, झूठ की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है।
आज की सियासत झूठ की दहलीज पर खड़ी होकर दहाड़े मार रही है। यहाँ सत्य का नामो निसान नहीं है। जो जितना बड़ा झूठ बोलेगा वह उतना बड़ा आदमी बनेगा। झूठ, छल-कपट-प्रपंच साधारण जीवन से लेकर सियासत तक दिखाई पड़ते हैं। लोगों को बहलाना-फुसलाना या बरगलाना सियासत के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है। लेकिन राजनीति में झूठ या यूं कहें कि सफेद झूठ को हथियार बनाना एक नया चलन है। आकाश विजयवर्गीय ने अफसरों की पिटाई कर अपने जोहर दिखाए तो प्रधानमंत्री ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए ऐसे लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने को कहा। अब ये झूठ बोल रहे है या राजनीति में शुचिता की बात कर रहे है कौन जाने। राजस्थान में विधानसभा अध्यक्ष ने प्रेस पर पाबन्दी लगाने का ठीकरा प्रेस सलाहकार समिति पर फोड़ दिया। अब इनमें कौन झूठा है और कौन सच्चा इसकी पहचान जरुरी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की झूठ पर झूठ लोकसभा चुनावों में नहीं चली तो इस्तीफे की राजनीति उन्हें मुफीद लग रही है। प. नेहरू को लेकर काफी दिनों से झूठ की सियासत फैलाई जा रही है। ममता भाजपा की बंगाल में एंट्री को रोकने के लिए झूठी सियासत कर रही है तो भाजपा भी राम का नाम लेकर झूठ की सियासत को लगातार हव्वा दे रही है। कहीं कर्ज माफी के नाम पर लोगों को बरगलाया जा रहा है तो कहीं गाँधी की झूठी दुहाई हम पर हावी हो रही है। कर्णाटक में येदियुरप्पा के लिए अंगूर खट्टे है क्योंकि सत्ता सुंदरी उन्हें वरण नहीं कर रही है। दंगल गर्ल ने सिनेमा से तौब्बा करते हुए धर्म की बात जोड़ दी। अब वो कितनी झूठ बोल रही है यह अल्लाह ही जाने।
सच्चाई पीछे हट रही है तो झूठ लगातार आगे बढ़ रही है। हमारे नेता झूठ का सहारा लेकर अपनी सियासत को चमका रहे है यह किसी से छिपा नहीं है। ऐसा लगता है झूठ हमारी सियासत में घूस कर सिर चढ़ कर बोलने लगी है।
किसी शायर ने ठीक ही कहा है -
हर तरफ मशहूर है झूठ की सियासत करने वाले
मैं सच का पैरोकार, मेरा कही नाम तक न आया।
भरे बाजार सच की दुकानों पर है सन्नाटा
तिजारत झूट की चमकी है मक्कारी की बातें हैं ।