टेक्सटाइल फेयर्स इंडिया 'सस्टेनिबिलिटी' रहा ध्यान का केंद्र
July 18, 2019 • शशिधर शुक्ला
नई दिल्ली | प्रगति मैदान में चल रहे टेक्सटाइल फेयर्स इंडिया 2019 में प्रदर्शनी और फैशन से हटकर अगर कुछ देखने को मिला तो वो था एक ऐसा विषय जिससे पूरा विश्व जूझ रहा - 'वेस्ट मैटेरियल'| यहाँ पर आये ना केवल कम्पनिया बल्कि फैशन डिजाइनर भी इस विषय पर काम कर रहे | जापान की कम्पनी बेम्बर्ग की माने तो वह एक खास प्रकार से इस विषय  पर योगदान दे रहे है | कपडे बनने में प्रयोग में आने वाले बीज जो बेकार हो जाते है, उसके प्रयोग से एक खास प्रकार के रेशमी धागे बनाये जाते है जिससे सिल्क जैसा कपडा तैयार होता है | इन बीजों के प्रयोग से कपडा बनाने वाली ये एक मात्र कंपनी है |
तिरुपुर से आई कंपनी सुलोचना कॉटन स्पिनिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड ने प्लास्टिक के बोतल से कपडे का निर्माण किया है | प्लास्टिक बोतल को रिसाइकल कॉटन और पॉलीस्टर के साथ मिलाकर इसे कपड़े में बदला गया है , इसके लिये भारत और विश्व के अलग अलग कोने से प्लास्टिक इकठ्ठा किया जाता है | इसे बनाने में भी प्रकृति का पूरा ध्यान रखा जाता है, जैसे की सौर्य ऊर्जा और वायु ऊर्जा का प्रयोग | ये पानी, रसायन और ऊर्जा के डिसचार्ज का भी ख्याल रखते है|  यह कपडे अलग अलग देश और मौसम के हिसाब से बनाया जाता है | और यह बिलकुल आम कपडे की तरह ही आरामदायक है | इस पहल से प्लास्टिक से फ़ैल रही प्रदूषण से एक बड़े मात्रा में निजाद पाया जा सकता है |
डिजाइनर सोनिया ने भी इस विषय पर अपने डिजाइन द्वारा एक पहल की है| उनके द्वारा बनाये गए कपड़े अंदर - बहार दोनों तरफ से पहने जा सकते है, जिससे  कपडे  के उपयोग को सिमित किया जा सके|  डिजाइनर पदमा राज केसरी ने भी अपने कलेक्शन में पुराने जीन्स और जीन्स के कतरन का प्रयोग किया |