डर के आगे जीत
August 9, 2019 • राकेश रमण
जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 और धारा 35ए के बंधन व जकड़न से आजाद किये जाने के बाद जमीनी स्तर पर कैसा माहौल रहेगा इसको लेकर हर तरफ शंका, असमंजस व बेचैनी का माहौल होना स्वाभाविक ही था। तभी तो इस पूरी योजना को अमली जामा पहनाने से पूर्व केन्द्र सरकार ने भी पूरे सूबे को एक तरह से छावनी में तब्दील कर दिया और धारा 144 लागू करने के नाम पर अघोषित तौर पर कर्फ्यू लगा दिया गया और तमाम संचार सेवाएं ठप कर दी गईं। लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलने की हिदायत दी गई और सभी स्कूल, काॅलेज, व्यापारिक प्रतिष्ठान से लेकर निजी व सरकारी संस्थान बंद करा दिये गये। उसके बाद सूबे की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह मुतमईन हो जाने के बाद ही कश्मीर को लेकर सरकार ने अपनी मंशा का खुलासा किया और प्रदेश से अनुच्छेद 370 और धारा 35ए को हटाने के साथ ही जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित करा कर जम्मू कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो अलग केन्द्र शासित प्रदेशों का सृजन किया गया। उसके बाद आज पहली बार जब कुछ बेहद संवेदनशील इलाकों को छोड़ कर बाकी समूचे सूबे में शिक्षण संस्थानों को और बाजारों को खोला गया और आम लोगों को जुमे की नमाज अदा करने के लिये मस्जिद जाने के लिये प्रोत्साहित किया गया तो प्रदेश की जमीनी तस्वीर इस कदर खुशगवार व बेहतरीन दिखाई पड़ी जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता था। अब तक सामान्य दिनों में भी जुमे की नमाज के बाद मस्जिद से तकरीर सुनकर लौट रहे युवाओं द्वारा सुरक्षाबलों के खिलाफ पत्थरबाजी किये जाने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती थीं। लेकिन कश्मीर की आम आवाम को आजाद फिजा में सांस लेने का मौका मिलने और भारत का अभिन्न हिस्सा बनने का मौका मिलने के बाद पहले जुमे की नमाज के बाद से ही तस्वीर में व्यापक तब्दीली और परिवर्तन दिखाई पड़ रहा है। कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। कहीं किसी तरह के तनाव का माहौल महसूस नहीं किया गया है। हर तरफ जोश, उत्साह और उमंग का माहौल दिखाई पड़ा है और तमाम सरकारी व गैरसरकारी मीडिया ने वहां की जो तस्वीरें भेजी हैं उन्हें देख कर सूबे में हालात बिल्कुल सामान्य ही नहीं बल्कि पहले से काफी बेहतर और उत्साहवर्धक दिखाई पड़ रहा है। निश्चित ही ये तस्वीरें और सूबे के जमीनी हालात उन गिद्धों को बेहद मायूस करने वाले हैं जो यह उम्मीदें पाल कर बैठे हुए थे कि आम लोगों को घरों से बाहर निकलने का मौका मिलने के बाद सूबे में व्यापक पैमाने पर अशांति का माहौल दिखाई पड़ेगा। लोग भारत सरकार के खिलाफ अपने रोष का प्रदर्शन करेंगे। कहीं पत्थरबाजी होगी तो कहीं भारत का झंडा जलाया जाएगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होना यह बताने के लिये काफी है मोदी सरकार ने जो पहल की है उससे प्रदेश के लोग भी सहमत हैं और उन्हें भी भारत से उतना ही प्यार और लगाव है जितना किसी अन्य सूबे के बाशिंदे को। इस माहौल ने सबसे अधिक निराश और परेशान पाकिस्तान को किया है जो बीते तीन दिनों से बुरी तरह बिलबिलाया हुआ है और भारत की सब्र का इम्तहान लेने में अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। एक ओर पाकिस्तान यह प्रचारित करने की कोशिश कर रहा है कि भारत सरकार ने कश्मीर के आम लोगों की कनपटी पर बंदूक रखकर सूबे का विशेष दर्जा वापस लिया है वहीं पाकिस्तान की सेना ने तो औपचारिक तौर पर यह बयान जारी करने में संकोच नहीं किया कि जम्मू कश्मीर के आम लोगों के हितों की रक्षा और उनकी मदद करने के लिये वह किसी भी हद से गुजर जाने के लिये पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा भारत की घेराबंदी करने के लिये पाकिस्तान ने एक ओर संयुक्त राष्ट्र में इस मामले को उठाने की धमकर दी है तो दूसरी ओर उसके विदेशमंत्री चीन पहुंच रहे हैं ताकि उसकी मदद से भारत के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई करने की राह निकाल सकें। रही सही कसर पाकिस्तान ने अपनी जमीन पर पल रहे आतंकियों को अंदरखाने में युद्धस्तर पर सक्रिय करके पूरी कर दी है और इसी का नतीजा है कि पाकिस्तान की जमीन से भारत को दहलाने की साजिश रचने में अलकायदा, आइएस, व लश्कर व मुजाहिदीन सरीखे उसके तमाम आतंकी सहयोगी जुट गए हैं। लेकिन उसकी एक नहीं चल पा रही है और भारत के रक्षा विभाग और विदेश विभाग ने पाकिस्तान की तमाम कूटनीतिक व आतंकी साजिशों को ध्वस्त व नेस्तोनाबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। दूसरी ओर भारत की अंदरूनी राजनीति में भी कश्मीर की मौजूदा शांति से मायूस दिख रहे तत्वों की ओर से आग सुलगाने व भड़काने की भरसक कोशिश की जा रही हैं और इसके लिये सूबे के सियासी जमातों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के राजनीतिक दलों के निजी स्वार्थों की काट के लिये भी पर्याप्त इंतजाम किये गये हैं। एक ओर अलगाववादियों और प्रदेश के राजनीतिक छत्रपों को आम लोगों से जुड़ने का मौका नहीं दिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर कांग्रेस व वाम दलों के नेताओं को भी अभी इस संवेदनशील सूबे में जाकर घड़ियाली आंसू बहाने की इजाजत नहीं दी जा रही है। इस सबका नतीजा है कि आम लोगों को खुद ही यह तय करने का मौका मिला है कि उनके लिये क्या सही है और क्या गलत। इसके बाद आम लोगों ने जो तस्वीर दिखाई है उससे ना सिर्फ भारत विराधी तत्वों की गाल पर तगड़ा तमाचा पड़ा है बल्कि भारतीयता और राष्ट्रीयता की धारा को उम्मीद से अधिक मजबूती मिली है। यानि जिस डर, संशय और आशंका का माहौल बनाया जा रहा था वह पूरी तरह निर्मूल साबित हुआ है और अब दावे से यह कहा जा सकता है कि इस बार घाटी में जो ईद मनेगी वह देखने और दिखाने वाली होगी।