डॉक्टर और मरीज के मध्य अविश्वास की चुनौतियां
June 30, 2019 • बाल मुकुन्द ओझा

(बाल मुकुन्द ओझा)

डॉक्टर्स डे हम ऐसे माहौल में मना रहे है जब धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर और धरती के निवासियों के मध्य अविश्वास की रेखा गहरी होती जा रही है जिसके फलस्वरूप दोनों में मारपीट की घटनाएं नित्य प्रति बढ़ती जा रही है। हाल ही कोलकत्ता में घटी दुर्भाग्यपूर्ण घटना से पूरे देश के डॉक्टर आंदोलित हो गए और अपना कामकाज छोड़कर सड़कों पर उत्तर आये। यह केवल एक घटना नहीं है बल्कि ऐसी वारदातें देशभर में दैनंदिन देखने को मिल रही है। यह देखा गया है
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात ज्यादा बेहतर नहीं है। बड़ी आबादी के लिहाज से न व्यापक अस्पतालों की सुविधा है और न ही डॉक्टर्स की। सरकारी अस्पतालों में जितने डॉक्टर्स हैं, वो भारी दवाब में काम कर रहे हैं जब भी कोई मानसकि या शारीरकि रूप से दक्कित महसूस होती है तो हम तुरंत डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। अक्सर हम सुनते है डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं और भगवान के इसी अवतार के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए लोग धरती पर डॉक्टर्स डे मनाते हैं। डॉक्टरों के अच्छे व्यवहार से मरीजों का आधा मर्ज दूर हो सकता है। डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास सबसे अधिक जरूरी है। यह दवा का काम करेगा। डॉक्टर मरीजों के भरोसे को तोड़े नहीं।
भारत में डॉक्टर्स डे जुलाई महीने की हर पहली तारीक को मनाया जाता है। आज हमें निष्पक्ष भाव से डॉक्टर और मरीज के बीच पनपे अविश्वास की चुनौतियों पर विचार करना होगा। दरअसल इन दिनों डॉक्टरों के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कई बार मरीज बेहतरीन इलाज मिलने के बावजूद भड़क जाते हैं और डॉक्टर या हॉस्पिटल को नुकसान भी पहुंचा देते हैं। ऐसा हाल के वर्षों में कई जगह देखने को मिला है। ऐसी खबरें आपने भी अखबारों या टीवी पर पढ़ी या देखी होंगी। दरअसल एक डॉक्टर का कार्य मरीजों के हित में सर्वश्रेष्ठ कार्य करना होता है, लेकिन कई बार लाख कोशिश के बावजूद वे मरीज को सन्तुष्ट नहीं कर पाते। कई बार मरीज के परिजन अस्पताल के खर्चे को देखकर भड़क जाते है वह भी तब जब मरीज बजाय ठीक होने के अधिक बीमार होता चला जाता है। उस समय परिजन समझते है अस्पताल अपने खर्चे निकलने में जुटा है और उसे मरीज के स्वास्थ्य की चिंता कम है। मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास की भावना का अभाव है जिसके कारण अस्पतालों में आये दिन मारपीट की घटनाएं होती है। इस समस्या से निजात पाने के लिए जरूरी है कि मरीज डॉक्टर पर विश्वास करें वहीँ डॉक्टर का भी यह कर्तव्य है कि वह मरीज और उसके परिजनों को विश्वास में लेकर ही अपने कार्य को अंजाम दें ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके।
कई बार यह भी देखा गया है जाँच पर जाँच कराई जाती है और जाँच के नाम पर मरीज को ठगा जाता है। ये ही वे कारण है जो डॉक्टर और मरीज के बीच दूरियां बढ़ाते है। आज के दिन इन दूरियों को पाटने की जरुरत है ताकि धरती के भगवान पर एक बार फिर विश्वास कायम हो।
डॉक्टरों का कहना है कई बार हम चाहते हुए भी मरीज के लिए कुछ नहीं कर पाते है क्योंकि सब चीजें हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। कई बार किस्मत साथ नहीं देती। ऐसे में मरीजों को धैर्य से काम लेते हुए हम पर भरोसा करना चाहिए। इस भरोसे के बल पर हमें अपना बेस्ट देने में मदद मिलती है।
भारत में एक जुलाई को चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। एक जुलाई को देश के प्रख्यात चिकित्सक डॉ विधान चंद्र रॉय का जन्मदिन और पुण्यतिथि दोनों ही हैं। बिधान चन्द्र राय की स्मृति में ही राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है। भारत रत्न से सम्मानित बिधान चन्द्र राय देश के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ-साथ एक चिकित्सक भी थे। आजादी के बाद उन्होंने अपना सारा जीवन पीड़ित मानवता की चिकित्सा सेवा को समर्पित कर दिया।