तीखापन
August 18, 2019 • डॉ दीपा शुक्ला
 *तीखापन*
 
क्यों देते हो जख़्म
बोलकर
इतना तीखा 
और फिर 
मलते हो उन पर नमक 
कुरेद कुरेद कर 
कि
कराह उठे दर्द से,
उसे
सुनने वाला भी।
सुनो ! आता है मुझे भी 
बोलना तीखा,
मैं भी जला सकती हूँ
तुम्हारा अंतर्मन
पल -प्रतिपल,
खोल सकती हूँ 
परत - दर- परत 
तुम्हारा यथार्थ नग्न
"बंदगोभी" के पत्तों  की भांति सबके समक्ष....।
 
डॉ दीपा शुक्ला
आवास विकास
लखीमपुर खीरी
उ. प्र.