दलाली के लाभार्थी हैं राहुल -जेटली
May 4, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

 

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केन्द्रीय मंत्री अरूण जेटली ने आज कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर करारा हमला बोलते हुए कहा वे स्पष्ट करें कि इंग्लैंड में बनी कंपनी बैकॉप्स लिमिटेड और भारत में इसी नाम से बनी कंपनी से अपने संबंधों को खुलासा करें। उन्होंने कहा कि यह बात इसलिए भी जरूरी है कि राहुल गांधी प्रधान मंत्री बनने के महत्वाकांक्षी हैं। इस महत्वपूर्ण पद के दावेदार को इस गंभीर आरोप का जवाब देना ही होगा।

भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि आज एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 2002 में भारत में बैकॉप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड बनी थी। इस कंपनी में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी निदेशक थे। 2003 में लंदन में इसी नाम से यह कंपनी बनी और उसमें राहुल गांधी के अलावा एक अमेरिकी लरिक मैकनाइट निदेशक थे। जून 2005 में इसमें राहुल 65 प्रतिशत के और और कहा कि मैकनाइट 35 प्रतिशत के हिस्सेदार थे। 2004 में राहुल गांधी ने अपने चुनावी हलफनामे में बैकॉप्स, यूरोप तथा तीन बैंक खातों की बात कही थी। 2009 में राहुल गांधी दोनों ही कंपनियों से निकल गए। 2011 में फ्रांसीसी फर्म नवल ग्रुप (डीसीएसएन इंडिया) को भारत सरकार ने स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण का भारत में कॉन्ट्रैक्ट दिया। उस कंपनी ने अपनी भारतीय सहयोगी कंपनी के साथ करार किया। फ्लैश फोर्ज ने 2011-12 में ऑप्टिकल आर्मर का अधिग्रहण कर लिया। दिलचस्प बात यह रही कि अमेरिकी नागरिक मैकनाइट उस कंपनी में निदेशक बना दिए गए। उन्हें कंपनी के 4.9 प्रतिशत शेयर दिए गए। 

श्री जेटली ने कहा कि बैकॉप्स का अर्थ बैक ऑफिस होता है। यह न तो मैन्युफैक्चरिंग में थी और न ही सर्विस सेक्टर में बल्कि लियाजों कंपनी थी। इसका मकसद काम कराके पैसे लेना। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की मित्र मंडली में एक विंग कमांडर मट्टू भी थे और उन्हें रखने के पीछे उद्देश्य था रक्षा क्षेत्र के सौदे किए जा सकें। दोनों का लंदन का पता था 2 फ्रॉगनल वे लंदन। यह लंदन का विशिष्ट इलाका है इस घर के मालिक थे अजिताभ बच्चन और उनकी पत्नी रोमेला बच्चन।

उन्होंने आरोप लगाया कि 6 पनडुब्बी बनाने का ठेका सरकार से मिला, उस ठेके में भारत की एक छोटी सी कंपनी भी चुनी गई। उलरिक मैकनाइट की दो कंपनियों को फ्लैशफोर्ज ले लेती है। उसके बाद वे उसके निदेशक बन जाते हैं। उस कंपनी को ऑफसेट कान्ट्रैक्ट मिल जाता है। इस ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट के लाभार्थी गांधी परिवार है। उन्होंने कहा कि इससे यही साबित होता है कि इसमें साफ तौर से घोटाला हुआ है। श्री जेटली ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे खुद तो बिना प्रमाण के उस सौदे पर आरोप लगाते फिर रहे हैं जिसे सीएजी और सुप्रीम कोर्ट ने हरी झंडी दिखाई है। लेकिन उस मामले पर कुछ नहीं बोल रहे हैं जिसमें कई प्रमाण सामने आ गए हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दूसरे पर एक उंगली उठाने से चार उंगलिया अपनी ओर उठ जाती हैं, यह बात राहुल गांधी को याद रखनी चाहिए। राहुल गांधी की निंदा करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा कि वह जिस तरह से चुप्पी साध लेते हैं वह इस बार नहीं चलेगा। इस संदिग्ध सौदे में उनका नाम सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी स्पष्ट करें कि यह बैकॉप्स कंपनी भारत में क्यों बनाई गई थी और बाद में लंदन में? इससे संदेह पुख्ता हो रहे हैं।

श्री जेटली ने दो टूक शब्दों में कहा कि राहुल गांधी इस पर मौन धारण नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि चुप रहने का अधिकार आरोपी को तो होता है लेकिन किसी राजनेता को नहीं। जो लोग सार्वजनिक जीवन में आते हैं उनके लिए यह गंभीर विषय है।