दिल्ली में चाहिए चार हजार क्रैच, है महज 23
March 30, 2019 • राकेश रमण
#दिल्ली में 10 लाख बच्चें है 6 साल से कम उम्र के 
#घर में अकेले छोड़ कर जाती हैं महिलाएं, अनहोनी की बनी रहती हैं संभावना
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में 10 लाख बच्चे 6 वर्ष से कम उम्र के है और इनके लिए महज 23 आंगनबाड़ी केन्द्रों में कैच की सुविधा है। जबकि मौजूदा केजरीवाल सरकार सत्ता में आने के समय कहा था वह तीन सौ कैच खोलेगी, लेकिन खुला महज 23 ही है। ऐसे में बड़ी संख्या में छोटे बच्चों को असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाएं अपनी झुग्गियों में या पड़ोसियों के भरोसे छोड़ कर काम पर चली जाती है। ऐसे में छोटी बच्चियों के साथ हर वक्त किसी न किसी तरह की अनहोनी होने की संभावना बनी रहती है। यह बात गैर सरकारी संगठनों के संगठन नींव दिल्ली फोर्सेस की ओर से कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित सेमिनार में शामिल वक्ताओं ने कही। 
कार्यक्रम में शामिल समुदाय से 10 प्रतिनिधियों ने हितधारकों के समक्ष अपने छोटे बच्चों की देखरेख एवं सुरक्षा से संबंधित समस्याओं से अवगत करवाया। गीता, निवासी शाहबाद डेरी जो कि घरेलू कामगार है वह अपने दो छोटे बच्चों को घर में पड़ोसियों के भरोसे छोड़ कर काम पर जाती है उसका कहना था कि उसे अपने बच्चों की सुरक्षा की चिंता हमेशा बनी रहती है यदि बस्ती में छोटे बच्चों की देखरेख की व्यवस्था हो जाऐ तो वह निश्चित हो कर काम पर जा सकती है। सोनाली, जनता मजदूर कलोनी से अपना अनुभव में रखा कि वह अपने बच्चे को बस्ती में खुले आंगनवाड़ी सह क्रैश में छोड़ती है जिसके कारण अब वह ज्यादा काम कर पाती है और उसका बच्चा भी ठीक रहता है। पर कुछ समय से क्रैश में बच्चों के लिए खाना नहीं आ रहा है उसका कहना था कि क्रैच में बच्चों के लिए खाना और साफ-सफाई की ठीक व्यवस्था हो। 
विधायक अजय दत्त ने माना कि छोटे बच्चों की देखरेख और सुरक्षा का मुद्दा किसी भी सरकार के प्राथमिकता पर नहीं है जब कि बस्तियों में अधिकतर परिवारों में महिला पुरूष दोनों को ही काम पर जाना पड़ता है। इस लिए बस्ती में छोटे बच्चों के लिए क्रैच होना चाहिए, मैं इस बात को दिल्ली सरकार में भी रखुगाँ। श्रीमति रीटा सिंह सदस्य, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कहा कि 6 वर्ष तक की आयु मानव जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है इस आयु में हुई छूट की भरवाई नहीं कि जा सकती इस लिए बच्चों के सही विकास और सुरक्षा के लिए परिवारों को सहयोग की जरूरत है जिसके लिए क्रैश एक अच्छा विकल्प है। श्रीमति सपना कुलश्रेष्ट, दिल्ली महिला आयोग ने कहा कि मैं छोटे बच्चों की सुरक्षा एवं देखरेख के मुद्दों का समर्थ करती हुँ और महिला क्रैश को महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। श्री एस.सी. यादव सयुक्ंत श्रमायुक्त एवं कल्याण अधिकारी ने क्रैच का समर्थन किया और उन्होने बताया कि वोर्ड के माध्यम से हम क्रैच और बच्चों से संबंधित गतिविधियाँ शुरू करने की सोच बना रहे है। समुदाय के लोगों ने कहा कि  आने वाले चुनावों में हम प्रत्याशी के समक्ष अपने छोटे बच्चों की सुरक्षा एवं देखरेख हेतु झूलाघर की मांग को उठायेगें। इस मौके पर थानेर दयाल आदिगौड़ सदस्य, दिल्ली श्रम कल्याण बोर्ड, श्रीमति शालिनी प्रतिनिधि, वीगो नेटवर्क, सहित दिल्ली की विभिन्न बस्तियों से 200 समुदाय प्रतिनिधियों ने परिचर्चा में भागीदारी की। 
हमारी माँगें सभी महिलाओं को 6 महीने तक बिना शर्त मातृत्व हक मिले।सभी बच्चों के सम्पूर्ण विकास व देखरेख के लिए क्रैश का अधिकार मिले एवं उसकी उचित व्यवस्था हो।सभी महिलाओं के काम को पहचान, सम्मान एवं उचित दाम मिले।परिचर्चा के अन्त में सभी ने उपरोक्त मांगों का समर्थन किया और हम होगें कामयाब गीत के साथ समापन किया।