देश-दुनिया का प्रत्येक 11 वां वयस्क पीड़ित है मधुमेह से : डॉ उपासना अरोड़ा
April 17, 2019 • कमलेश पांडे
# यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी में प्रख्यात चिकित्सकों ने मधुमेह के क्षेत्र में नित्य नए हो रहे अनुसंधानों और उसके मानवीय लाभों पर चर्चा की
 
गाजियाबाद। जब देश-दुनिया का प्रत्येक ग्यारहवां व्यक्ति मधुमेह जैसी असाध्य बीमारी से पीड़ित हो, तो इस भयावह बीमारी के क्षेत्र में आये दिन हो रहे नित्य नए अनुसंधानों की चर्चा लाजिमी हो जाती है। यही वजह है कि आज के समय की साइलेंट किलर बीमारियों में से एक मधुमेह रोग पर प्रख्यात डॉक्टरों ने एक मेडिकल सेमिनार का आयोजन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी में किया और समसामयिक डेवलपमेंट की चर्चा की। 
 
मेडिकल सेमिनार का उद्घाटन यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की डायरेक्टर  उपासना अरोड़ा ने किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि देश दुनिया का जब हरेक ग्यारहवां व्यक्ति मधुमेह जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित हो तो चिकित्सा जगत का चिंतित होना स्वाभाविक है।  लेकिन चिकित्सक रोगियों के हिट सम्वर्द्धन के लिए सजग और सचेष्ट हैं। उल्लेखनीय है क्क्त इस कांफ्रेंस में ट्रांस हिंडन, गाज़ियाबाद के 50  डॉक्टरों ने भाग लिया।  वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अमित छाबड़ा ने सेमिनार को सम्बोधित किया ।
 
बुधवार को आयोजित इस मेडिकल कांफ्रेंस में डायबिटीज के क्षेत्र में आई एक नई दवाई 'एसजीएलटी 2 इन्हिबिटर' की उपलब्धियों, जिससे मरीजों को किडनी एवं हृदय के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों से बचाया जा सकता है, इसी दवाई से ब्लड प्रेशर में भी आराम मिल जाता है,  मोटापे के मरीजों में वजन भी कम होने लगता है, पर विस्तार पूर्वक चर्चा हुई। शोधकर्मियों का मानना है कि उन्होंने इस बीमारी से जुड़ी और भी अधिक जटिल तस्वीर सबके सामने लाने में कामयाबी प्राप्त की है और इससे मधुमेह के उपचार का तरीका बदल सकता है।
 
अगर डॉक्टरों की माने तो, उनका कहना है कि मधुमेह यानी डायबिटीज़ असल में पांच अलग-अलग बीमारियां हैं और इन सभी का इलाज भी अलग-अलग होना चाहिए। बता दें कि डायबटीज़ शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ जाने पर होती है, और इसे सामान्यतः दो प्रकारों में बांटा गया है- टाइप-1 और टाइप-2.
 
गौरतलब है कि विश्वभर में प्रत्येक 11 में से एक वयस्क मधुमेह से पीड़ित है। मधुमेह की वजह से दिल का दौरा पड़ना, स्ट्रोक, अंधापन और किडनी फेल होने के खतरे बने रहते हैं। इस हेतु चर्चा में वरिष्ठ वरिष्ठ ह्रदय रोग विशेषज्ञ डॉ असित खन्ना, डॉ धीरेंद्र सिंघानिया, वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर सुमनतो चैटर्जी, कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अभिषेक यादव, गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर क्यू  हसनैन, वरिष्ठ पल्मनोलॉजिस्ट डॉक्टर के के पांडे, डॉक्टर अर्जुन खन्ना, डॉक्टर अंकित सिन्हा ने विशेष तौर पर भाग लिया और अपने अपने विभाग से संबंधित मधुमेह से ग्रसित मरीजों एवं बीमारियों में प्रयोग होने वाली दवाओं के दुष्प्रभावों से मरीजों के बचाव के बारे में चर्चा की। 
 
इस परिचर्चा में सभी डॉक्टरों का उद्देश्य था की डायबिटीज के मरीजों को दवाइयों के दुष्प्रभाव से कैसे बचाया जा सके। कॉन्फ्रेंस में डॉक्टर बीएस त्यागी, डॉ रमाकांत गुप्ता, डॉ पीएन चौधरी, डॉक्टर आजाद डॉक्टर कोटलिया, डॉ अश्वनी कंसल, डॉ अभिनव पांडे, डॉ रुचि डॉ राहुल शुक्ला, डॉक्टर सुनील डागर, डॉ अनुज अग्रवाल, डॉक्टर राज भूषण गौरव पांडे एवं अनुपम भी मौजूद थे।