नगर आयुक्त दिनेश चंद्र ने अस्पतालों व बैंकट हॉल संचालकों को ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन का पढ़ाया पाठ
May 11, 2019 • कमलेश पांडे
# ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन कार्यशाला में आगंतुकों को अद्यतन नियम-परिनियम से सम्बंधित जानकारी देते हुए उनके उत्तरदायित्वों का कराया गया एहसास
 
# नगर आयुक्त ने सभी को प्रतिबंधित पॉलीथीन का उपयोग नहीं करने और करने देने की दिलाई गई शपथ
 
गाजियाबाद। नगर आयुक्त दिनेश चन्द्र ने निगम सीमान्तर्गत संचालित अस्पतालों व बैंकट हॉलों के संचालकों के साथ नगर निगम सभागार कक्ष में एक कार्यशाला आयोजित की। जिसमें नगर आयुक्त द्वारा नगरीय ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन और हथालन नियम, 2000 के अनुरूप केन्द्रीय सरकार ठोस अपशिष्टों का प्रबन्धन करने व ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियमावली-2016 तथा, उ.प्र. प्लास्टिक और अन्य जीव अनाशित कूड़ा-कचरा उपयोग और निस्तारण का विनियमन संशोधन अध्यादेश, 2018 (उ.प्र. अध्यादेश संख्या 10 सन् 2018) की धाराओं के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए प्लास्टिक के दुष्परिणाम व अधिनियम की सुसंगत धाराएं जिनमें प्रतिबन्धित प्लास्टिक व  पालिथीन के कैरी बेग, गिलास, चम्मच, कप-प्लेट आदि का प्रयोग करने पर अर्थदण्ड एवं कारावास आदि का प्रावधान है, के बारे में भी जानकारी दी गयी। इसके अलावा, विशेष रूप से यह भी अवगत कराया गया कि 2 अक्टूबर, 2018 से उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्लास्टिक व पालिथीन पर पूर्ण रूप से प्रतिबन्ध भी लगा दिया गया है। 
 
बैठक में उपस्थित लोगों को ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियमावली 2016 के अन्तर्गत सुसंगत धाराओं के बारे में व्यवहारिक रूप से अवगत कराया गया। साथ ही,  जानकारी दी गयी कि सॉलिड वेस्ट तीन प्रकार का यानी कि गीला कूड़ा, सूखा कूड़ा मतलब रिसाइकलेबिल व  हानिकारक कूड़ा होता है। बहरहाल, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियमावली-2016 के अन्तर्गत समस्त ऐसे बल्क वेस्ट जनरेटर यथा- केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकार के विभाग अथवा उपक्रमों, स्थानीय निकायों, सार्वजनिक या प्राइवेट सेक्टर की कम्पनियों, अस्पतालों, नर्सिंग होम, स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों, शैक्षिक संस्थाओं, छात्रावासों, होटलों, बाजारों, पूजा स्थलों, स्टेडियमों और खेल परिसरों द्वारा अधिकृत भवन आदि जिनके द्वारा प्रतिदिन 100 कि.ग्रा. से अधिक कूड़ा उत्सर्जित किया जा रहा है, को ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन नियमावली 2016 के प्रावधानों का अनिवार्य रूप से अनुपालन किया जाने के सम्बन्ध में उनके दायित्वों को निर्धारित कर दिया गया है, जिसके तहत यह अनिवार्य है कि ऐसी संस्थाएं गीले कूड़े से अपने ही प्रांगण अथवा परिक्षेत्र में कम्पोस्ट व बायो-गैस बनायें। सूखे कूड़े को नगर निगम अथवा नगर निगम द्वारा प्राधिकृत संस्था को ही दिया जाये। सूखा व गीला कूड़े को अलग-अलग कूूड़ेदान में एकत्रित किया जाये। परिसंकटमय कूड़ा, सैनेटरी पैड अथवा डाईपर्स, निर्माण और विध्वंस सामग्री केवल प्राधिकृत कूड़ा एकत्र करने वाली संस्था को ही दिया जाये। 
 
नगर आयुक्त द्वारा सभी आगन्तुकों को यह भी अवगत कराया गया कि प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबन्धन नियमावली-2016 के अन्तर्गत निर्दिष्ट प्रावधानों का अनुपालन सभी प्लास्टिक पैकेजिंग के उत्सर्जकों द्वारा किया जाना है। इस प्रकार के किसी भी उत्पाद को बहुतायत में क्रय करने से पूर्व उसका निस्तारण करने वाली संस्था का विवरण आवश्यक रूप से प्राप्त करें, अन्यथा नगर निगम को इस बात की जानकारी दें कि संदर्भित निर्माणकर्ता द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं किया जा रहा है जिससे उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जा सके। 
 
नगर आयुक्त द्वारा बैठक में उपस्थित विभिन्न अस्पताल एवं बैंकेट हॉल के प्रतिनिधियों, संचालकों, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, नोडल अधिकारी-एसबीएम अरूण कुमार मिश्रा, समस्त जोनल प्रभारी, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी सिस व ट्रांस हिण्डन सहित समस्त सफाई निरीक्षकों को पॉलिथीन का प्रयोग न करने तथा अपने आस-पास प्लास्टिक व पॉलिथीन का प्रयोग न होने दिये जाने के सम्बन्ध में शपथ भी दिलायी गयी। अन्त में, बैठक में उपस्थित सभी आगन्तुकों का आभार व्यक्त करते हुए कार्यशाला का समापन किया गया।