नारी शक्ति बना ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी का हिन्दी वर्ड ऑफ द ईयर
January 27, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

पटना। हिंदी के साथ देश की महिलाओं के लिए यह गर्व की बात है कि ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने हिंदी शब्द नारी शक्ति को अपनाने का फैसला किया है। इसकी घोषणा जयपुर में आयोजित साहित्य महोत्सव में शनिवार को की गई। ऑक्सफर्ड डिक्शनरी ने इसे 2018 का अपना हिंदी शब्द घोषित किया है। इससे पहले ऑक्सफोर्ड ने साल 2017 में ‘आधार’ को अपना हिन्दी शब्द चुना था। इसका बिहार की महिलाओं ने स्वागत किया है। इसे लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। बिहार में महिलाओं ने किया स्वागत पटना विश्वविद्यालय से स्नातक कर रहीं सोनाली व रंजीता ने आफॅक्सफोर्ड डिक्शनरी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह देश की नारियों के सम्मान में उठाया गया बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि नारी आज हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत के झंडे गाड़ रही है। बिहार की महिलाएं भी कम हीं, उन्होंने भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। मोतिहारी से वंदिता सिप्पी तथा गोपालगंज से अर्चना अंशु कहती हैंकि बिहार में महिलाओं के लिए अभी भी कई बंदिशें हैं। ये बंदिशें अब टूट रहीं हैं। इससे आ रहा बदलाव नारी शक्ति को स्थापित कर रहा है। जयपुर साहित्य उत्सव में की घोषणा विदित हो कि भारत की नारी शक्ति को विश्व पटल पर पहचान देते ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के इस फैसले की घोषणा जयपुर में चल रहे साहित्योत्सव (छ्स्स्त्र) में शनिवार को की गई। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार यह संस्कृत से लिया गया शब्द है, जो अपनी शर्तों पर जीवन जी रहीं महिलाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता हैज्ञात हो कि ऑक्सफोर्ड तढिक्शनरी ने यह पहल 2017 से शुरू की थी। ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी ने इससे पहले 2017 में ही 'आधार' शब्द को अपना हिन्दी शब्द चुना था। ये कारण रहे अहम ऑक्सफोर्ड के अनुसार भारत में महिला सशक्तीकरण की सरकारी कोशिशों और मी टू जैसे आंदोलन की बदौलत नारी शक्ति को बढ़ावा मिला। साथ ही बीते साल महिला अधिकारों को लेकर जमकर बहस हुई।नारी शक्ति शब्द पर मार्च 2018 में सर्वाधिक जोर दिया गया, जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर केंद्र सरकार ने नारी शक्ति पुरस्कार की घोषणा की। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी अहम योगदान रहा। केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की सामाजिक लड़ाई व सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंदिर में प्रवेश की इजाजत, 12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म मामले में फांसी के प्रावधान तथा केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ के नारे का भी योगदान उल्लेखनीय रहा