नो फीस, नो इंट्री के अपने फैसले पर तीसरे दिन भी अडिग रहा जयपुरिया स्कूल
April 12, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो
# स्थानीय सांसद ने डीएम से हस्तक्षेप करने की लगाई गुहार, सोमवार को मामला सुलझने के आसार
 
गाजियाबाद। सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल ने शुक्रवार को भी उन लगभग 4 दर्जन बच्चों को विद्यालय में प्रवेश नहीं दिया, जिन पर भारी भरकम विद्यालय फीस बकाया है और इसी के चलते विद्यालय प्रबंधन उनकी टीसी काट चुका है। 
 
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आज फिर तीसरी बार विद्यालय प्रबंधन ने उन सभी बच्चों को स्कूल गेट से लौटा दिया, क्योंकि उनके अभिभावकों ने विद्यालय द्वारा बार बार बकाया सम्बन्धी सूचना दिए जाने के बावजूद या तो बकाया भुगतान की अनदेखी की या फिर स्कूल द्वारा निर्धारित फीस के मुकाबले काफी कम रकम जमा किया। इससे परेशान विद्यालय ने अनुशासनिक कार्रवाई करते हुए यह कठोर फैसला लिया और अब वह अपने फैसले पर अडिग है। 
 
यही वजह है कि शुक्रवार को एक बार फिर जयपुरिया स्कूल का प्रबन्धन और अभिभावक संघ विवाद बढ़ता हुआ नजर आया, क्योंकि मतदान के बाद स्कूल जब खुला तो तीसरे दिन भी 49 बच्चों को स्कूल के अंदर प्रवेश करने से रोक दिया गया। उसके बाद, अभिभवकों ने सिटी मजिस्ट्रेट यशवर्धन श्रीवास्तव  से बात की, जिस पर सिटी मजिस्ट्रेट ने दोनों पक्षों पर हुए एफआईआर का हवाला देते हुये अपना पल्ला झाड़ लिया। 
 
इसके बाद परेशान अभिभावक स्थानीय सांसद  वी के सिंह से मिले, जिस पर वी के सिंह ने जिलाधिकारी रितु माहेश्वरी से फोन पर वार्ता की और जिसके बाद उन्होंने सोमवार को बच्चों को स्कूल में प्रवेश का आश्वासन दिया। 
 
इस सम्बन्ध में संवाददाता ने जब विद्यालय की प्रधानाचार्या मंजू राणा से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही तो उन्होंने दो टूक कहा कि इस बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है और जब जिलाधिकारी श्री मती माहेश्वरी का पत्र या दूरभाषिक आदेश उनके पास आएगा, तब अपनी प्रतिक्रिया दूंगी। कहने का आशय स्पष्ट था कि अब जो कुछ होगा वह विधि सम्मत दायरे में ही होगा। 
 
बता दें कि विद्यालय में पढ़ रहे तमाम बच्चों में से लगभग एक प्रतिशत ऐसे बच्चों के अभिभावक हैं जो विद्यालय द्वारा निर्धारित फीस का विरोध करते हुए जिला प्रशासन की शरण में गए हैं। लेकिन जिला प्रशासन की सम्बन्धित संस्था डीएफआरसी के फैसले की खामियों को पकड़ते हुए विद्यालय प्रबंधन ने माननीय उच्च न्यायालय की शरण ले रखी है और उसके आदेश पर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया है। उसके बाद अभिभावक संघ भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 
 
स्पष्ट है कि इस विवाद के लम्बा खींचने से विद्यालय की प्रतिष्ठा और बच्चों का भविष्य दोनों प्रभावित होगा। बहरहाल, अब सभी अभिभावकों को सोमवार की प्रतीक्षा है, जब उनके बच्चों को स्कूल में प्रवेश मिलेगा और वो अपनी पढ़ाई पुनः प्रारंभ कर सकेंंगे।