पर्यावरण को लेकर डीएम अजय शंकर पांडेय गंभीर
August 2, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो
गाजियाबाद। जनपद में प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों की अब खैर नहीं होगी। क्योंकि प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के अलावा जिला प्रशासन के 70 अन्य स्तरीय अधिकारी गण निरंतर रूप से औद्योगिक इकाइयों का स्थलीय निरीक्षण करते हुए प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे। 
 
दरअसल, जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने जनपद के पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के लिए गंभीरता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके तहत उन्होंने शुक्रवार को  कलेक्ट्रेट के सभागार में जिला पर्यावरण समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आहूत की। 
 
इस अवसर पर जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने कहा कि जनपद में  प्रदूषण की विकट समस्या के समाधान के लिए संबंधित अधिकारियों को विस्तृत कार्ययोजना बनाकर इस संबंध में तत्परता के साथ कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी, ताकि जनपद की जनता को शुद्ध पर्यावरण उपलब्ध कराने में जिला प्रशासन को सफलता मिल सके। 
 
 जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय ने आगे कहा कि प्राय: देखने में आ रहा है कि बहुतायत की संख्या में औद्योगिक इकाइयों में प्रदूषण कंट्रोल संयंत्र स्थापित हैं। लेकिन, औद्योगिक इकाइयों द्वारा अपने आर्थिक लाभ को बढ़ाने की दृष्टि से उनका संचालन नियमित रूप से नहीं किया जा रहा है। इस बिंदु पर जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रदूषण विभाग में अधिकारी एवं कर्मचारी की संख्या मात्र 4 है जिसके कारण उनके द्वारा नियमित रूप से स्थापित प्रदूषण कंट्रोल संयंत्रों की जांच करना संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए जिलाधिकारी ने समस्त विभागीय अधिकारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिनके द्वारा प्रदूषण कंट्रोल संयंत्रों के संचालन की जानकारी प्राप्त करने के उपरांत उचित कार्यवाही की जाएगी। ऐसे में जनपद स्तरीय 70 अधिकारियों के द्वारा निरंतर रूप से जब औद्योगिक इकाइयों की जांच पड़ताल की जाएगी तो हालात में परिवर्तन आएंगे। जहां पर प्रदूषण कंट्रोल संयंत्र संचालित नहीं पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कठोरतम कार्यवाही जिला प्रशासन प्रस्तावित करेगा। 
 
जिलाधिकारी ने ऐसी औद्योगिक इकाइयां, जहां पर अभी तक प्रदूषण कंट्रोल संयंत्रों की स्थापना नहीं की गई है और उनके द्वारा निरंतर रूप से प्रदूषण फैलाया जा रहा है, के संबंध में भी बड़ा निर्णय लेते हुए प्रदूषण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसी इकाइयों तथा प्रदूषण कंट्रोल संयंत्र स्थापित करने वाली कंपनियों के साथ 1 सप्ताह में जिलाधिकारी की बैठक आयोजित कराई जाए और ऐसी इकाइयों में तत्काल प्रभाव से प्रदूषण कंट्रोल संयंत्र स्थापित कराए जाएं। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों के द्वारा निर्धारित समय अवधि के भीतर यह कार्यवाही न की जाए, उनके यहां प्रदूषण कंट्रोल संयंत्र स्थापित कराते हुए संबंधित औद्योगिक इकाइयों से वसूली की कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। 
जिलाधिकारी ने समस्त विभागीय अधिकारियों को इस कार्य के लिए नोडल अधिकारी भी नामित करने के निर्देश दिए हैं। 
 
वहीं, दूसरी ओर जिला पर्यावरण समिति की बैठक में पर्यावरण संबंधित पीपीटी का प्रदर्शन किया गया है। इस पर्यावरण संबंधित पीपीटी का संबंधित विभागीय अधिकारियों में अपने अधीनस्थ अधिकारियों व कर्मचारियों में कार्यक्रम आयोजित करते हुए उन्हें यह जानकारी दी जाए ताकि इस दिशा में सभी अधिकारी एवं कर्मचारीगण निरंतर रूप से कार्यवाही सुनिश्चित कर सकें। 
 
जिलाधिकारी ने इस कार्यक्रम को  संबंधित विभागों में आयोजित करने के उपरांत रिपोर्ट भी तलब की है। जिलाधिकारी ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को इस अवसर पर निर्देश देते हुए कहा कि 10 वर्ष पुरानी समस्त डीजल वाहन जो जनपद में रजिस्टर्ड हैं, उन्हें नोटिस जारी किए जाएं तथा जिन वाहन स्वामियों के द्वारा संबंधित वाहनों का संचालन बंद नहीं किया जाएगा, उनके विरूद्ध अभियान चलाकर ऐसे वाहनों को सीज करने की कार्रवाई विभागीय अधिकारियों के द्वारा सुनिश्चित की जाए। 
 
जिलाधिकारी ने इस अवसर पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि पूरे वर्ष में ऐसी तिथियां एवं माह जिसमें अधिकतम वायु प्रदूषण संभावित हो, उनकी पूर्व से ही घोषणा सुनिश्चित की जाए तथा ऐसी कार्य योजना को अंतिम रूप प्रदान किया जाए कि संवेदनशील तिथियों एवं माह में जनपद में वायु प्रदूषण न होने पाए। उन्होंने यह भी कहा कि कार्य योजना में यह भी सुनिश्चित किया जाए कि यदि संवेदनशील तिथियों एवं माह में वायु प्रदूषण होगा तो उसके निराकरण के संबंध में क्या कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 
 
जिलाधिकारी अजय शंकर पांडे ने इस अवसर पर इस महत्वपूर्ण बिंदु पर निरंतर रूप से कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों का यह भी आव्हान किया कि उनके द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में निरंतर रूप से अपनी रिपोर्ट जिला अर्थ एवं सांख्यिकी अधिकारी को उपलब्ध कराई जाएगी ताकि संबंधित रिपोर्ट को पोर्टल पर पोस्ट किया जा सके।