पाक का बचकानापन
August 4, 2019 • राकेश रमण
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान भले ही समूची दुनिया में घूम-घूमकर यह दिखावा कर रहे हों कि वे भारत के साथ शांतिपूर्ण सम्बंध कायम करना चाहते हैं लेकिन सच तो यह है कि उनकी ओर से अभी तक एक भी ऐसी पहलकदमी नहीं की गई है जिससे उनकी बातों को पर किसी को विश्वास हो सके। उल्टा भारत को भड़काने और उकसाने के लिये पाकिस्तान की ओर से तमाम ऐसी हरकतें की जा रही हैं ताकि इधर से उस पर जवाबी कार्रवाई की जाए। जब और जहां भी पाकिस्तान को मौका मिला वहां भी उसने भारत के हितों को नुकसान पहुंचाने का भरसक प्रयास किया और जहां उसे मौका नहीं मिल सका वहां उसने आगे बढ़कर अपनी ओर से ही उकसाने और भड़काने की तमाम कोशिशें करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। बात चाहे कुलभूषण जाधव को काउंसर एक्सेस दिये जाने के अंतर्राष्ट्रीय अदालत के निर्देश को ठेंगा दिखाते हुए उसमें अपनी ओर से मनमानी शर्तें थोपने की कोशिश हो या फिर करतारपुर काॅरिडोर खोलने के बहाने अलगाववादी खालिस्तानी ताकतों को दोबारा जिन्दा करने का नापाक प्रयास हो। यहां तक कि अमरनाथ यात्रा बाधित करने के लिये लैंड माइंस से लेकर स्नाइपर राइफल तक के इस्तेमाल की साजिश रचना हो या कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ करा कर भारत की अंदरूनी शांति व स्थिरता को भंग करने का कुत्सित प्रयास। उसकी ये तमाम हरकतें इसी बात को दर्शा रही हैं कि वह किसी भी तरह से भारत को इस हद तक उकसाने पर आमादा है कि इधर का सब्र टूट जाए और उसके खिलाफ जवाबी कार्रवाई आरंभ कर दी जाए। इसके लिये उसने एलओसी पर भारी अशांति का माहौल बनाने में कोई कमी नहीं छोड़ी है और सीमा चैकियों पर सिर्फ गोलीबारी नहीं कर रहा बल्कि दूर तक मार करनेवाले मोर्टार व छोटी मिसाइलें दागकर कश्मीर के आम लोगों को भी निशाना बना रहा है। हालांकि भारत ने अपनी ओर से पाकिस्तान की हर हरकत का माकूल जवाब देने की पूरी तैयारी की हुई है और इसके लिये जहां एक ओर कश्मीर में सुरक्षाबलों की तादाद में इजाफा किया गया है बल्कि पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने सूबे का दौरा करके तैयारियों का जायजा लिया और अब थलसेना प्रमुख ने वहां डेरा डाल दिया है। इसके अलावा किसी अनहोनी की आशंका को निर्मूल करने के लिये अमरनाथ यात्रा को भी तय समय से 13 दिन पूर्व ही रूकवा दिया गया है और एलओसी पर भी चैकसी बढ़ाते हुए घुसपैठ की साजिशों को नाकाम किया जा रहा है। इसी क्रम में आज पाकिस्तान के सरहद की सुरक्षा करने के नाम पर भारत के खिलाफ अपने नापाक मंसूबों को अमली जामा पहनानेवाले बैट के तकरीबन आधा दर्जन जवानों को भारत की सीमा में आतंकियों की टोली को घुसाने का प्रयास करते हुए मौत के घाट उतारा गया है। लेकिन पाकिस्तान की ओर से पूरा प्रयास किया जा रहा है कि वह भारत को दुनिया में बदनाम करके अपने लिये सहानुभूति जुट सके। इसके लिये उसने यह इल्जाम लगाना आरंभ कर दिया है कि इस तरफ से क्लस्टर बमों को इस्तेमाल करके एलओसी के तीस किलोमीटर भीतर तक आग बरसाई जा रही है जिसकी चपेट में आकर नीलम झेलम हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी भारी नुकसान पहुंचा है।  पाकिस्तान का इल्जाम है कि भारत की ओर से किये गये इस हमले में उसके एनजेएचपी प्रोजेक्ट यानी नीलम झेलम पावर प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है जिससे लगभग 400-500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है और इसी प्लांट से पाकिस्तान स्थित पंजाब, एलओसी और उसके आस-पास के इलाकों में बिजली की सप्लाई होती है।  सच तो यह है कि अगर ऐसा हुआ होता तो पाकिस्तान के पंजाब, एलओसी और आस-पास के क्षेत्र अंधेरे में डूब गये होते लेकिन ऐसा होता तो तब जबकि भारत की ओर से ऐसी कोई कार्रवाई की गई होती। जबकि भारतीय सेना ने आज भी यह साफ कर दिया है कि अपने हितों की रक्षा और मातृभूमि की सुरक्षा के लिये भारत की ओर से की जा रही जवाबी सैन्य कार्रवाई के निशाने पर सिर्फ आतंकियों की टोली और बेवजह गोलाबारी कर रहे पाकिस्तान के सैन्य बल ही हैं। साथ ही क्लस्टर बमों के इस्तेमाल के आरोपों को भी भारतीय सेना ने सिरे से खारिज करते हुए इस बात के पुख्ता तकनीकी सबूत पेश किये हैं कि पाकिस्तान जिसे क्लस्टर बम बता रहा है वह वास्तव में महज छोटी तक मार करनेवाले मोर्टार ही हैं।  पाकिस्तान तो यहां तक आरोप लगाने से भी बाज नहीं आ रहा है मानो भारतीय सेना ने एक बार फिर एलओसी की सीमा लांघ कर आतंकियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की कार्रवाई को अंजाम दिया हो। पाकिस्तान यह प्रचारित करने में जुट गया है कि भारत ने पीओके में घुसकर क्लस्टर बमों का उपयोग करके यूएन के नियमों को तोड़ा है। पाकिस्तानी सेना ने इन आरोपों के साथ ही एक बार फिर कश्मीर राग आलापते हुए कश्मीरी आवाम को भारत के खिलाफ भड़काने का प्रयास करने के क्रम में कहा है कि  कोई भी कश्मीर के लोगों के अधिकार और उनके दृढ़ संकल्प को दबा नहीं सकता। कश्मीर हर पाकिस्तानी के खून में बसा है। कश्मीरियों का स्वदेशी स्वतंत्रता संग्राम सफल होगा।  इस तरह की बेमानी और बेसिरपैर की बातें करके अगर पाकिस्तान यह समझ रहा है कि अफगानिस्तान में अमेरिका की मदद के एवज में वह कश्मीर में उससे कोई मदद हासिल कर लेगा तो इससे बड़ी बेवकूफी की बात कोई और नहीं हो सकती। आज अमेरिका को अफगानिस्तान के मसले से निपटने के लिये जितनी जरूरत पाकिस्तान की है उससे कहीं अधिक जरूरत उसे चीन की चुनौती से निपटने में भारत के सहयोग की है। रहा सवाल चीन का तो आज की तारीख में पाकिस्तान उसके लिये सिरदर्दी का सबब बन गया है जबकि भारत को आंखे दिखाना उसे आर्थिक तौर पर इतना नुकसान पहुंचा सकता है जिसकी भरपाई करना उसके लिये संभव ही नहीं होगा। लिहाजा बेहतर होगा कि पाकिस्तान अपनी बचकानी हरकतों से बाज आये और भारत की पूंछ पर पैर रखने की हिमाकत ना करे। वर्ना इसका जो अंजाम उसे भुगतना होगा उससे बचाने के लिये ना तो अमेरिका सामने आएगा और ना ही चीन। बल्कि इतना कुछ होने के बाद भी पाक का हित भारत के साथ विश्वासबहाली की दिशा में ठोस कदम उठाने में ही है। वर्ना ना तो उसकी आर्थिक हैसियत ऐसी है कि वह युद्ध का खर्च उठा सके और ना ही उसकी सैन्य शक्ति इतनी है जो भारत के क्रोध के सामने क्षण भर भी टिक सके।