प्रधानमंत्री की पाठशाला
July 12, 2019 • राकेश रमण
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पाठशाला इन दिनों खूब लग रही है। पार्टी के संसदीय दल की साप्ताहिक बैठक में तो वे अपने सांसदों को ज्ञान की घुट्टी पिलाते ही हैं। इसके अलावा इन दिनों सत्रहवीं लोकसभा में चुन कर आये भाजपा के सांसदों के साथ अलग-अलग समूहों में प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकातें हो रही हैं जिसके तहत पिछले सप्ताह अनुसूचित जाति, जनजाति, ओबीसी सांसदों के साथ प्रधानमंत्री की बैठकें हो चुकी हैं। इसी क्रम में पार्टी के पूर्व मंत्रियों और युवा सांसदों के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात की है और अब पहली फुसर्त में ही उनकी मुलाकात भाजपा के टिकट पर चुनाव जीत कर आई महिला सांसदों से भी होनी है। इसके अलावा उन तकरीबन चालीस सांसदों के साथ भी प्रधानमंत्री मोदी की अलग से बैठक हुई है जो राज्य या फिर केंद्र में पहले मंत्री रह चुके हैं लेकिन इस बार उन्हें मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल सकी है। इन तमाम मुलाकातों और बैठकों को अगर प्रधानमंत्री की पाठशाला का नाम दिया जाये तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। हालांकि इन बैठकों में सिर्फ प्रधानमंत्री की ओर से ज्ञान ही नहीं दिया जाता बल्कि वे अपने सांसदों को निजी स्तर भी जानने, समझने और परखने की भरसक कोशिश करते हैं। मिसाल के तौर पर आज प्रधानमंत्री मोदी ने लोककल्याण मार्ग स्थित अपने निवास पर सुबह के नाश्ते के वक्त हुई मुलाकात में सभी युवा सांसदों को विस्तार से अपना परिचय देने को कहा और उन्होंने सांसदों से कई निजी जानकारियों व व्यक्तिगत रूचियों के बारे में भी पूछताछ की। प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों से खास तौर पर जानना चाहा कि राजनीति के अलावा वे अन्य क्या क्या काम करते हैं और सामाजिक कार्यों से जुड़े बाकी क्षेत्रों में उनकी कितनी रुचि है। प्रधानमंत्री मोदी युवा सांसदों को सीख देते हुए कहा कि समाज के सामने राजनीति के अलावा जो काम आप करते हैं, वह उभर कर सामने आना चाहिए और लोगों को उनकी जानकारी होनी चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक लोग खांटी राजनीति के अलावा दूसरे कामों को ज्यादा पसंद करते हैं इसलिए जनप्रतिनिधियों को चाहिये कि वे उन पर भी पूरा ध्यान दें और उसके प्रति पूरी गंभीरता दिखाएं। उन्होंने युवा सांसदों से कहा है कि उनकी सामाजिक पहचान भी जनता के सामने जानी चाहिए ताकि लोग अपने प्रतिनिधि को समग्रता में जान व समझ सकें। इसी प्रकार प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के पूर्व मंत्रियों के साथ कल एक मुलाकात की थी जिसमें उन्हें संसदीय समितियों की अहमियत समझाई गई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बैठक के दौरान सांकेतिक लहजे में यह साफ कर दिया है कि संसदीय समितियों में इस बार बड़ी संख्या में उन सांसदों को मौका दिया जा सकता है जो पहले राज्य या फिर केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं लेकिन इस बार उन्हें केन्द्रीय मंत्रिमंडल में समाहित नहीं किया जा सका है। इसी के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के पूर्व मंत्रियों को संसदीय समितियों के कामकाज पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी है। प्रधानमंत्री ने पार्टी के तमाम पूर्व मंत्रियों संसदीय समितियों की अहमियत के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा है कि संसदीय समितियां मिनी संसद की तरह होती हैं और इनमें काम करके सांसद अपने अनुभव में बढ़ोतरी कर सकते हैं। प्रधानमंत्री की इन बातों से भाजपा के जिन वरिष्ठ नेताओं व पूर्व मंत्रियों को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिल पाई है उनकी निराशा काफी हद तक दूर हो गई होगी क्योंकि सत्ता के संचालन में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके अनुभव का पूरा लाभ लेने के लिये संसदीय समितियों में उनको प्रमुखता से समाहित करने का फार्मूला हर तरह से कारगर साबित हो सकता है। इसी प्रकार सत्रहवी लोकसभा के गठन के बाद अब तक हुई भाजपा संसदीय दल की दो बैठकों में भी प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सांसदों को काफी कारगर सीख देने के अलावा कई ऐसे तरीके सुझाए हैं जिस पर अमल करके वे देश व समाज का अधिकतम भला भी कर सकते हैं और अपने जनसंपर्क को भी मजबूत कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर सभी सांसदों को महात्मा गांधी की जयंती से लेकर सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती तक के एक महीने के दौरान कम से कम डेढ सौ किलोमीटर की पदयात्रा करने का निर्देश दिया है। यह पदयात्रा सांसद के अपने संसदीय क्षेत्र में ही होगी जिसमें सभी विधानसभा क्षेत्रों के अलावा अधिकतम पंचायतों व ब्लाकों से लेकर बूथों तक को यात्रा के दायरे में रखने की बात कही गई है। इसमें सिर्फ सांसद ही नहीं जुटेंगे बल्कि विधायक, पार्षद व पंचायत समिति सदस्यों के अलावा तमाम जनप्रतिनिधि और पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी व सक्रिय कार्यकर्ताओं की सहभागिता सुनिश्चित करने की योजना भी बनाई गई है। इस यात्रा के दौरान जगह जगह पंच वृक्ष भी लगाये जाएंगे, स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा, केन्द्रीय योजनाओं का वंचितों को लाभ दिलाने का काम भी होगा और नेताओं द्वारा चैपाल पर चर्चा का भी आयोजन होगा। स्वाभाविक है कि ऐसे आयोजन से जहां एक ओर जनप्रतिनिधियों का आम जनता से सीधा संपर्क और संवाद होगा वहीं दूसरी ओर आवाम और निजाम के बीच की दूरी भी कम होगी जिससे आम लोगों का सरकार व अपने प्रतिनिधि के साथ जुड़ाव भी बढेगा। इसी प्रकार संसदीय दल की पहली बैठक में सांसदों को मर्यादा के दायरे में रहने का पाठ पढाया गया, अनुशासन के दायरे की अहमियत भी समझाई गई और किसी के भी द्वारा की जाने वाली अनुशासनहीनता को कतई बर्दाश्त नहीं किये जाने का साफ संदेश भी दिया गया। इसके अलावा चुनावी नतीजा सामने आने के बाद संसद के केन्द्रीय कक्ष में पार्टी के सांसदों के साथ पहली मुलाकात में भी प्रधानमंत्री मोदी ने अभिभावक व मार्गदर्शक के लहजे में सांसदों को कई व्यावहारिक बातों की सीख दी जिससे रोजना की जिन्दगी में उनका सामना होता है। इन तमाम बातों को अगर समग्रता में समझें तो इस बार प्रधानमंत्री बडे भाई की भूमिका को आत्मसात करते दिखाई पड रहे हैं जो अपने करीबियों को यह बताने की कोशिश कर रहा हो कि जनप्रतिनिधित्व मिलना भले ही कुछ हद तक आसान हो लेकिन जरूरी है कि उसके दायित्वों को इमानदारी से निभाया जाये ताकि भविष्य में भी जनता का स्नेह व सहयोग मिलता रहे। निश्चित की यह प्रधानमंत्री की सराहनीय पहल है जिसका लाभ सांसदों को भी मिलेगा और पार्टी को भी।