बलि का बकरा बनता ईवीएम
May 22, 2019 • देवानंद राय
(देवानंद राय)
चुनाव के परिणाम आने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है।एग्जिट पोल देख कर तो कईयों के होश ठिकाने आ गए तो कुछ मौन व्रत में चले गए और कुछ लोग फॉरेन निकलने का प्लेन टिकट हाथ में लिए घूम रहे हैं। पर एग्जिट पोल में हार देखकर जो हताश है उन्हें हार का ठीकरा किस पर फोड़े उसकी जोर शोर से तलाश है।सबसे पहले ईवीएम नजर आ रही है। कई पार्टियों ने तो ईवीएम पर रोना-धोना शुरू कर दिया है तो कुछ उसकी तैयारी में लगे हैं।जो हर चुनाव में गुंडागर्दी अराजकता फैलाने के लिए कुख्यात थे वह माफिया ग अफजल अंसारी चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि ईवीएम कहीं और भेजी जा रही है।माफिया और बाहुबलियों का रोना जनता पहली बार देख रही है शायद लोकतंत्र परिपक्व होता नजर आ रहा है तो वहीं कांग्रेस के राशिद अल्वी तो इतने हताश और निराश हैं कि कह रहे हैं तीन राज्यों में चुनाव जीता कर बीजेपी ने हमारे साथ धोखा किया है।तीन राज्यों में चुनावी जीत ईवीएम पर भरोसे की साजिश थी और अगर एग्जिट पोल जैसे ही परिणाम आते हैं तो राशिद अल्वी का कहना है कि अगर एग्जिट पोल जैसे ही रिजल्ट आते हैं  तो निश्चित तौर पर धांधली हुई है ।राशिद जी जरा चश्मे का नंबर ठीक कर देखें कि आपने अपने ही आवाम को कितना धोखा दिया है आज उसने आपको सही आईना दिखाया तो आप खुद को खुद ही देख कर डर गए।तीन तलाक मुद्दे पर सबसे ज्यादा रोड़े अटका ने वाली पार्टी कौन थी ?जबकि सभी को पता है कि तीन तलाक में मुस्लिम महिलाओं का जीवन किस प्रकार नर्क बना दिया था |परंतु एक पार्टी ने जब से खत्म करने का बीड़ा उठाया तो और लाखों की संख्या में मुस्लिम महिलाएं कमल का बटन दबाना है कहने लगी तो यह लोग ईवीएम हैक है कि बात कहकर खुद को बचाने की जुगत में लगे जबकि इन लोगों की राजनीतिक आधार तो उसी समय खिसक चुका था। एग्जिट पोल देखकर सपा-बसपा तो मौन है शायद 23 के बाद ही अपने पत्ते खोले और हार का ढिंढोरा जाने किस पर पीटे। उधर वामपंथी भी 23 के बाद ही रणनीति बनाने की बात कह रहे हैं वैसे वह खुद मुट्ठी भर से भी कम बचे हैं 23 के बाद कोई उनको पूछेगा भी नहीं। उधर टिकट न मिलने से कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिए उदित राज कह रहे हैं कि एग्जिट पोल दिखा कर विपक्ष को निराश किया जा रहा है।अरे भैया विपक्ष तो पहले से ही निराश है बची खुची आस एग्जिट पोल और टीवी चैनलों ने 24 घंटे दिखा-दिखा कर खत्म कर दी है |उदित कहते हैं कि केरल में बीजेपी को एक भी सीट नहीं मिले इसका कारण है कि वहां शिक्षित लोग हैं अंधभक्त नहीं तो पिछले पांच साल के लिए आपको जिन लोगों ने चुना था क्या वह अंधभक्ति थे ? दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले उदित राज को आखिर देश में कितने दलित जानते होंगे यह सवाल उन्हें खुद से करना चाहिए| उधर दिल्ली वाले सर जी तो पहले ही कह चुके हैं कि अगर बीजेपी जीती तो इसकी जिम्मेदार कांग्रेस होगी| पर इन दिनों वह नया राग अलाप रहे हैं कह रहे हैं उनका पीएसओ उन्हें मारना चाहता है बीजेपी के विजय गोयल उमेश ने उन्हें सलाह दी है कि अपना पीएसओ बदल तो सर जी ने अपना बयान ही बदल दिया कह रहे हैं पीएसओ नहीं पीएम उन्हें मारना चाहते हैं। अब जनता उन्हें सलाह दे रही है सर जी आप अपना दिमाग बदल लो।इतना ड्रामा और नौटंकी कहां से लाते हैं ? उधर आम आदमी पार्टी के संजय कह रहे हैं एग्जिट पोल वालों ने नशे में बोल दिया है और गांजे की बिक्री पर रोक की मांग कर रहे हैं वैसे एग्जिट पोल से पूरे विपक्ष के सारे पोल धीरे-धीरे खोल रहा खोल रहे हैं रही बात गांजे की बिक्री की तो सरकार अब क्या-क्या बंद करें ? साइकिल के सेनापति कहते हैं यह बीजेपी वाले लोगों को अफीम सुघां कर वोट लेते हैं।अब गांजा अफीम लेने वाले ही जाने क्या-क्या लेकर और क्या-क्या कर वोट लिया जा सकता है ? यूपी में कांग्रेस की हालत पहले से ही पता है इसलिए वह यहां जीतने नहीं वोट काटने के लिए आई थी वैसे यह बात प्रियंका जी ने कही इसलिए कांग्रेसियों ने सर आंखों पर रखना था उन्हें जीतना नहीं वोट काटना था । खैर उन्हें कोई एग्जिट पोल से खास उम्मीद न थी अब है वह तो हार के लिए बलि का बकरा भी ढूंढ चुके होंगे शायद मिस्टर सैम या  अय्यर नजर में होंगे। प्रियंका जी एग्जिट पोल देख कर कह रही है इससे निराश होने की जरूरत नहीं है स्ट्रांग रूम के पास ही मंडराते रहें अगर प्रत्याशी कल जीता है तो ईवीएम ठीक है वरना ईवीएम हैक के नारे लगाने के लिए पंजा छाप वाले तैयार रहें।वीवीपैट ईवीएम के 50% मिलान को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दो बार लताड़ लगाने जाने के बाद भी महागठबंधन के ठग अभी से ही इसे मुद्दा बनाकर अपनी जान बचाने पर लगे हैं।इस मामले में में हाल ही में फिर से चुनाव आयोग जाने की तैयारी में है और यह जनता के सामने पूरी तैयारी से कहने को तैयार है अगर मिलन होता तो हम भी जीतते।  ईवीएम हैक है ईवीएम के साथ छेड़छाड़ हुई है जैसे आरोप लगाने वाले किसी राष्ट्रीय या क्षेत्रीय पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में यह नहीं कहा कि उन्हें ईवीएम पर भरोसा नहीं और वह बैलेट से चुनाव लड़ना चाहेंगे या अगला लोकसभा चुनाव या विधानसभा चुनाव बैलेट से कराएंगे यही उनकी असलियत है कि जहां पर वह जीते वहां पर ईवीएम ठीक है और जहां हारे वहां पर ईवीएम हैक है।बेहतर तो यह होगा कि ईवीएम पर फालतू रोना-धोना या हार का ठीकरा फोड़ने के बजाय अपने वर्किंग स्टाइल पर ध्यान देकर फिर से जमीन से जुड़े मुद्दों को उठाये ना कि दिनभर मोदी से नफरत का तरीका ढूंढते रहे तभी विपक्ष की वापसी संभव है। अन्यथा नामदार बस नाम के ही रह जाएंगे और साइकिल पंचर नजर आएगी तो हाथी दिखेगा कहीं भी नहीं और तृणमूल का फूल तृण में बदलते देर नहीं लगेगी और हर जगह ऐसे ही कमल खिलता रहेगा। बीजेपी की जीत कोई अप्रत्याशित नहीं है हर चुनाव दर चुनाव में खुद को साबित किया बदलाव लाया तो वहीं दूसरी और पंजा छाप वाली पार्टी हर चुनाव के परिणाम ने उन्हें पंजे के जगह ठेंगा दिखाया पर वह फिर भी बदलाव की ओर नहीं बढ़ी। वही पुराने ढर्रे पर चलने में उन्हें मजा आ रहा है जिस प्रशांत किशोर ने 2014 में बीजेपी को चमत्कारी बहुमत दिलाया फिर बिहार में महागठबंधन को जीत दिलाकर अपना लोहा मनवाया वह अगर कांग्रेस को सुधार नहीं पाते तो कांग्रेसी खुद ही हर हार के लिए जिम्मेदार है।जहां कमल हर जीत को कार्यकर्ता की जीत बतलाती है और हर हर पर घबराती नहीं मंथन में समय बिताती हैं तो वहीं कांग्रेस में ठीक इसके उलट जहां हर हार कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का आलस है और जीत राहुल बाबा का करिश्मा से कहकर सुशोभित किया जाता है। जबकि सभी को पता है कि हर राजनीतिक दल की रीढ़ कार्यकर्ता और बूथ प्रभारी ही होता है। परंतु कुछ लोग जो जमीनी हकीकत से दूर हुए और जनता से दूर होकर एसी कमरों में बैठकर चुनाव जीतने के सपने देखते हैं तो उन्हें तो एग्जिट पोल खराब ही लगेंगे। अभी एग्जिट पोल, एकजैक्ट पोल में बदला नहीं है फिर भी हालत ऐसी है कि मध्य प्रदेश में सरकार अल्पमत में आ गई  यह हार से ज्यादा हार  के सदमे का डर है तो वहीं दूसरी और क्षेत्रीय पार्टियों की जोड़-तोड़  वाली सरकार बनाने का प्रयास देश के लोकतंत्र को पुनः खोखला करने की तैयारी में है ऐसी अवसरवादी और मौकापरस्त  सरकार देश की जनता  अब दुबारा नहीं चाहेगी क्योंकि उसने कई बार देखा है कि इस प्रकार के गठबंधन की सरकार से  देश का भला नहीं हुआ है बल्कि गठबंधन में शामिल ठगों ने  जनता को खूब ठगा है। इसलिए समूचे विपक्ष के पास ईवीएम पर रोने और आरोप लगाने के अलावा कुछ बचा नहीं है और कुल मिलाकर सभी दलों का गुणा गणित कह रहा है कि इस बार भी बलि का बकरा ईवीएम ही बनेगी।