बहुआयामी सर्वस्पर्शी बजट
July 5, 2019 • राकेश रमण
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा लोकसभा में पेश किये गये पहले आम बजट के विश्लेषण को अगर सिर्फ दो शब्दों में समझना हो तो वह होगा बहुआयामी और सर्वस्पर्शी। सर्वस्पर्शी इसलिये क्योंकि इसमें सबके लिये कुछ ना कुछ है। प्रधानमंत्री मोदी की जुबानी समझें तो यह आम बजट देश को समृद्ध और जन-जन को समर्थ बनाने वाला बजट है जिसमें समाज के सभी वर्गों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है। बकौल प्रधानमंत्री इस आम बजट से गरीब को बल मिलेगा, युवाओं को बेहतर कल मिलेगा, देश के मध्यम आय वर्ग के लोगों प्रगति मिलेगी और देश के विकास की रफ्तार को गति मिलेगी। इस बजट से टैक्स व्यवस्था और नियम कायदों में सरलीकरण भी होगा और निजी क्षेत्र के सहयोग व जन भागीदारी से इन्फ्रास्ट्रक्चर का आधुनिकीकरण भी होगा। छोटे दुकानदारों को क्रेडिट कार्ड देने, लघु उद्योगों को आसानी से लोन दिलाने और किसानों को ब्याज मुक्त कर्ज मुहैया कराने के प्रवधानों के कारण ये बजट छोटे उद्यम और लघु व सीमांत उद्यमों को मजबूत बनाएगा और एक लाख तक का मुद्रा लोन देकर देश के विकास में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक बढ़ाएगा। यह तो हुई बजट के सर्वस्पर्शी स्वरूप की बातें। लेकिन इस बजट के विभिन्न आयामों को विरूपित करते हुए इसे बहुआयामी कहना इसलिये न्यायोचित होगा क्योंकि इसे सहज साधारण पारंपरिक बजट के नजरिये से नहीं देखा जा सकता। वास्तव में इसके कई आयाम हैं जिसमें सिर्फ आय और व्यय का लेखाजोखा व हिसाब किताब ही प्रस्तुत नहीं किया गया है बल्कि दूरगामी नीतियों और योजनाओं का खाका भी खींचा गया है और अगले पांच सालों के लिये देश की दशा व दिशा की भी झलक दिखाई गई है। व्यवस्था में सुधार को लेकर मोदी सरकार की मंशा का भी चित्रण किया गया है और परंपरागत लकीरों को तोडकर आगे की राह बनाने के प्रयासों का भी वर्णन किया गया है। मिसाल के तौर पर तकरीबन सौ से भी अधिक श्रम कानूनों में सुधार लाकर उनका सरलीकरण करने और उसकी उलझने दूर करने, सोशल स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना करने, बिजली और पानी के लिये वन नेशन वन ग्रिड की अवधारणा को आगे लाने और किराये के मकान में रहनेवालों के लिये आदर्श किराया कानून बनाने सरीखे नए प्रावधानों व नयी व्यवस्थाओं के अलावा पर्यावरण को बचाने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स कम करने का प्रस्ताव करनेवाले इस बजट को सिर्फ हिसाब किताब और आय व व्यय के तौर पर आखिर कैसे समझा जा सकता है। इस बार के बजट को एक ग्रीन बजट के तौर पर भी देखा जा सकता है क्योंकि इसमें पर्यावरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और सोलर सेक्टर पर विशेष बल दिया गया है और बैट्री चालित वाहनों पर जोर देते हुए लोगों को इसकी खरीद पर एक लाख तक के कर की छूट का लाभ दिये जाने की बात भी कही गई है और अगले पांच सालों में देश में बुनियादी सुविधाओं की अवसंरचना के लिये एक सौ लाख करोड़ के निवेश का भरोसा भी दिलाया गया है। इस बजट में आर्थिक जगत के रिफॉर्म भी हैं, आम नागरिक के लिए ईज ऑफ लिविंग भी है और साथ ही इसमें गांव और गरीब के कल्याण की ठोस योजना भी है। तभी तो इसके सकारात्मक पहलुओं को आगे रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल में पेश किये गये पहले आम बजट की दिल खोलकर तारीफ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। प्रधानमंत्री ने बजट के बारे में सीधे व सरल शब्दों में बताते हुए ना सिर्फ इसकी बहुआयामी खूबियां गिनाईं हैं बल्कि बजट को लेकर राष्ट्र को सम्बोधित करते हुए उन्होंने इसे इस बात का परिचायक बताया है कि देश बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ रहा है। आम लोगों के जीवन में पैदा हुई नई आकांक्षाएं और अपेक्षाओं से जोड़ते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये बजट देश को विश्वास दे रहा है कि जन आकांक्षाएं और अपेक्षाओं जो पूरा किया जा रहा है उसकी दिशा सही है, प्रोसेस ठीक है, गति सही है लिहाजा लक्ष्य तक पहुंचना तय है। प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक पिछले 5 साल में देश निराशा के वातावरण को पीछे छोड़ चुका है और आज हमारा देश उम्मीदों और आत्मविश्वास से भरा हुआ है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी भले ही बजट की बहुआयामी खूबियां गिनाते हुए इसे सबके लिये फायदेमंद बता रहे हों लेकिन इस बजट के कुछ स्याह पहलू भी हैं जिसे समझने के बाद अर्थव्यवस्था का आईना कहे जाने वाले शेयर बाजार में आज निराशा का माहौल स्पष्ट दिखाई पड़ा। मसलन बजट में मध्यम वर्ग को सीधे-सीधे टैक्स स्लैब्स में कोई छूट तो नहीं दी गई अलबत्ता उस पर पेट्रोल-डीजल पर सेस बढ़ाया कर दोहरी मार अवश्य दी गई है। इससे एक ओर महंगाई में इजाफा होना तय है जबकि सरकार की ओर से किसी प्रकार का संरक्षण या प्रोत्साहन नहीं दिया गया है। साथ ही गोल्ड और अन्य बहुमूल्य धातुओं पर कस्टम ड्यूटी 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत कर दिये जाने से बिटिया की शादी व अन्य पारंपरिक शगुन का बजट बढ़ना तय है। इसी प्रकार जिस तरह से सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की जमीन को बेचने और उस पर सबके लिये घर का सपना पूरा करने के लिये सस्ते आवासों का निर्माण करने की जो योजना बनाई गई है उससे अर्थव्यवस्था की रीढ करहे जाने वाले संस्थानों की मजबूती भी प्रभावित होगी। साथ ही रेलवे से लेकर एयर इंडिया और दूरसेचार क्षेत्र तक में विनिवेश को बढाने और बीमा व मीडिया के क्षेत्र से लेकर सिंगल ब्रांड की दुकानों के लिये विदेशी निवेश को अधिकतम प्रोत्साहन देने की नीति का प्रभाव भी देश की मजबूत आत्मनिर्भता को कमजोर ही करेगा। ऐसे और भी कई प्रावधान हैं जिन्होंने आम लोगों को निराश ही किया है। कुल मिलाकर यह बजट ऐसा नहीं है जिसे मोदी सरकार की ओर से जनता को बड़ा तोहफा के नजरिये से देखा जाये लेकिन प्रचंड बहुमत से सत्ता पर दोबारा काबिज होने वाली सरकार के पहले बजट में लोकलुभावन घोषणाओं के लिये कोई जगह नहीं होना अपेक्षित भी था और यह स्वाभाविक भी है।