बागवां
September 10, 2019 • दीपा शुक्ला 
बागवां
------
ऐ माली  ! सुनो  
तुम्हारे परिश्रम व् लगन ने
बेतरतीब पौधों को
काट  - छांट     कर    ,
सुन्दर  आकार  में 
ढालकर  ,
शोभा   द्विगुणित
कर दी चमन की ।
 
काश  ! तुम होते माली
इस वतन के ,
खिलते फूल 
अमन के ,
बिखरती  नेह सुगंध ,
स्वस्थ होता भावी तन -मन
उन्नति शिखर पर होता वतन ।
काश !  तुम होते माली
इस वतन के ...........
दीपा शुक्ला 
लखीमपुर खीरी
   उ . प्र .।