बाढ़ से बेबस बिहार
October 3, 2019 • देवानंद राय
(देवानंद राय)
एक आदमी बैग लिये अपने परिवार के साथ पुल पर खड़ा है आसपास पुलिसकर्मी भी नजर आ रहे हैं यह फोटो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है इस फोटो में कुछ भी असाधारण नहीं फिर भी यह वायरल हुए जा रही है क्योंकि फोटो में पुल पर खड़ा व्यक्ति कोई आम आदमी नहीं एक प्रदेश का उपमुख्यमंत्री है अब आप जान चुके होंगे कि मैं कहां की बात कर रहा हूँँ ? जी हाँँ बिहार की ! बाढ़ की तरह वायरल हुए इस फोटो में बिहार के बाढ़ की स्थिति का आराम से अंदाजा लगाया जा सकता है बिहार में बाढ़ की स्थिति क्या है ? बिहार में इन दिनों में बारिश से उत्पन्न हुए बाढ़ से जूझ रहा है बारिश से जमा पानी ने लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है राजधानी पटना में 80% डूबे हैं यहां तक कि पटना में यूनाइटेड नेशन का ऑफिस में भी पानी घुस चुका है बिहार और बाढ़ का रिश्ता बहुत पुराना है यहां प्रतिवर्ष गांव-देहात में बाढ़ आता जाता रहता है इस बार हुई बारिश से उत्पन्न बाढ़ इसमें शहरों का डूब जाना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है|पर जब  केरल में बाढ़ आये और मुंबई में बाढ़ आए तो  यह एक राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बन जाता है बिहार के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ सिर्फ इसलिए कि बिहार बीमारू राज्यों की श्रेणी में आता है या फिर बिहार के साथ हीन भावना अब भी कायम है जिस राज्य ने सबसे अधिक आईएएस दिए हो और आज वह पूरा राज्य जलमग्न दिखाई दे रहा है परंतु किसी आईएएस ने एक ट्वीट तक नहीं किया यह हमारी सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही को भी दर्शाता है कम से कम हमारे यूथ आईकॉन सोशल मीडिया के सनसनी और सिनेमा स्टार लोगों को तो बिहार में आई बाढ़ की सुध लेनी चाहिए राजनेताओं की चुप्पी भी इस विषय पर सोचने को मजबूर कर रही है। कई शहरों में बिजली नहीं है तो पानी कहां से होगा ? खाने को कुछ बचा ही नहीं ऐसे हालात में एक राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम चलाना आवश्यक हो जाता है अकेले एनडीआरएफ कितना संभाल पाएगी ? आज कोई राज्य भी बिहार के साथ आने को तैयार नहीं यह सोचने का विषय है| उत्तर प्रदेश जब सुदूर कश्मीरियों की सहायता करने में का कदम उठा सकता है तो बिहारियों की भी सहायता करने में देरी नहीं करनी चाहिए इस पर किसी प्रकार की राजनीति ना हो तो ही ठीक है|उपमुख्यमंत्री के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर उन्हें सुरक्षित निकलवाना प्रशासनिक जिम्मेदारी की श्रेणी में आता है तो प्रशासन और शासन को ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि उस गली, मोहल्ले और शहर में और भी लोग रहते होंगे उनके लिए भी ऐसे कदम उठाए जाने चाहिए नहीं तो आम आम ही बनकर डूबता रहेगा और खास बाढ़ में भी बॉस बनकर आराम फरमाता रहेगा. उम्मीद है सरकारें इस पर भी ध्यान देंगे।बिहार में कुल 38 जिले और 9 मंडल जिनमें से अभी 16 जिले बाढ़ के चपेट में है राष्ट्रीय आपदा मोचन बल एनडीआरएफ कि 20 दलों को बिहार भेजा गया है जिनमें 900 बचाव कर्मी है पर यह संख्या काफी कम है अकेले पटना में बाढ़ से सत्रह लाख लोग प्रभावित है। हमें और एनडीआरएफ कर्मियों, स्वयंसेवी कार्यकर्ताओं तथा एनजीओ को आगे आना चाहिए ताकि राज्य में आई आपदा के समय लोगों की सहायता कर सकें पूरी दुनिया में बांग्लादेश के बाद भारत सबसे अधिक बाढ़ से प्रभावित होने वाला देश है फिर भी हमारी सरकार सब कुछ जानते हुए भी हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं जब तक पानी सर तक न पहुंच जाए कोई ठोस कदम नहीं उठाती हैं यही कारण है कि बिहार में बाढ़ आने पर सरकारें यह सफाई देती नजर आ रही हैं उन्हें तैयारी का वक्त ही नहीं मिला। अभी कुछ महीने पहले मतलब जून-जुलाई में उत्तर प्रदेश, बिहार सहित देश के कई राज्य सूखे की चपेट में थे और अब देखिए बिहार सहित कई राज्यों में बाढ़ जैसे हालात है यह बताने को काफी है कि प्राकृतिक आपदाओं के सामने हम अभी बौने हैं। कुछ लोग बिहार में आए बाढ़ को जल निकासी प्रबंधन से जोड़कर देख रहे हैं कुछ हद तक सही भी है पानी निकलने वाले रास्ते नदी, नाले नहरों को अगर हम पटवाकर घर बनवा दे तो पानी निकलने का जगह ही कहाँ रहेगा ?  हम सारा दोष प्रकृति, प्रशासन और शासन को नहीं दे सकते हमने खुद ही प्रकृति के साथ धरती के साथ उसके नैसर्गिक व्यवस्था के साथ छेड़छाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार इस वर्ष सितंबर में औसतन 247.1 मिलीमीटर बारिश हुई जो सामान्य बारिश से 48% अधिक है सितंबर में बारिश ने 102 वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया है पर इस बार इसका दूसरा पहलू यह भी है कि दिल्ली में यह आंकड़ा इसके ठीक उलट है यानी वहां पर अन्य राज्यों की अपेक्षा कम बारिश हुई है बारिश के असंतुलन के कारण ही आज जहां कुछ राज्य बाढ़ से डूबे हैं तो वहीं कुछ राज्य सूखे से जूझ रहे हैं अंतिम सत्य यह है कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक  आपदा पर किसी का नियंत्रण नहीं होता पर पिछले कुछ समय से जिस प्रकार सूखे के बाद अगले कुछ महीने में बाढ़ की खबर आती है तो यह कहीं ना कहीं हमारे द्वारा उत्पन्न किए गए ग्लोबल वार्मिंग तथा जल प्रबंधन में नाकाम रहने के कारण हो रही है जरूरत अब है कि अब बिहार इस बाढ़ से पार पा जाने के बाद सबसे पहले शहरों में पानी निकालने के सिस्टम पर ध्यान दें और नदी से गाद हटाने पर ठोस कदम उठाए और पुनः प्रकृति से प्यार करें, प्रकृति की ओर मुड़े उसके साथ चले क्योंकि प्रकृति के आगे कोई सरकार नहीं टिकती है