बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ते कदम
February 18, 2019 • राकेश रमण
पुलवामा में हुए कायराना आतंकी हमले के बाद जिस तरह सधे व तेज कदमों के साथ भारत आगे बढ़ रहा है उससे यह अंदाजा लगाना कतई मुश्किल नहीं है कि इस बार केवल ‘कड़ी निंदा’ या सीमित व ‘नियंत्रित सर्जिकल स्ट्राइक’ करके अपने आक्रोश व बदले की भावना को शांत करने के लिये यह कतई तैयार नहीं है। हालांकि भारत ने कूटनीतिक व सैन्य कार्रवाई करते हुए बदले का एक बड़ा चरण पूरा कर लिया है जिसके तहत ना सिर्फ पाकिस्तान को दिया गया ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ का एकतरफा दर्जा वापस ले लिया गया है बल्कि वहां से आयात होने वाले मदों पर दो सौ फीसदी तक का शुल्क भी लगा दिया गया है। इसके अलावा आतंक के जहर को कश्मीर की रग-रग में फैलाने वाले भारतविरोधी सोच के अलगाववादियों से सरकारी सुविधाएं व सुरक्षा वापस ले ली गई हैं और पुलवामा हमले के मुख्य साजिशकर्ता को भी मार गिराया गया है। साथ ही पाकिस्तान के साथ नदी जल बंटवारे के समझौते को भी रद्द करने पर विचार हो रहा है और सुप्रीम कोर्ट ने भी जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देनेवाले संविधान के अनुच्छेद 370 के औचित्य को लेकर दायर की गई याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग पर विचार करने को लेकर सहमति दे दी है। साथ ही सुरक्षा बलों को इस बात की खुली छूट दे दी गई है कि वे कश्मीर को आतंकवादियों को जहन्नुम भेजने के लिये जो भी कदम उठाना चाहें उसके लिये वे पूरी तरह स्वतंत्र हैं। ये तमाम कदम जिस तेजी व तारतम्यता से उठाए गए हैं वे सरसरी तौर पर भले ही बदले की आग को शांत करने में काफी हद तक सक्षम हों लेकिन भारत के राजनीतिक नेतृत्व की बातों से कतई ऐसा महसूस नहीं हो रहा है कि वह इतने भर से ही संतुष्ट होने जा रहा है। बल्कि प्रधानमंत्री मोदी का यह कहना बेहद महत्वपूर्ण है कि जो आग देश के किसी भी आम आदमी के दिल में सुलग रही है उससे कहीं अधिक दाह व ताप के साथ उनके दिल में भी धधक रही है। यानि अब तक पाकिस्तान की ओर से किये जाने वाले ऐसे आतंकी हमलों के खिलाफ जिस तरह से कूटनीतिक खानापूर्ति की की जाती रही है वह सिलसिला इस बार हर्गिज नहीं जारी रहने वाला है। अगर सिर्फ यही सब करके मामले को ठंडा कर लेने की नीयत होती तो विश्व बिरादरी के साथ तीव्र विचार विनिमय का जो सिलसिला चलाया गया है उसका कोई औचित्य ही नहीं था। आज भी भारत की यात्रा पर आए अर्जेन्टीना के राष्ट्रपति मॉरिसियो मैक्री के साथ चर्चा के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान प्रायोजित आंतकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का स्पष्ट संकेत देते हुए कहा है कि आतंकवाद वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए बहुत गंभीर खतरा है और आतंकवादियों और उनके मानवता विरोधी समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई से हिचकना भी आतंकवाद को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने विश्व बिरादरी को साक्षी रखते हुए सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान को बता दिया है कि पुलवामा में हुआ क्रूर आतंकवादी हमला यह दिखाता है कि अब बातों का समय निकल चुका है। अब सारी दुनिया को आतंकवाद और उसके समर्थकों के विरुद्ध एकजुट होकर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यानि दूसरे शब्दों में कहें तो प्रधानमंत्री की बातों से यह तो स्पष्ट है कि अब भारत सिर्फ पाकिस्तान के साथ आतंक जारी रहने तक बातचीत बंद रखने की नीति पर ही अमले करते हुए शांत नहीं बैठा रहेगा बल्कि तत्काल ठोस व सीधी कार्रवाई का इसने पक्का इरादा कर लिया है। निश्चित ही यह कार्रवाई भारतीय हितों की सुरक्षा के लिये और आतंक के समूल नाश के लिये होगा जिसमें अगर पाकिस्तान आड़े आया तो उसे आतंक को पालने-पोसने की बड़ी कीमत चुकानी होगी। प्रधानमंत्री की बातों से साफ है कि जब तक भारत ने सरहद लांघ कर आतंक का विनाश करने की दिशा में कदम नहीं बढ़ाया है तब तक का ही मौका पाकिस्तान के पास उपलब्ध है कि वह आतंक की जड़ों को खोदकर उसे खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाए। अगर पाकिस्तान ने ऐसा करने में अब देर की या आतंक का बचाव करने की नीति पर अमल जारी रखा तो उसके साथ भी आतंकी मुल्क सरीखा सलूक करने के अलावा भारत के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होगा। इस बात का संकेत आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी राजस्थान में यह विश्वास व्यक्त करते हुए दिया है कि हमें अपने वीर जवानों पर पूर्ण भरोसा है, वे पुलवामा हमले का अपने तरीके से अपने समय पर मुंहतोड़ जवाब देंगे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जवानों की शहादत को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा और उनके बलिदान का माकूल जवाब दुश्मनों को मोदी सरकार और हमारे वीर जवान देंगे। इसके अलावा पाकिस्तानियों को अपने आक्रोश, गुस्से और नफरत का संकेत देते हुए अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में कुलभूषण जाधव मामले पर सुनवाई के दौरान भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तानी समकक्ष से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एजी अनवर मंसूर खान जब भारत के विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव दीपक मित्तल के पास हाथ मिलाने पहुंचे, तो मित्तल ने खान से हाथ मिलाने से परहेज बदरतते हुए दूर से ही हाथ जोड़ लिए। भारतीय विदेश मंत्रालय की इस कठोर प्रतिक्रिया को भारत के भावी कदम से जोड़ कर देखा जाना ही उचित होगा। यह संकेत सिर्फ संबंधों की असहजता का नहीं है बल्कि ऐसा व्यवहार यह साफ कर रहा है कि अब भारत ने पाकिस्तान को दुश्मन राष्ट्र की नजर से देखना शुरू कर दिया है। लेकिन पाकिस्तान में पल रहे आतंकियों के खिलाफ निर्णायक प्रहार से पूर्व एक तरफ भारत ने अमेरिका, फ्रांस, जापान समेत 25 देशों के राजनयिकों से संपर्क साध कर जैश ए मोहम्मद व पाकिस्तान के गहरे रिश्ते के पक्के सबूत दिये हैं वहीं राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अलग से अमेरिका में अपने समकक्ष जॉन बोल्टन से भी बात की है। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के स्थाई पांच देशों के प्रतिनिधियों के अलावा जापान, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, दक्षिण एशिया व खाड़ी क्षेत्र के 25 देशों के नई दिल्ली स्थिति प्रतिनिधियों से विदेश सचिव विजय गोखले के नेतृत्व में मुलाकात भी की गई है जिसमें सभी देशों ने यह स्वीकार किया है कि आतंकी संगठन जैश को पाकिस्तान की मदद मिल रही है। यानि भारत का इरादा साफ है कि इस बार जैश की हरकत को पाकिस्तान से अलग करके नहीं बल्कि उसके साथ सीधे तौर पर जोड़ कर ही देखा जाएगा और इसका बदला भी सिर्फ जैश से नहीं बल्कि पाकिस्तान से भी लिया जाएगा। साथ ही गुलाम कश्मीर को आतंक की जन्नत बना दिये जाने को देखते हुए अब यह विकल्प भी खुला है कि वहां पनप रही आतंक की नर्सरी को सिर्फ मिटाया ही ना जाए बल्कि वहां अमन व शांति की बयार भी बहाई जाए जिसका वहां के स्थानीय निवासी लंबे अर्से से इंतजार कर रहे हैं।