भारत की शक्ति को देख कर दुनिया दंग
September 25, 2019 • विष्णुगुप्त

(विष्णुगुप्त)

अमेरिका के टेक्सस राज्य ह्यूस्टन शहर में ' हाउडी मोदी ' कार्यक्रम की शक्ति ने जहां दुनिया को चकित किया, दुनिया को भारत की शक्ति को प्रणाम करने, स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया, मजबूर किया वहीं हमारे दुश्मन देशों और हमारे आंतरिक द्रोहियों की नींद हराम हुई, जलन में अनाप-शनाप बोलने पर भी बाध्य हुआ। भारत में तो हाउडी मोदी की उपलब्धि और शक्ति तो गांव-गांव तक चर्चा का विषय जरूर बनी पर खास कर अमेरिका में यह चर्चा बेमिसाल रही है। खुद डोनाल्ड ट्रम्प ही नहीं बल्कि कई अमेरिकी सांसदों की यह यह उक्ति थी कि उन्होंने ऐसी भीड अमेरिका में कभी नहीं देखी थी, भीड के अर्थ आश्चर्यचकित करने वाले थे, उत्साहित भीड रोमांचकारी थी, जीवन के सुखमय क्षण था। भीड में उपस्थिति अमेरकियों-भारतीयों की गुणवता और साख पर भी बडी चर्चा हो रही है। गुणवता का अर्थ रहन-सहन, पेशा और दक्षता से है। सबसे बडी बात यह है कि इस भीड को देख कर अमेरिकियों को कोई घृणा नहीं हो रही है, आखिर क्यों? अमेरकियों को इस लिए धृणा नहीं हो रही है कि ये भीड अमेरिका के लिए कोई समस्या खडी करने वाली नहीं थी और न ही अमेरिका की संप्रभुत्ता का दमन करने वाली या फिर लहूलुहान करने वाली नहीं थी। अमेरिकी-भारतीय हमेशा से अमेरिका की संप्रभुत्ता का सम्मान करते हैं और अमेरिका के विकास-विज्ञान, व्यापार और प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाते हैं और इस भूमिका को अमेरिका की सरकार और नागरिक दोनों स्वीकार करते हैं।
 प्रश्नों की श्रृंखला भी उठना स्वाभाविक है कि आखिर हाडडी मोदी कार्यक्रम की इतनी गंभीर चर्चा दुनिया में क्यों हो रही है? एक भीड मात्र को दुनिया भारत की शक्ति स्वीकार करने के लिए क्यों बाध्य हो रही है? क्या यह सही में अप्रवासी भारतीयों की बेजोड और अनुकरणीय शक्ति है, स्वाभिमान के प्रतीक है और अप्रवासी भारतीयों की इस शक्ति पर हमें गर्व करना चाहिए? डोनाल्ड ट्रम्प को हाउडी मोदी कार्यक्रम से क्या कोई ऐसी शक्ति मिलेगी जिससे उन्हें फिर यानी दुबारा राष्ट्रपति बनने के लिए के लिए प्रेरक का कार्य करेगा? दुश्मन देश पाकिस्तान को हाउडी मोदी कार्यक्रम की सफलता से जलन क्यों हो रही है? देश के आंतरिक द्रोही जो हमेशा देश की शक्ति के खिलाफ खडा हो जाते हैं, उनकी नींद क्यों हराम हो गयी है? 
इन प्रश्नों का उत्तर यह है कि हाउडी मोदी कार्यक्रम की भीड कोई ऐसी-वैसी भीड नहीं थी, उस भीड को आमंत्रित करने के लिए खून और पसीना नहीं बहाया गया था, भारत या फिर अमेरिका की सरकार ने भीड जुटाने की कोई कोशिश नहीं की गयी थी। भीड की संख्या भी 60 हजार के आस-पास पहुंच गयी थी, हजारों ऐसे लोग भी थी जिन्हें शामिल होने का अवसर ही नहीं मिला, कारण स्टेडियम में जगह ही नहीं थी।
हाउडी मोदी कार्यक्रम में जुडी भीड कोई मुर्गी काटने वालों की नहीं थी, यह भीड कोई पलम्बर बनाने वालों की नहीं थी, यह भीड कोई वाहन चालकों की नहीं थी, यह भीड को कट्टरपंथियों की नहीं थी, यह भीड कोई आतंकवादी मानसिकता की नहीं थी, यह भीड कोई अवैध रूप से अमेरिका में धुसे अप्रवासियों की नहीं थी। क्या यह आप नहीं जानते हैं कि अमेरिका में हर साल कट्टरपंथी और पागल मानसिकता वालों देशों से लोग अवैध घुसपैठ कर आ जाते हैं और फिर अमेरिका की ही संप्रभुत्ता को लहूलुहान करने के लिए लग जाते हैं। क्या आपने अमेरिकी वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर आतंकवादी हमला को नहीं सुना है, उसके खतरनाक संदेश से अवगत नहीं हैं? अमेरिका के वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर हमला करने वाले कट्टरपंथी, पागल और विफल देशों के नागरिक थे। हाउडी मोदी कार्यक्रम में उपस्थित होने वाले लोगों में बडे टेक्नोक्रेट थे, बडे वैज्ञानिक थे, बडे प्रबंधन कर्ता थे, बडे रसायण शास्त्री थे, बडे गणितज्ञ थे, बडे भौतिक शास्त्री थे, बडे समाजशास्त्री थे। अगर इतने बडे-बडे लोगों की उपस्थिति एक जगह होगी तो स्वाभाविक तौर पर चर्चा के विषय बनेगी।
अमेरिका में रहने वाले अप्रवासी भारतीयों की प्रेरक उपस्थिति और भूमिका की चर्चा होनी जरूरी है। अमेरिका में कोई एक -दो हजार नहीं बल्कि लाखों भारतीय बसे हैं। इनक दो श्रेणियां हैं। पहली श्रेणी में वैसे भारतीय हैं जिन्हें अमेरिका की नागरिकता मिल चुकी है और अमेरिका की स्थायी नागरिक हैं। दूसरी श्रेणी में वैसे भारतीय हैं जो जिन्हें वर्क परमिट मिला हुआ है। स्वाभाविक तौर पर दोनों श्रेणियों के अमेरिकी नागरिकों और वर्क परमिट धारियों का लगाव और झुकाव भारत के प्रति है, क्योंकि उनका मूल और संस्कृति भारतीय है। कोई भी समुदाय अपने मूल को छोडता नहीं है, किसी न किसी प्रकार से वह अपने मूल से जुडा हुआ होता है।