भाषा संस्कृति की संवाहिका होती है - अतुल कोठारी
February 24, 2019 • शशिधर शुक्ला

अंतराष्ट्रीय मातृ भाषा पखवाड़ा समापन समारोह में उत्तरी पूर्वी भारत के विख्यात अधिवक्ताओं व शिक्षाविदों  ने भाग लिया

*वाराणसी -  महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षा संकाय के सभागार में   भारतीय भाषा अभियान(पूर्वी भारत),विधि संकाय व विद्याश्री न्यास ट्रस्ट के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा पखवाड़ा समापन समारोह का आयोजन किया गया । इस अवसर पर  महाधिवक्ता राघवेंद्र सिंह* ने कहा कि मातृभाषा का कोई विकल्प नही है हमारी मातृभाषा हमे हमारे गौरव का एहसास कराती है । भारतीय भाषा अभियान का मुख्य उद्देश्य है कि ऐसी भाषा जिसे हर व्यक्ति आसानी से समझ सके और उस भाषा मे अपनी अभिव्यक्ति भी कर सके , कितना भी बड़ा कोई विद्वान हो वो किसी भी भाषा को अक्षरशः अनुवादित नही कर सकता है उस दिए गए शब्दो के आशय व उसका भाव दोनों ही बदल जाते हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था प्रभावित होती है। 
प्रो दिलीप सिंह ( इंदिरा गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय ) ने विषय प्रर्वतन करते हुए कहा कि भारत की मातृभाषा व राष्ट्रीय एकता  के ये ही सूत्र उन लोगो के थे जिन लोगो ने काशी विद्यापीठ की स्थापना की थी। हमारे जिन जिन प्रदेशो या संस्थानों में जहाँ मातृभाषा की अनदेखी हो रही है हमे उन्हें चयनबद्ध कर के उनके विस्तार के लिये क्रमश कार्य करना होगा , भाषा के उत्थान के लिये हमारी संस्थाओ को आगे आना होगा। भाषा के बंटने का लाभ अंग्रेजो ने खूब उठाया था । 
मुख्य वक्ता के रुप में बोलते हुए अतुल कोठारी ने कहा कि भाषा सिर्फ एक सम्प्रेषण का एक माध्यम नही है  बल्कि यह संस्कृति की संवाहिका है। मां मातृभाषा ,मातृभूमि का कोई विकल्प नही है इसलिये कार्य कोई भी हो लेकिन शिक्षा व न्याय  की व्यवस्था अपनी मातृभाषा में हो तो उसमें अपनत्व का भाव होता है। हमारे देश मे भाषाओं के आधार पर ही प्रदेशो का नामकरण हुआ है, हर प्रदेश की अपनी भाषा है आज हम सब का दुर्भाग्य है कि आज आज़ादी के इतने साल बाद भी हमे इस बात के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है।
समापन समारोह की विशिष्ठ अतिथि काशी नरेश राजकीय महाविद्यालय की डॉ काशी नरेश ने कहा डॉ कामिनी वर्मा ने कहा
भाषा देश की संस्कृति की विशिष्ट पहचान होती है  अभिव्यक्ति और संप्रेषण का सर्वोत्तम माध्यम मौलिक भाषा हिंदी ही हो सकती है इसलिये न्यायालयों और सरकारी कामकाज की भाषा हिंदी ही हो सकती है। न्यायालयों में राज्य क्रिमिनल प्रोसिजर कोड की धारा 272 और 137 के अंतर्गत हिंदी और स्थानीय भाषा लागू कर सकतें है इसी के तहत हरियाणा सरकार ने हिंदी को राजभाषा माना है । उन्होंने भारतीय भाषा अभियान के सार्थक प्रयास खूब सराहा।
प्रो चतुर्भुज तिवारी ने कहा कि भारतीय भाषा अभियान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि मैकाले की बनाई गई व्यवस्था में अंग्रेजी का प्रयोग करने के लिये बाध्य हैं लेकिन अब ऐसा नही होगा क्योंकि हमें इस बात को यह मानना होगा कि पूरे देश मे हिंदी सर्वमान्य भाषा है हमे अंग्रेजियत को किनारे करना होगा । *कामेश्वर मिश्रा* ने भारतीय भाषा अभियान द्वारा बीते सात फरवरी से बाइस फरवरी तक हिंदी भाषा को समृद्ध बनाने के लिये पूरे देश मे कार्यक्रम किये गये।न्यायालय में भारतीय भाषाओं के साथ स्थानीय भाषा या क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग किया जाय जिससे आम जनमानस को काफी सुविधा होगी।  *डॉ दयानिधि मिश्रा* ने कहा कि हिंदी भाषा वनवास के काल से गुजर रही है अब हिंदी को स्वम अपनी शक्ति से ही उसका विकास करना होगा लेकिन इसके लिये इसे सत्ता व सरकारों को अपना संरक्षण देने होगा बहुत से ऐसे देश है जिनमे जो उसकी मातृभाषा है उसको समझने वाले काफी कम लोग है लेकिन फिर भी उनकी भाषा को मातृभाषा की संज्ञा दी गयी ।  *राजेन्द्र पांडे अधिवक्ता* ने कहा कि मातृभाषा हमें भावो से अभिसिंचित करती है क्योंकि किसी अन्य भाषा मे इतना भाव नही मिलेगा। हम सब अगर सही मायने में मातृभाषा का विकास चाहते है तो उसके लिये हम सबको अपने अंदर अपनी भाषा के प्रति ममत्व का भाव पैदा करना होगा क्योंकि बिना भाव के किसी भी भाषा का भला नही हो सकता है।समापन सत्र की अध्यक्षता प्रो रंजन.ने किया, इस सत्र में  सुरजीत सिंह डंग, शंकर झा  अशोक मेहता आदि ने धन्यवाद ज्ञापन संजय जी ने किया संचालन प्रतिमा पाण्डेय ने किया। उत्तर प्रदेश स्थित छ: प्रांतों, १८ विभागों एवं ७५ जनपदों के अनेकों विद्वान अधिवक्ता व भारतीय भाषा अभियान की इकाइयों के कार्यकारिणी सदस्यों ने उत्तर प्रदेश प्रान्त संयोजक राघवेन्द्र शुक्ल व सह संयोजक अर्चना शर्मा के नेतृत्व में कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सहभागिता  की। कार्यक्रम मे प्रमुख.रुप से हरि गोविंद उपाध्याय, रबीन्द्र भूषण धर दुबे, निशांत त्रिपाठी, अंजली वर्मा, अक्षय भारद्वाज, मनु गोस्वामी, आत्रेय दत्त मिश्र, अखिलेश मिश्र,  संतप्रसाद, विनोद पाण्डेय, प्रेमशंकर पाण्डेय, विजयशंकर रस्तोगी, अनुराग द्विवेदी, दिलीप गुप्ता, कुंवर बहादुर सिंह, विकास वर्मा आदि लोग उपस्थित थे। आज बनारस के अधिवक्ताओं जो लोग मातृभाषा संवर्धन लगे हुए है उनका सम्मान भी किया गया जिसमें प्रमुखतः शिवपूजन सिंह गौतम(अध्यक्ष सेंट्रल बार), राजेश मिश्र(अध्यक्ष बनारस बार),बृजेश मिश्र(महामंत्री),अशोक सिंह प्रिंस, आर.पी.पाण्डेय, विवेक शंकर तिवारी और दुर्गा प्रसाद आदि अधिवक्ताओं का सम्मान किया गया।