मंदी आई है !
August 28, 2019 • देवानंद राय

                    व्यंग

(देवानंद राय)
चौराहे पर चाचा बड़ी जोर जोर से हंस रहे थे कह रहे थे अरे मजा आ गया मंदी आ गई अब 56 इंच वालों की बजेगी ! दूर खड़े साधो को कुछ समझ नहीं आया क्योंकि चाचा कुछ महीनों से साइलेंट थे साधो ने उनसे जाकर पूछा चाचा क्या बात है ? काहे इतना खिल खिला रहे हैं अरे साधो तुम्हें पता नहीं मंदी आ गई है साधो ने तपाक से पूछा चाचा कहाँँ ? चाचा ने कहा रे न्यूज़ चैनल देखो, न्यूज़पेपर पढ़ो, फेसबुक का बुक खोलो,ट्विटर का तीतर उड़ाओ हर जगह पर मंदी-मंदी नजर आ रही है|अच्छा चाचा तब तो बड़ी चिंता की जगह बड़ी आर्थिक चिंता की बात है पर चाचा अभी आपने जिनके नाम लिए उनके हम मंदी आई कि नहीं| चाचा बोले क्या मतलब ? साधो बोला चाचा बताओ किस न्यूज़ चैनल वाले के यहाँँ मंदी आई ? किस अखबार वाले ने लोगों को नौकरियों से निकाल दिया या फेसबुक कब से दिवालिया होने लगा या ट्विटर का पंछी कब से उड़ान नहीं भरा|साधो की बात सुन चाचा सोच में पड़ गए।चाचा को ज्यादा सोचता देख साधो से रहा नहीं गया वो बोला ज्यादा मत सोचो वरना सोच में भी मंदी आ जाएगी। चाचा बोल प्यारे बात तो तेरी सही है पर अखबार और खबरें हर बार गलत कहाँँ होती है।साधो ने कहा बिल्कुल सही चाचा खबरें कहाँ गलत होती है।पर झूठी खबर दिन में दस बार चलाओ तो शाम तक वह भी सही मान ली जाती है। मतलब मंदी नहीं है !  चाचा तिलमिलाकर बोले  साधो ने खोखे वाले से कहा ठंडा दो चाचा गरम हो रहे हैं। चाचा मंदी है बेशक है पर इतनी नहीं जितनी तेजी से न्यूज़ चैनल वाले दिखा रहे हैं और जितनी धड़ाधड़ फेसबुक पर पोस्ट और ट्विटर पर ट्वीट हो रहे हैं तो तुम क्या कहना चाहते हो ? वह पारले जी वाला झूठ बोल रहा है पारले जी वाला सच बोलता तो ब्रिटानिया और अनमोल वाले भी मंदी में आ जाते। चाचा आप खुद कितनी बार पारले खरीदा है हाल फिलहाल में चेहरे पर सन्नाटा था तब तक रामाधीर भैया बोल पड़े अरे साधो अब पारले खरीदता कौन है मेहमानों को तो पारले जी खिलाना मतलब बेइज्जती करना सोच बन गयी है। चाचा को मंदी का जवाब मिल गया। साधो को लगा चाचा शांत हो जाएंगे पर तभी चाचा बोल पड़े फिर यह कार वाले बेकार में परेशान हो रहे हैं। साधो बोला यह तो वह किया सन्टोस वालों से पूछो। वही जिसका एड अभी टाइगर श्रॉफ ने किया है जिसकी लांचिंग अभी हुई है चाचा बोले।साधु बोले लांचिंग होते ही छत्तीस हजार कारों की बुकिंग भी हो गयी। चाचा बोले हाँँ साधो बोला जी हाँँ।पर चड्डी ना खरीद पाने वाले तथाकथित अर्थशास्त्री तो कहेंगे ही उफ्फ ! यह मंदी जान ले लेगी|चाचा क्या है कि मंदी तो है पर उतना नहीं जितना कि हर दिन पैदा हो रहे अर्थशास्त्री कह रहे हैं मंदी ना होती तो सरकार काहे को पैकेज देती पर इतनी भी नहीं कि अपनी चमचमाती अर्थव्यवस्था चरमरा जाए और उन लोगों के फेसबुक पोस्ट का क्या जो भारत की छठी अर्थव्यवस्था होने पर मन ही मन दुखी थे पर सातवें पर पहुंचते ही खुलकर पोस्ट करने लगे देखो मेरा देश नीचे पहुंच गया ऐसे लोगों की सोच में मंदी को अपनी मंदी का कारण न बनाओ चाचा|तभी पास से गुजरते जुम्मन चाचा बोले कश्मीर में हालात ठीक नहीं है साधो बोला  जुम्मन चाचा कश्मीर के हालात ठीक ही कब थे ? अब जब हालात सुधारने के लिए कड़वी दवा दी जा रही है तो बोले दवा कड़वी है हालात ठीक नहीं चाचा इतना सेलेक्टिव होना भी ठीक नहीं। पर कुछ कांग्रेसी तो कह रहे हैं अर्थव्यवस्था आईसीयू में है बिल्कुल चाचा जब इनकी पार्टी आईसीयू में हो तो उनकी अर्थव्यवस्था भी आईसीयू में ही होगी।अब जब दस जनपथ की अर्थव्यवस्था आईसीयू में है तो खान मार्केट और लुटियन जोन में बैठने वालों की अर्थव्यवस्था का गुणा-गणित खराब तो होना तय है इस कारण हर जगह मंदी है मंदी है कहना शुरू कर दिया|ठीक वैसे ही जैसे पंजा छाप वालों का कोई नेता सीबीआई या ईडी के पंजे में आते ही लोकतंत्र खतरे में आ जाता है। वैसे ही मंदी की खबर तभी से जोर से आने लगी है जबसे "साउथ वाले अन्ना' सीबीआई वालों के हाथ लगे हैं|वैसे भी चाचा इतनी मंदी में हर शुक्रवार को रिलीज हो रही फिल्में करोड़ों कमा रही हैं बिग बाजार में बिलिंग कराने में घंटों लग रहे हैं और आप कह रहे हैं मंदी आ रही है इस मानसिक मंदी से बाहर निकलिए शुक्रवार को सिनेमाहॉल और रविवार को माल घुमइये  सारी मंदी दूर हो जाएगी। चलते चलते के मंदी बारे में इतना मत सोचो वरना सोच में भी मंदी आ जाएगी।