मरुस्थलीकरण रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन
September 8, 2019 • बाल मुकुंद ओझा

                  # ओरण को बताया थार का प्राण
जयपुर। ग्राम भारती समिति, जयपुर तथा चाइना ग्रीन फाउन्डेशन, चीन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को ग्रेटर नोएडा में मरुस्थलीकरण की चुनौती से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र के 14वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन में एशियाई  देशों में अकाल प्रतिरोधी प्रजातियों के वृक्षारोपण पर भवानी शंकर कुसुम की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक के मुख्य अतिथि यूएनसीसीडी के उप कार्यकारी सचिव डाॅ. प्रदीप मोंगा ने संयुक्त राष्ट्र, सरकार तथा नागरिक संगठनों को मिलकर अकाल, मरुस्थलीकरण तथा भूमि क्षरण की रोकथाम के लिये काम करने के लिये आह्वान किया। डाॅ. मोंगा ने इस अवसर पर जमना लाल बजाज पुरस्कार मिलने के उपलक्ष्य में भवानी शंकर कुसुम को सम्मानित किया।
 शनिवार के सत्र में राजस्थान की प्रबल भागीदारी रही। सम्मेलन में 49 देशों के प्रतिनिधि समिल्लित हुए। इस सत्र में राजस्थान के पर्यावरण कार्यकर्ता एवं नेहरू युवा केन्द्र संगठन के राज्य निदेशक डाॅ. भुवनेश जैन ने थार रेगिस्तान में ओरण, बीड़, गोचर की महान परम्पराओं की जानकारी देते हुए कहा कि मरूस्थलीकरण रोकथाम ,मानव और पशुधन एवं वन्य जीव के जीवन के लिए इसे बचाना जरूरी है। डाॅ. जैन ने कहा कि थार क्षेत्र में बीस हजार वर्ग किलोमीटर में ओरण, गोचर थार के रूप में सामुदायिक संपदा उपेक्षा की शिकार है जिसके कारण पशुधन एवं कमजोर वर्ग के लोगों पर उसका असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि खेती में आए परिवर्तन ने गोचर और ओरणों के वैभव को कमजोर कर दिया है। पहले 30 प्रतिशत जमीन पर खेती की जाती थी अब संपूर्ण खेत पर फसल लेने की चाहत से पशुधन एवं वन्य जीव का दबाव गोचर और गोचर के बाद ओरण पर पड़ने से ओरण गोचर की स्थितियां अत्यंत कमजोर हो गई है। 
 उन्होंने  एशिया  में इस तरह की सामुदायिक संपदा के संरक्षण हेतु तकनीकों का आपस में हस्तांतरण कर मिलकर उसे बेहतर बनाने की जरूरत पर जोर दिया। जैन ने इस अवसर पर ओरण, गोचर में उपलब्ध अनेक घास, झाडियों और पेड़ों आदि की जानकारी दी। उन्होंने इन वनस्पतियों को बचाने के साथ साथ लोक मूल्यों को पुनः जीवित करने एवं जल संसाधनों के बारे में जानकारी दी। 
 राजस्थान के बाड़मेर जिले से कृषि वैज्ञानिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता डाॅ. प्रदीप पगारिया ने पश्चिमी राजस्थान की विशेष वृक्ष प्रजातियों- खेजड़ी, बेर, खेर आदि की अकाल से मुकाबला करने की क्षमता पर विस्तार से चर्चा की। 
चीन के वृक्षारोपण मंत्रालय के महानिदेषक श्री सुन गोजी ने चीन के रेगिस्तानी क्षेत्र मंे विषेष तकनीक से वृक्षारोपण करने पर विस्तार से चर्चा करते हुये इसे एशिया के अन्य देशों में भी अपनाने की सलाह दी। बैठक में चीन तथा भारत के अतिरिक्त बंगला देश, अर्जेन्टिना, ब्राजिल, जापान, वियतनाम, टोगो, कोरिया, नेपाल, सूडान, कम्बोड़िया, कजाकिस्तान, किरगिस्तान, भूटान, मोरितानिया, पोलैन्ड आदि  49  देशों के 120 प्रतिनिधियों ने भाग लिया।  2 सितम्बर से एक्सप्रो मार्ट, ग्रेटर नोएडा प्रारम्भ हुये अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का 13 सितम्बर को समापन होगा।