महामारी से कम नहीं है वायु प्रदूषण का खतरा
April 4, 2019 • बाल मुकुन्द ओझा

                       (बाल मुकुन्द ओझा)

वायु प्रदूषण पर विभिन्न शोध रिपोर्टों का गहनता से अध्ययन करें तो यह पाएंगे की यह किसी महामारी से कम नहीं है। इसे किसी भी स्थिति में कमतर मापना स्वस्थ्य से खिलवाड़ होगा। वायु प्रदूषण स्वास्थ्य के लिए तीसरा सबसे बड़ा खतरा बन गया है। लाख चेष्टा के बावजूद हम वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों और गंभीर बीमारियों को रोक नहीं पाए है। एक गैर सरकारी संस्था की रिपोर्ट पर गौर करें तो भारत में वायु प्रदूषण के कारण 2017 में 12 लाख लोगों की मौत हुई। यह आंकड़ा बुधवार को जारी एक वैश्विक शोध में प्रकाश में आया है। वायु प्रदूषण वैसे तो पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुका है, लेकिन भारत और चीन में स्थिति ज्यादा जानलेवा है। शोध-रिपोर्ट स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर-2019 के अनुसार, वर्तमान में वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण दक्षिण एशिया में बच्चों की औसत जीवन प्रत्याशा में ढाई साल की कमी आएगी, जबकि वैश्विक जीवन प्रत्याशा में 20 महीने की कमी आएगी। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत ने प्रदूषण से निपटने के लिए सराहनीय प्रयास किए हैं। भारत ने प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, भारत चरण-4 स्वच्छ वाहन मानक और नए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसे बड़े कदम उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण स्वास्थ्य संबंधी सभी खतरों से होने वाली मौतों में तीसरा सबसे बड़ा कारण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण से जितने लोगों की मौत होती है, उसकी आधी संख्या भारत और चीन में है। भारत और चीन में 2017 में वायु प्रदूषण से 12-12 लाख लोगों की मौत हुई। 

रिपोर्ट के अनुसार, घर के भीतर या लंबे समय तक बाहर वायु प्रदूषण से घिरे रहने की वजह से वर्ष 2017 में स्ट्रोक, मधुमेह, दिल का दौरा, फेफड़े के कैंसर या फेफड़े की पुरानी बीमारियों के कारण दुनिया भर में करीब 50 लाख लोगों की मौत हुई। भारत व चीन में 12-12 लाख लोग असमय मौत का शिकार हुए। दूसरी तरफ संयुक्त राष्ट्र बाल कोष यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में बताया गया है वायु प्रदूषण के संकट से लाखों भारतीय बच्चे प्रभावित हो रहे हैं। भारत सहित दक्षिण एशिया में वायु प्रदूषण से 1.22 करोड़ शिशुओं के मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है।
सियासी राजनीति के शोर में देश में वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों के आंकड़े न केवल चिंताजनक अपितु बेहद डरावने है। एक ही साल में 12 लाख से अधिक मौतें चैंकाने वाली है। इसका साफ मतलब है देशवासी वायु प्रदूषण के जानलेवा खतरे से अभी तक सावचेत नहीं हुए है।
वायु प्रदूषण का खतरा अब घर घर मंडराने लगा है। इसने जल्द ही संक्रामक महामारी का रूप धारण कर लिया है। सरकारी जागरूकता के अभाव में वायु प्रदूषण से देश भर में लाखों लोग पीड़ित हो रहे है और सैंकड़ों अकाल मौत के शिकार हो गए है। एक व्यापक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह बात सामने आई है कि कमजोर दिल वालों के लिए वायु प्रदूषण नुकसानदायक साबित हो रहा है। वायु प्रदूषण दिल की बीमारी से पीड़ित लोगों की जान भी ले सकता है। एक नये अध्ययन के मुताबिक वायु प्रदूषण की वजह से इंसानों में गुर्दे की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है और गुर्दे खराब भी हो सकते हैं। भारत में समय से पूर्व मृत्यु सांस की बीमारियों, हृदय की बीमारियों, हृदयाघात, फेफड़ों के कैंसर और मधुमेह से जुड़ी हैं और यह सीधे तौर पर वायु प्रदूषण से प्रभावित है। ओजोन प्रदूषण फेफड़ों की बीमारियों को बढ़ाता है। वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 49 प्रतिशत फेफड़ों की बीमारियों, 33 प्रतिशत फेफड़ों के कैंसर, मधुमेह और हृदय की बीमारियों का 22-22 प्रतिशत और हृदयाघात का योगदान 15 प्रतिशत रहा।
आंकड़ों के मुताबिक स्मोकिंग से भी ज्यादा मौतें वायु प्रदूषण के चलते होती हैं। दुनिया भर में कुपोषण, शराब के सेवन और शारीरिक निष्क्रियता जैसी समस्याओं से ज्यादा मौतें वायु प्रदूषण से होती हैं। वायु प्रदूषण से होने वाली मौतों में 82 फीसदी मामले ऐसे होते हैं, जिनमें लोग नॉन कॉम्युनिकेबल बीमारी का शिकार हो जाते हैं। इन मौतों पर नियंत्रण पाने के लिए जरुरी है की हम सावचेत रहे और ऐसा कोई कदम नहीं उठाये जिससे वायु प्रदूषित होती हो। इसके लिए सरकार के साथ साथ नागरिकों को भी मिलजुल कर प्रयास करने होंगे तभी वायु प्रदूषण का खतरा काम होगा।