वायरल हेपेटाइटिस 16 से 30 की उम्र में अधिक प्रचलित- एसआरएल
July 30, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

नई दिल्ली ।डाॅक्टरों की सबसे पसंदीदा लैब एसआरएल डायग्नाॅस्टिक्स द्वारा हाल ही में वायरल हेपेटाइटिस (ए,बी, सी और ई) पर किए गए विश्लेषण के अनुसार वायरल हेपेटाइटिस के मामले 16 से 30 वर्ष की उम्र में अधिक (49 फीसदी) पाए जाते हैं। एसआरएल के आंकड़ों के अनुसार भारत में पानी से फैलने वाला हेपेटाइटिस ई वायरस का संक्रमण सबसे आम (23 फीसदीे) है। इसके बाद हेपेटाइटिस ए (19 फीसदी) के मामले पाए गए। विश्लेषण के लिए कुल 3978 सैम्पल चुने गए, जिनमें हर सैम्पल में हेपेटाइटिस के चारों वायरस का परीक्षण एवं विश्लेषण किया गया। 
अध्ययन में पता चला कि चारों प्रकार के वायर 16 से 30 आयु वर्ग में सबसे आम हैं। पानी से फैलने वाले हेपेटाइटिस ए वायरस का संक्रमण 16 से 30 आयु वर्ग के व्यस्कों में सबसे ज़्यादा पाया जाता है, इसके बाद हेपेटाइटिस ई वायरस के मामले पाए गए। हेपेटाइटिस ए वायरस 1 से 3 साल के बच्चों में एक्यूट हेपेटाइटिस का सबसे आम कारण है। हालांकि टीकाकरण एवं सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार के चलते बचपन में एचएवी के मामले काफी कम हुऐ है। इसलिए संक्रमण के मामले बचपन के बजाए व्यस्कावस्था में बढ़े हैं।
बीमारी के बारे में विस्तार से बताते हुए डाॅ अविनाश फड़के, प्रेज़ीडेन्ट- टेकनिकल एण्ड मेंटर, एसआरएल डायग्नाॅस्टिक्स ने कहा, ''वायरल हेपेटाइटिस एक प्रकार का संक्रमण है जो लिवर को नुकसान पहुंचाता है। वायरल हेपेटाइटिस के सबसे आम प्रकार हैं- हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और हेपेटाइटिस ई। ये चारों प्रकार के वायरल हेपेटाइटिस अलग- अलग तरीके से फैलते हैं, अलग-अलग वर्गों के लोगों को प्रभावित करते हैं और इनके स्वास्थ्य पर विभिन्न परिणाम होते हैं। हेपेटाइटिस बी वायरस और हेपेटाइटिस सी वायरस मुख्यतया रक्त या टिश्यू फ्लूड के ज़रिए फैलता है और यह क्रोनिक हेपेटाइटिस जैसे लिवर सिरहोसिस और यहां तक कि लिवर कैंसर तक का कारण बन सकता है। वहीं हेपेटाइटिस ई और हेपेटाइटिस ए वायरस की बात करें तो इस प्रकार के संक्रमण में साफ-सफाई और हाइजीन बहुत महत्वपूर्ण हैं। कारण चाहे जो भी हो, सभी स्तरों पर वायरल हेपेटाइटिस का जल्दी निदान और प्रबंधन बहुत ज़रूरी है।'' उन्होंने कहा। 
वायरल हेपेटाइटिस भारत में स्वास्थ्यसेवाओं पर एक बड़े बोझ की तरह है। दुनिया भर में इस बीमारी से पीड़ित 400 मिलियन मरीज़ों के बावजूद हेपेटाइटिस की अनदेखी की जाती रही है। हाल ही के वर्षोंें शहरी एवं अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में लोगों की जीवनशैली और हाइजीन के तरीकों में बड़े बदलाव आए हैं। बड़े शहरों की बात करें तो मुंबई मेें हेपेटाइटिस ई के सबसे ज़्यादा 67 फीसदी पाए गए। इसके विपरीत बैंगलोर और दिल्ली-एनसीआर में हेपेटाइटिस ए (53 फीसदी) ज़्यादा आम है। यह भी पाया गया है कि महिलाओं (18 फीसदी) की तुलना में वायरल हेपेटाइटिस के लिए अधिक संख्या में पुरूषों (28 फीसदी) को पाॅज़िटिव पाया गया।
69वीं विश्व स्वास्थ्य सभा (जेनेवा) में 194 सरकारों ने अगले 13 सालों में हेपेटाइटिस बी और सी के उन्मूलन केे लक्ष्यों के साथ वायरल हेपेटाइटिस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की पहली ग्लोबल हेल्थ सेक्टर स्टैªटेजी ;2016.2021द्ध को अपनाया है। इसके मद्देनज़र 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लिए अपनी तरह के पहले विश्वस्तरीय अभियान ष्छव्ीमचष् का लाॅन्च किया गया। एसआरएल 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस के उन्मूलन के लक्ष्यों में योगदान देने के लिए इस विषय पर जागरुकता बढ़ाने तथा रोकथाम, निदान एवं उपचार को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय है।

एक आधुनिक क्लिनिकल रेफरेन्स लैबोरेटरी होने के नाते एसआरएल को स्क्रीनिंग एवं डायग्नाॅस्टिक्स दोनों प्रयोजनों के लिए सैम्पल मिले हैं। इसलिए उम्मीद की जाती है कि वायरल हेपेटाइटिस के सांख्यिकी विश्लेषण में पक्षपात रहित आंकड़े प्रस्तुत किए जाए। इन परिणामों का इस्तेमाल सामान्य आबादी में हेपेटाइटिस के मामलों के विश्लेषण के लिए नहीं किया जा सकता।