वैश्विक मंच से मानवता का सन्देश
September 28, 2019 • बाल मुकुंद ओझा

(बाल मुकुंद ओझा)

भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने समूची दुनियां को जता दिया की भारत शांति और अहिंसा का पुजारी है। इस देश के महापुरुषों ने सदा सर्वदा संसार को मानवता का पाठ पढ़ाया है। हमारे देश में अनेक ऐसे महापुरूष हुए हैं जिनके जीवन और विचारों से प्रेरणा लेकर देश आगे बढ़ा है। 
 मोदी ने शुक्रवार को न्यूयार्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में अपनी बात की शुरुआत महात्मा बुद्ध के संदेश से और अंत स्वामी विवेकानंद के शांति और सद्भाव के मंत्र से किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष पूरा विश्व महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहा है। सत्य और अहिंसा का उनका संदेश आज भी विश्व के लिए प्रासंगिक है। पड़ौसी पाक की नापाक हरकतों पर बिना नाम लिए मोदी ने कहा हमने दुनिया को युद्ध नहीं, बुद्ध दिए हैं। इसलिए हमारी आवाज में आतंक के खिलाफ दुनिया को सतर्क करने की गंभीरता है, साथ-साथ आक्रोश की भी है।
यह उल्लेखनीय है आज की युवा पीढ़ी महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद के बारे में तो जानती है मगर बुद्ध के बारे में उसे ज्यादा जानकारी नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री बुद्ध के माध्यम से दुनियां को क्या सन्देश देना चाहते है इस पर गौर फरमाने की जरुरत है। महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक और महान समाज सुधारक थे। इनका वास्तविक नाम सिद्धार्थ था। गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले शाक्य गणराज्य की राजधानी कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी में हुआ था। गौतम ही बाद में  बुद्ध के नाम से देश और दुनियां में जाने गए । गौतम बुद्ध पूरी दुनिया के ऐसे महापुरुषों में शामिल रहे, जिन्होंने पूरी मानवजाति पर अपनी छाप छोड़ी। 
गौतम बुद्ध संन्यासी बनने से पहले कपिलवस्तु के राजकुमार सिद्धार्थ थे। लोगों के दुखों को देखकर  युवावस्था में  वे अपना घरबार और राजपाट छोड़कर शांति की खोज में निकल गए । भ्रमण करते हुए सिद्धार्थ काशी के पास  सारनाथ पहुंचे, जहां उन्होंने धर्म परिवर्तन किया। इसके बाद बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे कठोर तप किया। कठोर तपस्या के बाद सिद्धार्थ को बुद्धत्व की प्राप्ति हुई और वह महान संन्यासी गौतम बुद्ध के नाम से प्रचलित हुए।  अपने ज्ञान से समूचे विश्व को प्रकाशमान किया।
ऐतिहासिक पुस्तकों के मुताबिक बुद्ध ने जब अपने समय काल की जनता को सामाजिक कुरीतियों में फंसा देखा तो वे बहुत दुखी हुए। लोगों को धर्म के नाम पर अज्ञान में पाया, नारी को अपमानित होते देखा, शुद्रों के प्रति अत्याचार होते देखे तो उनका मन जनता के लिए उद्वेलित हो उठा।  उन्होंने स्वयं प्रथम ज्ञान-प्राप्ति का व्रत लिया और वर्षों तक वनों में घूम-घूम कर तपस्या करके आत्मा को ज्ञान से आलोकित किया। उन्होंने जीवन के प्रत्येक क्षण को जिस चैतन्य एवं प्रकाश के साथ जिया, वह भारतीय ऋषि परंपरा के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है। स्वयं ने सत्य की ज्योति प्राप्त की, प्रेरक जीवन जिया और फिर जनता में बुराइयों के खिलाफ आवाज बुलन्द की।  गौतम बुद्ध ने लगभग 40 वर्ष तक घूम घूम कर अपने सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया। वे उन शीर्ष महात्माओं में से थे जिन्होंने अपने ही जीवन में अपने सिद्धांतों का प्रसार तेजी से होता और अपने द्वारा लगाए गए पौधे को वटवृक्ष बन कर पल्लवित होते हुए स्वयं देखा। गौतम बुद्ध ने बहुत ही सहज वाणी और सरल भाषा में अपने विचार लोगों के सामने रखे। अपने धर्म प्रचार में उन्होंने समाज के सभी वर्गों, अमीर गरीब, ऊंच नीच तथा स्त्री-पुरुष को समानता के आधार पर सम्मिलित किया।
प्रधानमंत्री  मोदी ने नए भारत की चर्चा करते हुए कहा भारत की हजारों साल पुरानी  संस्कृति है, जिसकी अपनी जीवंत परंपराएं हैं। हमारे संस्कार, हमारी संस्कृति जीव में शिव देखती है। इसलिए हमारा प्राण तत्व है, जनभागीदारी से जनकल्याण। यही नहीं हम जन कल्याण से जग कल्याण तक की बात करते हैं। मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक मंच से  विश्व को महात्मा बुद्ध और स्वामी विवेकानंद के सन्देश को आत्मसात कर  शांति, सद्भावना और मानवता के मार्ग का अनुसरण करने की आवश्यकता पर जोर दिया।