साक्षरता और बहुभाषावाद पर दुनिया करेगी चर्चा 
September 7, 2019 • बाल मुकुन्द ओझा

(बाल मुकुन्द ओझा)

निरक्षरता अंधेरे और साक्षरता प्रकाश के समान है। आठ सितंबर 2019 को निरक्षरता के अँधेरे को समाप्त करने के संकल्प के साथ विश्व में 53वां अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है। इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2019 की थीम साक्षरता और बहुभाषावाद पर केंद्रित होगी। एक जानकारी के अनुसार अभी भी दुनिया भर में 800 मिलियन वयस्क न तो पढ़ सकते हैं और न ही लिख सकते हैं। इनमें अधिकांश महिलाएं है जिनके पास न्यूनतम साक्षरता कौशल की कमी है। साठ मिलियन से अधिक बच्चे स्कूल से बाहर हैं और बहुत से बीच में पढाई छोड़ देते है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2019 के अवसर पर, आज की वैश्वीकृत और डिजिटल दुनिया में बहुभाषावाद की मुख्य विशेषताओं पर चर्चा की जाएगी। साथ ही बहुभाषी संदर्भों में अधिक समावेश को प्राप्त करने के लिए नीतियों और व्यवहार में साक्षरता के बहुआयामी प्रस्तावों को क्रियान्वित किया जायेगा।
यह थीम समाज, सरकार और विभिन्न संस्थाओं के लिए साक्षरता की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करने और निर्णय लेने के अवसर के रूप में शामिल की गई है। वर्तमान में दुनिया में कई भाषाएं प्रचलित हैं और विभिन्न सर्वे रिपोर्ट बताती हैं कि आज सात हजार 97 भाषाएं प्रचलन में हैं और उन सभी में से दो हजार भाषाओं का इस्तेमाल एक हजार से भी कम लोग करते हैं। इसके अलावा  दुनिया की आधी प्रचलित भाषाएं इसके लिखित रूप को देखती हैं जो 46 अक्षरों का उपयोग करती हैं। बाकी का उपयोग मौखिक रूप से किया जाता है। कोलंबिया विश्वविद्यालय भाषा केंद्र का कहना है कि हर दो सप्ताह में एक भाषा मर जाती है। इस परिप्रेक्ष्य में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के विषय को नए सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है। 
 देश-दुनिया से गरीबी को जड़मूल से हटाने, आबादी के विस्फोट को रोकने के साथ जन जन तक लोक कल्याणकारी कार्यों को पहुँचाने के लिए यह बहुत जरूरी है की प्रत्येक व्यक्ति साक्षर हो। साक्षरता केवल शिक्षा का उजाला ही नहीं फैलाता अपितु मानव के सुखमय जीवन का मार्ग भी प्रशस्ति करता है। शिक्षा मानव के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाता है। यह किसी देश को तरक्की और विकास के रास्ते पर ले जाने की बुनियाद है। साक्षरता के साथ ज्ञान एवं कौशल विकास भी जरूरी है। साक्षरता और कौशल विकास का चोली दामन का साथ है। साक्षरता की सफलता रोजगार से जुडी है। हम साक्षर व्यक्ति को रोजी रोटी की सुविधा सुलभ करा कर देश से निरक्षरता के अँधेरे को भगा सकते है। हालाँकि केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न स्तरों पर कौशल विकास के कार्यक्रम संचालित कर रही है मगर जब तक ऐसे व्यक्ति अपने पैरों पर खड़े नहीं होंगे तब तक साक्षरता अभियान को पूर्ण रूप से सफल नहीं माना जा सकता।                                                                   
साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना-लिखना या शिक्षित होना ही नहीं है। यह लोगों में उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूकता लाकर सामाजिक विकास का आधार बन सकती है। इसका सामाजिक एवं आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। साक्षरता का कौशल मानव में आत्मविश्वास का संचार करता हैै। गरीबी उन्मूलन में इसका महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है। महिलाओं एवं पुरुषों के बीच समानता के लिए जरूरी है कि महिलाएं भी साक्षर बनें। जीने के लिये खाने की तरह ही साक्षरता भी महत्वपूर्णं है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने का उद्देश्य व्यक्ति, समुदाय तथा समाज के हर वर्ग को साक्षरता का महत्व बताकर उन्हें साक्षर करना है। 
साक्षरता एवं शिक्षा में बहुत बड़ा अंतर है। साक्षरता का आधार शिक्षा अर्जित करना होता है और शिक्षा का आधार ज्ञान। एक व्यक्ति बिना साक्षर हुए भी शिक्षित हो सकता है।  साक्षरता एक मानव अधिकार है, सशक्तिकरण का मार्ग है और समाज तथा व्यक्ति के विकास का साधन है। लोकतंत्र की सुनिश्चितता के लिए साक्षरता आवश्यक है। वर्ष 2010 में जब बच्चों के लिए निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का कानून 2009 लागू हुआ, यह देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। सभी के लिए प्रारंभिक शिक्षा की दिशा में देश के प्रयासों को इस कानून के लागू होने से जबर्दस्त बढ़ावा मिला। आज शिक्षा का अर्थ केवल साक्षरता से लिया जाता है, आर्थिक प्रगति के लिए शिक्षा जरुरी है साक्षरता नहीं। शिक्षित व्यक्ति अपनी आय का साधन बढ़ा सकता है और आये हुए धन को सहेज कर अमीर भी बन सकता है परन्तु साक्षर व्यक्ति ये काम नहीं कर सकता। यहाँ शिक्षा और साक्षरता का अंतर समझना बहुत जरुरी है. शिक्षा का अर्थ है किसी उपयोगी कल को सीखना जबकि साक्षरता केवल मात्र अक्षर ज्ञान है।