सिक्खी को बढ़ावा देने के लिए पंजाबी भाषा का विकास जरुरीः सिरसा
June 24, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

नई दिल्ली।दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष स. मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा है कि पंजाबी भाषा के विकासके साथ ही सिक्खी को बढ़ावा दिया जा सकता है।उन्होंने यह विचार आज यहां करोल बाग के गुरुद्वारा सिंह सभा में पंजाबी प्रमोशनफोरम द्वारा आयोजित एक ईनाम वितरण समारोह को संबोधन करते हुए प्रकट किए।

उन्होंने फोरम द्वारा किये जा रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज के युग में जब नई पीढी पंजाबी भाषा से दूर हो रही है तो इस समय पंजाबी भाषा का विकास करके ही सिक्खी को बढ़ावा दिया जा सकता है और नई पीढी को पंजाबी के साथ जोड़ा जा सकता है।स. सिरसा ने कहा कि अगर हमारे बच्चे गुरमुखी को भूल जायेंगे तो वह अपने इतिहास को भूल जायेंगे और गुरु ग्रंथ साहिब की इल्लाहीबाणी को पढ़ने व समझने मे स्मर्थ नहीं होंगे। इसलिए हमारा फर्ज बनता है कि पंजाबी भाषा का ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार कियाजाये।

उन्होंने यह भी बताया कि सिक्ख पंथ के 300 वें स्थापना दिवस के मौके पर स. वरिंदरजीत सिंह बिट्टु ने पंजाबी प्रमोशन फोरम बना करपंजाबी भाषा पढ़ाने का  कार्य शुरु किया था और उसे 20 साल हो गये हैं। इन्होंने केवल सिक्खों को ही नहीं बल्कि देश भर में हर धर्म केलोगों को पंजाबी भाषा का ज्ञान देने का नेक कार्य लगातार करते आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुझे यह बात जानकर बहुत खुशी हुई है किइस संस्था से पंजाबी का ज्ञान लेकर वह महिलाएं बच्चों को पंजाबी पढ़ा रही हैं जो पंजाबी बिल्कुल नहीं जानती थीं और दूसरे धर्मों सेसबंधित हैं। इसलिए पंजाबी फोरम बधाई की पात्र है। दिल्ली कमेटी अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली सिक्ख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारापंजाबी प्रमोशन फोरम जैसी संस्थाओं की मदद से श्री गुरु नानक देव जी के 550 वे प्रकाश पर्व को समर्पित पंजाबी भाषा के प्रचार काप्रोग्राम शुरु कर रही है जिस से दिल्ली के हर घर तक पंजाबी भाषा को पहुंचाया जायेगा।

 दिल्ली कमेटी महासचिव स. हरमीत सिंह कालका ने कहा कि आज समय की जरुरत है कि हम सभी पंजाबी भाषाके प्रसार के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि हम सब को घरों में अपने बच्चों के साथ पंजाबी बोलने की आदत डालनी चाहिए।इस समय स. सिरसा और स. कालका के अलावा बीबी रणजीत कौर, स. जतिंदरपाल सिंह गोलडी, हरजीत सिंह पप्पा, मनजीत सिंह औलख और बड़ी गिनती में सिक्ख संगत ने भाग लिया।