आरसीईपी समझौते पर सरकार का ठोस रूख व्यापार एवं उद्योग के लिए एक बड़ा कदम-कैट 
November 6, 2019 • प्रथम स्वर ब्यूरो

नई दिल्ली। कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को भेजे एक पत्र में बैंकॉक शिखर सम्मेलन में आरसीईपी के मामले में घरेलू व्यापार और वाणिज्य के हितों को बनाए रखने के लिए उनके द्वारा अपनाये गए दृढ रूख की सराहना की है। कैट ने कहा की आरसीईपी वार्ता के तहत प्रधान मंत्री द्वारा उठाए गए स्टैंड को भारत सरकार का एक और ऐतिहासिक कदम कहा जो निश्चित रूप से देश में स्वदेशी व्यापार और वाणिज्य को 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को हासिल करने के लिए और अधिक प्रोत्साहित करेगा। सरकार का यह ठोस कदम  खुदरा व्यापारए खेती के क्षेत्र, डेयरी उद्योग, इस्पात और रसायन उद्योग, फार्मास्यूटिकल्स छोटे विनिर्माण क्षेत्र और बड़ी संख्या में घरेलू उत्पादकों के लिए एक बहुत बड़ा समर्थन है !

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी सी बह भरतिया और महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने शिखर सम्मेलन में प्रधान मंत्री के उस बयान की सराहना की जिसमें उन्होंने कहा की मैं सभी भारतीयों के हितों के संबंध में आरसीईपी समझौते को मापता हूं मुझे सकारात्मक जवाब नहीं मिलता है। इसलिए न तो गांधीजी की सीख और न ही मेरा विवेक मुझे आरसीईपी में शामिल होने की अनुमति देता है! प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान घरेलू व्यापार वाणिज्य और उद्योग के हितों के बारे में उनकी और सरकार की चिंताओं और प्राथमिकताओं को स्पष्ट शब्दों में में रेखांकित  करता है और स्पष्ट करता है की सरकार भारत के हितों से कोई समझौता नहीं करेगी भरतिया एवं  खंडेलवाल ने कहा की वर्ष 2012 में भारत के आरसीईपी से जुड़ने के बाद  भारत ने आसियान देशों के लिए  बाजार खोला लेकिन इंडोनेशिया जैसे देश ने भारत के लिए अपने बाजार को कहीं कम खोला जो अस्वीकार्य है और बराबरी के दर्ज़े के सिद्धांत के विरूद्ध है ! आरसीईपी के तहत भारत के हितों को कभी भी पहले  गंभीरता से नहीं लिया गयाए जिससे देश को नुकसानदेह स्थिति में डाल दिया गया ! कैट ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पियूष गोयल को भी एक पत्र भेजकर इस मुद्दे पर व्यापारियों की चिंताओं को समझने एवं उनके हितों की रक्षा करने के लिए उनकी सराहना की है !

कैट ने कहा कि यह पहली बार है कि आरसीईपी वार्ता के तहत भारत ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शिखर सम्मेलन में दृढ़ और मजबूत इच्छाशक्ति का प्रदर्शन किया हैए जिसने आरसीईपी देशों और दुनिया के लिए एक पर्याप्त संकेत दिया है कि भारत अपने हितों के विरुद्ध कोई भी समझौता नहीं करेगा। आरसीईपी अथवा किसी अन्य समझौते के तहत भारत की मुख्य चिंताओं को संबोधित किए बिना कोई भी ताकत भारत को  समझौते के लिए मजबूर नहीं कर सकती ! कैट ने कहा की देश का संपूर्ण व्यावसायिक समुदाय एकजुटता के साथ सरकार के साथ खड़ा है और देश में घरेलू व्यापार और वाणिज्य की वृद्धि के लिए निश्चित रूप से अधिक काम करेगा।

कैट ने प्रधान मंत्री से अन्य मुक्त व्यापार समझौतों एफटीए पर हितधारकों के साथ बातचीत के एक नए युग की शुरुआत करने का आग्रह किया हैं ताकि हितधारकों के मुद्दों और चिंताओं को अच्छी तरह से संबोधित किया जा सके। उन्होंने प्रधानमंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए घऱेलू व्यापार और लघु उद्योग की  क्षमताओं का अधिकतम उपयोग करने के लिए तथा इन   क्षेत्रों को अधिक प्रतिस्पर्धी और सक्षम बनाने के लिए सरकार कुछ समर्थन नीतियों के विषय में विचार करे और प्रौद्योगिकी सहायता देने की हरसंभव कोशिश की जाए !

कैट ने प्रधानमंत्री का ध्यान भारत के अत्यधिक विषाक्त ई.कॉमर्स बाजार की ओर आकर्षित किया है  जिसमें कानून और नीति की धज्जियां उड़ाकर तथा अनैतिक और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के माध्यम से कुछ प्रमुख ई.कॉमर्स कंपनियों अपना असमान प्रभुत्व जमाये हुए है। उन्होंने कहा की हम उम्मीद करते हैं कि आरसीईपी में सरकार ने जिस प्रकार से ठोस कदम उठाया है उसी प्रकार से एक ठोस स्टैंड भारतीय ई.कॉमर्स बाजार के लिए भी लिया जाना चाहिए और किसी को भी देश की  नीति और कानून का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि ई.कॉमर्स का भारत में उज्ज्वल भविष्य है।उन्होंने यह भी कहा की प्रधानमंत्री के डिजिटल  इंडिया के दृष्टिकोण को समयबद्ध तरीके से लागू करने  के लिए सरकार देश के 7 करोड़ छोटे व्यवसायों के डिजिटलीकरण में सहायता करे !