डायबिटीज एक बीमारियां अनेक
May 20, 2020 • बाल मुकुन्द ओझा

(बाल मुकुन्द ओझा)

कोरोना वायरस का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में डायबिटीज से पीड़ित लोगों के लिए भी कुछ खास बातों का विशेष ध्यान रखना जरूरी है, जो इन्हें कोविड - 19 के संक्रमण से बचाने में मदद कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरी दुनिया में करीब 400 मिलियन से भी ज्यादा लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलता देख डायबिटीज के मरीजों के लिए भी कुछ जरूरी गाइडलाइंस जारी की गई हैं। यह गाइडलाइंस विश्व स्वास्थ्य संगठन ने जारी की है, जिनमें डायबिटीज के मरीजों को संक्रमण से बचने के लिए कुछ जरूरी बातों को बताया गया है। दरअसल, ऐसे लोगों की स्वास्थ्य समस्या को ध्यान में रखते हुए या देखा गया कि ऐसे रोग से पीड़ित होने के कारण इन्हें संक्रमण होने के बाद तेजी से अन्य कई प्रकार की समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए उन्हें कुछ खास सावधानियां बरतने के लिए कहा गया है। इनमें भीड़भाड़ वाली जगह में जाने से बचने, लोगों से न मिलेने,  नियमित जाँच कराने आदि शामिल है। 
 कोरोना वायरस के संक्रमण का ज्यादातर प्रभाव प्रतिरोधक क्षमता कम वाले व्यक्तियों पर पड़ता है. यह प्रतिरोध क्षमता कम करने में इस रोग की बड़ी भूमिका होती है, ऐसे में जिसे भी इस तरह की दिक्कत हो, वह इस संक्रमण काल में बेहद सतर्क रहे।  मधुमेह से पीड़ित रोगियों को इस समय ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. इस रोग से ग्रसित लोगों को हल्का व आधा पेट भोजन करना चाहिए।
मधुमेह या डाइबिटीज जिसे बोलचाल की भाषा में शुगर भी कहा जाता है आखिर है क्या जिसकी चर्चा आजकल घर घर में सुनी जा रही है। बच्चे से बुजुर्ग तक हर आयु का व्यक्ति इस बीमारी का शिकार हो रहा है। अस्पतालों और जाँच केंद्रों पर मधुमेह के रोगी बड़ी संख्या में देखे जा रहे है। भारत में हर पांचवें व्यक्ति को इस बीमारी ने घेर रखा  है। स्वस्थ व्यक्ति में खाने के पहले ब्लड में ग्लूकोस का लेवल 70 से 100 एमजी डीएल  रहता है। खाने के बाद यह लेवल 120-140 एमजी डीएल हो जाता है और फिर धीरे-धीरे कम होता चला जाता है। मधुमेह हो जाने पर यह लेवल सामन्य नहीं हो पाता और बढ़ता जाता है। मधुमेह एक गंभीर मेटाबॉलिक रोग है जो अग्नाशय द्वारा इंसुलिन कम उत्पन्न करने या इंसुलिन न उत्पन्न कर पाने की स्थिति में होती है। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन को पचाने के लिए आवश्यक है। इंसुलिन का काम ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं में पहुंचाना है। पर्याप्त इंसुलिन के बिना ग्लूकोज शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश नहीं कर पाता है, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है, इसे ही डायबिटीज या मधुमेह कहते हैं। बार-बार पेशाब लगना, ज्यादा प्यास और भूख लगना, जल्दी थकान और आखों की रोशनी कम होना, घावों का जल्दी नहीं भरना, अंगुलियों व पैर के अंगूठे में दर्द रहना, वजन कम होना, कमजोरी व अनिद्रा का शिकार होना आदि मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं।
 मधुमेह पहले अमीरों की बीमारी मानी जाती थी, लेकिन आज इसने हर उम्र और आय वर्ग को अपनी चपेट में ले लिया है। एक दशक पहले भारत में मधुमेह होने की औसत उम्र 40 साल थी, जो अब 25-30 साल हो चुकी है।  भारत में मधुमेह रोगियों की स्थिति पर नजर डाले तो आकड़े बेहद भयानक और चैकाने वाले हैं। 1991 में भारत में मधुमेह रोगियों की संख्या 2 करोड़ के आस-पास थी जो 2006 में बढ़कर 4 करोड़ 20 लाख हो गईं।  भारत में 2015 में लगभग 7 करोड़ लोग इससे पीडित थे। 2018 में यह संख्या आठ करोड़ को पार कर गई । अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में मधुमेह रोगियों की संख्या 2030 तक 55 करोड़ पार कर जाएगी।
भारत को मधुमेह की खान कहा जाता है। मधुमेह रोग वैश्विक और गैर. संचारी महामारी का रूप धारण कर चुका है। भारत में व्यस्त एवं भागमभाग वाली जिंदगी, खानपान की खराबी तनावपूर्ण जीवन, स्थूल जीवन शैली, शीतल पेय का सेवन, धूम्रपान, व्यायाम कम करने की आदत और जंक फुड का अधिक सेवन, मोटापा के कारण मधुमेह का प्रकोप बढ़ रहा है। बच्चों का अब खेलकूद के प्रति रूझान घटना और मोबाइल कंप्यूटर खेलों की तरफ बढ़ना टीवी से चिपके रहना और जंक फूड खाने से बच्चे भी इस रोग के शिकार हो रहे हैं। 
मधुमेह वर्तमान में हमारी जिंदगानी का एक अहम् हिस्सा बन गयी है। यदि आपको मधुमेह है तो इससे  डरने की कोई जरूरत नहीं है। जरूरत है तो सावधानी और सजगता की। खानपान और अपनी लाइफ स्टाइल में बदलाव की। आप डरेंगे तो यह आपको डराएंगी। मगर आप सावचेत रहे तो इसका मुकाबला आसानी से कर अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकेंगे।