मुगलिया सल्तनत की कारीगरी का बेजोड़ नमूना है लाल किला
May 12, 2020 • बाल मुकुन्द ओझा

(बाल मुकुन्द ओझा)

13 मई का दिन भारत के इतिहास का अहम दिन है। विश्व विख्यात लाल किले का निर्माण कार्य आज ही के दिन यानि 13 मई 1648 में पूरा हुआ। भारत में घूमने के लिए कई जगह हैं उन्ही में से एक आकर्षण का केंद्र है दिल्ली का  लाल किला। लाल किला राष्ट्रीय महत्व की इमारत तो है ही, यूनेस्को ने भी इसे 2007 में विश्व धरोहर घोषित कर दिया है। लाल किला, नेताजी सुभाष मार्ग पर विश्व प्रसिद्ध चांदनी चैक में पुरानी दिल्ली में स्थित है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस समारोह लाल किले से ही मनाया जाता है। 
 लाल किले का निर्माण 1648 में पाँचवे मुगल साम्राज्य शाहजहाँ ने अपने महल के रूप में बनवाया था। लाल किले को आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद लाहौरी ने डिजाईन किया था और उन्होंने ने ही ताज महल का भी निर्माण किया था। यह किला 2.4 किलोमीटर की चारदीवारी में बना हुआ है। किले का निर्माण 254.67 एकड़ क्षेत्रफल में हुआ है। किले की सुरक्षा को देखते हुए नदी की तरफ से चारदीवारी 18 मीटर ऊंची बनाई, जबकि अन्य सभी तरफ किले की दीवार 33 मीटर ऊंची बनाई गई।
 देश में मौजूद सभी किलों में से लाल किला सबसे ज्यादा मशहूर है। देश विदेश से लोग इस किले को देखने के लिए आते हैं। दिल्ली ही नहीं देश और दुनिया की शान ‘लाल किला’ अपनी शान-शोहरत के लिए पूरी दुनिया में प्रख्यात है। लाल किले में कई प्रमुख इमारते हैं जिनमें दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास के अलावा मोती मस्जिद, हीरा महल, रंग महल, खास महल और हयात बख्श बाग समेत 15 प्रमुख स्थल हैं। खास वास्तुकला को दर्शाती ये इमारतें दर्शकों को आकर्षित करती हैं। दिल्ली की सलतनत पर 200 सालों से ज्यादा राज करने वाले मुगल साम्राज्य ने लाल किला से अपनी पूरी सल्तनत को संभाला। यह दिल्ली के बीचों बीच स्थित है, जहाँ अब देखने योग्य बहुत से संग्रहालय है।  यह एतिहासिक कलाकृति है, जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग भी आते है। 1648 में इसे बनाया गया, और उस समय मुगल साम्राज्य  के पांचवें मुगल शासक शाहजहाँ का राज्य था। उस दौरान दिल्ली को शाहजहांनाबाद कहा जाता था। लाल किले को लाल पत्थर से बनाया गया था, इसलिए इसे लाल किला कहा गया। यहाँ का गार्डन, महल, दीवारे खास, सब कुछ बहुत सोच समझ कर बनाया गया है। यहाँ भारत की अलग अलग संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। लाल किला दिखने में बेहद आकर्षक लगता है। यह किला दिल्ली की शान है। लाल किले को अष्टकोणीय आकार में बनाया गया है। इस पूरे किले पर संगमरमर से सजावट की गई है। कोहिनूर हीरा कभी इस किले की सजावट का हिस्सा हुआ करता था लेकिन भारत में कब्जा करने के बाद इसे अंग्रेज ले गए। लाल किले के अंदर तीन द्वार हैं और यह किला दिल्ली के सबसे बड़े किलों में से एक है। पारसी, यूरोपियन और भारतीय कलाकारी का अद्भुत नमूना था यह किला।
कभी इस किले में तीन हजार  लोग रहा करते थे, लेकिन सन् 1739 में इस किले पर फारस के बादशाह नादिर शाह ने आक्रमण कर दिया। इस आक्रमण में वो अपने साथ इस किले से स्वर्ण मयूर सिंहासन को ले गया था। जिसके बाद सन् 1857 में इस किले पर ब्रिटिश साम्राज्य ने कब्जा कर लिया। ब्रिटिश शासन में इसे ब्रिटिश सेना का मुख्यालय बनाया गया था।