नेता सदन कटारिया ने बाँटा शालीमार बाग के  300 लोगों को राशन
May 16, 2020 • Rakesh Raman
दिल्ली। आज उत्तरी दिल्ली नगर निगम के नेता व वार्ड नं. 63, शालीमार  बाग (साउथ) के क्षेत्रीय पार्षद तिलक राज कटारिया ने अपने वार्ड के बी.एन. वेस्ट ब्लाॅक स्थित एवरबेक मार्केट के अंदर 300 गरीब व जरूरतमंद लोगों के बीच कच्चा राशन का वितरण किया।
 
इसकी जानकारी देते हुए कटारिया ने बताया कि “ हम प्रत्येक लाॅकडाउन की अवधि में 300 से 500 गरीब व जरूरतमंदों लोगों को कच्चा राशन बांटते रहे हैं। लाॅकडाउन-3, 17 मई को खत्म हो रहा है, इस अंतिम कड़ी में आज हमने एवरबेक मार्केट के अंदर 300 गरीब व जरूरतमंद लोगों को कूपन के माध्यम से कच्चा राशन वितरित किया जहां गोले लगाकर सोशल डिस्टेन्सिंग का पूरी तरह से पालन किया गया। इसके लिए एक दिन पूर्व स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी सूचना दी गयी थी जिसके बाद कुछ पुलिस कर्मियों को वहां ड्यूटी पर तैनात किया गया था।” 
 
उन्होंने कहा कि “राशन वितरण के दौरान सर्वप्रथम सभी लोगों की Infrared Thermometer स्क्रीनिंग यंत्र से तापमान जांच करने के बाद उनका हैंड सैनीटाईजिंग भी कराया गया। साथ ही लोगों को मास्क भी दिये गये।सभी 300 लोगों को हमने चावल, आटा, 2 प्रकार की दाले व सरसों का तेल वितरित किया।
 
उन्होंने अंत में बताया कि इस कार्य को समाप्त कर हम वहां से निकल ही रहे थे कि आम आदमी पार्टी समर्थित कुछ लोगों ने खाना वितरण केन्द्र पर यह अफवाह फैला दी कि एवरबेक मार्केट के अंदर राशन का वितरण हो रहा है। जिसे सुनकर बहुतायत संख्या में लोग भीड़ के साथ दौड़ते हुए उक्त मार्केट की ओर आने लगे और राशन देने की मांग करने लगे तो हमने उन लोगों से कहा कि हमने कूपन के माध्यम से 300 लोगों को सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन करते हुए राशन बांट दिया है। 
 
कटारिया ने कहा कि “आम आदमी पार्टी के लोगों ने उनको भड़काकर यहां भीड़ दिखाने की कोशिश की ताकि लोगों को लगे कि यहां सोशल डिस्टेन्सिंग का कोई पालन नहीं किया गया है जबकि हमारा राशन वितरण का काम पहले समाप्त हो गया था। “ 
कटारिया ने रोष व्यक्त किया कि “आम आदमी पार्टी ने गरीब लोगों को गुमराह कर एक निंदनीय कृत्य किया है। हमने कार्यक्रम से पहले और बाद में भी सैनीटाईजेशन कार्य को पूरा कराया था। दोपहर की गर्मी को देखते हुए पर्दे की सीलिंग भी लगा दी गयी थी ताकि लोग गर्मी व धूप से परेशान न हों।”
संकट के घड़ी में कटारिया के इस पुनीत कार्य को देखकर राशन लेने वाले लोग उनकी काफी प्रशंसा व धन्यवाद दे रहे थे। लोग जाते हुए यह कह रहे थे कि जहां वे काम करते हैं वहां के मालिक ने या मंदिर व गुरूद्वारे वाले लोग ही खाना देते हैं या आपसे हमें राशन मिलता है बाकि हमें कहीं से भी कोई सहयोग नहीं मिलता है।
 

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