राम मंदिर फैसला: देश बोला एक सुर में जय श्री राम
November 9, 2019 • देवानंद राय
(देवानंद राय)
आखिरकार देश के सबसे पुराने सबसे चर्चित तथा राजनीतिकरण द्वारा सबसे जटिल बनाए गए केस का फैसला आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाते हुए आ ही गया फैसला कुछ वैसा ही था जिसका अनुमान, इंतजार और ख्वाब सबका एक समान ही था इस देश में राम सिर्फ एक धर्म का परिचायक नहीं है वे पूरे मानव को मर्यादा में रहकर उत्तम बनने के परिचायक भी हैं यही कारण है कि उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है इस ऐतिहासिक फैसले पर नजर डालें तो हमें पता चलता है कि निर्मोही अखाड़ा को सेवा आयत का अधिकार नहीं दिया गया बाबर के समय मीर बाकी ने मस्जिद बनवाई 1949 में दो मूर्तियां रखी गई थी अंग्रेजों के समय 18वीं सदी तक यहां नमाज होने का कोई सबूत नहीं मिला मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही पांच एकड़ जमीन दी जाने की बात कही गई है तथा विवादित स्थल राम जन्मभूमि न्यास को दिया जाए अगले तीन महीने में ट्रस्ट बने और ट्रस्ट के द्वारा मंदिर स्थापित हो जिसमें निर्मोही अखाड़ा जो 150 साल पुराना है उसको भी प्रतिनिधित्व मिले यह कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले की कुछ मुख्य बिंदु थे। 500 साल पुराने विवाद को 1045 पन्नों में समेटकर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई का नाम इतिहास में दर्ज हो गया।पर  ऐतिहासिक फैसले ने अनेक नेताओं को टीवी डिबेट से बेरोजगार किया तो वही बात बात पर सेकुलरिज्म की दुहाई देने वाले और हर मुद्दे में हिंदू-मुस्लिम का ऐंगल ढूंढने वाले लोगों के भी दिन लद चुके हैं इस फैसले में हम सभी देशवासियों की भावनाएं जुड़ी हुई है पर फैसले को यहां तक पहुंचाने में सबूतों की अहम कड़ीओं ने भी शानदार काम किया आज फिर से पूर्व मानव संसाधन मंत्री मुरली मनोहर जोशी द्वारा कराई गई पुरातात्विक खुदाई ही फैसले के मुख्य बिंदुओं में शामिल हुई मुरली मनोहर जोशी भारत के पूर्व गृह मंत्री भी रह चुके हैं अटल जी के कार्यकाल में। इन्होंने स्पेक्ट्रोस्कोपी पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट भी किया इनके नाम एक खास उपलब्धि भी दर्ज है प्रथम व्यक्ति हैं जिन्होंने भौतिक विज्ञान हिंदी में शोध पत्र प्रकाशित किया था जैसा फैसला सुप्रीम कोर्ट ने अभी दिया है कुछ ऐसा ही फैसला राम मंदिर पर युवा तुर्क के नाम से मशहूर चंद्रशेखर जी के कार्यकाल में भी आया था देश के आठवें प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी का जन्म 1 जुलाई 1927 को हुआ था चंद्रशेखर जी 1990 से 1991 के बीच प्रधानमंत्री रहे इन से पूर्व सातवें प्रधानमंत्री के रूप में वीपी सिंह थे तथा इनके बाद नौवें प्रधानमंत्री के रूप में पीवी नरसिम्हा राव जी चंद्रशेखर जी के कार्यकाल में ही चौधरी देवीलाल को उप प्रधानमंत्री भी बनाया गया उस वक्त राष्ट्रपति पद पर आर वेंकटरमन थे फैसले में यह कहा गया कि विवादित स्थल पर भव्य राम मंदिर हो तथा सरयू के उस पार मस्जिद हो लेकिन सालों से विदेशी फंड पर जिंदा रहने वाले तथाकथित बुद्धिजीवी और कुछ शांति दूतों को यह कहां से सुहाता कि राम मंदिर पर सही और स्पष्ट फैसला है हर बार माहौल खराब होने की धौंस दिखाकर फैसले मे टांग अड़ाते रहे और सरकार भी वोट बैंक खराब होने के चक्कर में उनके हां में हां मिलाती रही पर इस फैसले ने एकदम दूध का दूध पानी का पानी कर दिया है पर विवादित 2.27 एकड़ जमीन के बदले पांच एकड़ देना थोड़ा कचोटा जरूर है अब देखना यह है कि जो कहा करते थे कि मंदिर की जगह हॉस्पिटल और यूनिवर्सिटी बनाओ अब पांच एकड़ दिया है देख लेते हैं क्या बनता है ? यह वर्ष भारत के इतिहास में हमेशा के लिए स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा इसी वर्ष अगस्त में हमने नासूर बन चुके अनुच्छेद 35ए तथा अनुच्छेद 370 को खत्म कर पूरे भारत को एक सूत्र में जोड़ा और कश्मीर से कन्याकुमारी तक वाले नारे को जीवंत कर दिखाया तो वहीं इसी वर्ष 9 नवंबर को 500 वर्षों से कानूनी पचड़े में फंसे राम मंदिर पर एक सर्वसम्मति से फैसला देकर कोर्ट ने करोड़ों लोगों का दिल जीत लिया अब हमें नवदीप जलाना है सामाजिक एकता और सद्भाव का ताकि या फैसला किसी को ठेस ना पहुंचाएं पर फैसला आने से पहले इस तरह की अपील सबसे अधिक उनकी ओर से ही हुआ जो इस तरह के अपीलो और दलीलों को कभी मानते ही नहीं थे खैर फैसला आने के बाद कहीं कोई अप्रिय घटना का ना होना बतलाता है कि इस बार कुछ फैसले से स्वता ही कईयों के दिमाग बदल देते हैं दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आम आदमी अक्सर यह कहते पाया जाता था कि मेरे एक वोट से क्या होने वाला ? पर आज वह 56 इंच का सीना तान कर कहता है मेरे एक वोट से कश्मीर हमारा बनता है मेरे एक वोट से अयोध्या फिर वैसे ही सजती संवरती और जगमगाती है जैसे प्रभु राम के 14 वर्ष बाद वापस आए हो उसके एक वोट से ही राम मंदिर पर वर्षों से लटके मामले का फैसला आता है वस्तुतः देखा जाए तो हिंदू धर्म जैसा दूसरा कोई फ्लैक्सिबल या लचीला धर्म है ही नहीं जिसमें नास्तिक और आस्तिक दोनों को जगह दी गई है और जिसमें दोनों ही मन में ईश्वर के प्रति एक समान समर्पण और समभाव रखते हैं जहां उत्तर में एक ही भगवान अलग अलग नाम से जाने जाते हैं तो वहीं दक्षिण में वही भगवान दूसरे रूप में पूजे जाते हैं परंतु इस विविधता से पूरब से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण तक हिंदुओं के सोए हुए स्वाभिमान को पुनः जगा कर रख दिया राम पर निर्णय क्या कोई मानव कर सकता है यह फैसला तो सिर्फ उन करोड़ों साथियों के सोए हुए स्वाभिमान को जगाने के लिए प्रभु द्वारा रचा गया एक संयोग है कल की रात तो कईयों को नींद ही नहीं आई होगी आए भी तो कैसे इतना महत्वपूर्ण फैसला जो आने वाला था बेचैन सुनने वाला भी था और सुनाने वाला भी पर फैसला सुनाकर रंजन गोगोई तो इतिहास पुरुष बन गए साथ ही संविधान पीठ के चार अन्य जज भी गौरवान्वित हुए जिनमें अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस ए बोबडे भी शामिल हैं तथा जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर भी शामिल है मामला गंभीर था पर कोर्ट्  उससे भी गंभीर बना और रोजाना सुनवाई की एक अच्छा फैसला लिया इस फैसले से इस फैसले में केके मोहम्मद का योगदान को भी नहीं भुलाया जा सकता केके मोहम्मद आर्कियोलॉजिकल सर्वे आफ इंडिया के पूर्व डायरेक्टर जनरल रहे और 1976-1977 के समय उस टीम का हिस्सा थे जिसने अयोध्या के जमीन की जांच पड़ताल की थी कि मोहम्मद का साफ-साफ कहना था कि विवादित जमीन के नीचे हिंदुओं की मूर्ति तथा अवशेष पाए गए हैं और मस्जिद का निर्माण पूरी गैर इस्लामिक ढांचे पर किया गया है हिंदुओं के लिए अयोध्या हमेशा से पवित्र स्थल रहा है परंतु इन शांतिप्रिय समुदाय की नीति निर्धारण करने वालों ने जाने कैसे विदेशी आक्रांता को नायक बना लिया यह सोचने का विषय है और अब भी उनके सोच में कोई खास परिवर्तन नहीं आया जैसा कि हमने तीन तलाक पर जबरदस्त विरोध देखा| अयोध्या की भूमि तो हमेशा से ही प्रभु श्री राम की भूमि थी पर कानूनी दांवपेच में एक सबूत जिसने विपक्षियों के सारे दावे वह के पोल खोल दिए वह थी भगवान विष्णु के तीसरे अवतार वराह अवतार की मूर्ति साथ ही एक ईट जिस पर पूरी रामायण लिखी हुई थी और लिखावट इतनी पुरानी की बाबर तो क्या उसके बीसयो़ पीढ़ियों का भी जन्म ही नहीं हुआ होगा और किसी प्रवक्ता ने ठीक ही कहा था कि वह लोग राम और सनातन धर्म का इतिहास कैसे जान पाएंगे कैसे मान पाएंगे जिनके खुद का इतिहास 1400 साल पुराना है वर्तमान पीढ़ी के लोग दो बातें जरूर याद रखेंगे कि कांग्रेस की सरकार में राम काल्पनिक थे और बीजेपी की सरकार में प्रभु श्रीराम ही नहीं राम मंदिर भी जीवंत हुआ था 40 दिन तक चली इस लंबी बहस में सभी वकीलों के उनके बहस के तौर तरीकों के लिए भी याद रखा जाएगा परंतु रामलला विराजमान की तरफ से पैरवी करने वाले तमिलनाडु के अधिवक्ता जनरल परासरण ने अपने वक्तव्य से पूरे देश में एक अलग पहचान बनाई उनके खड़े होकर जिरह करने से लेकर यह कहना कि "मेरे यह मेरी अंतिम इच्छा है कि मरने से पहले इस मामले को अंजाम तक पहुंचा दूं" ने उन्हें पूरे देश में वायरल कर दिया वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय भारत के अटॉर्नी जनरल भी रह चुके हैं आज राम जन्मभूमि पर जिस तरह का फैसला आया और उससे ऐसा लगता है कि पूरा देश एक सुर में जय श्री राम बोल रहा हो और माहौल इस माहौल में रामचरितमानस की चौपाई  स्मरण हो रहा है 
हरषि भरत कोसलपुरआए समाचार सब गुरुहि सुनाएं 
पुनि मंदिर महँ बात जनाई,आवत नगर कुशल रघुराई