शहादत को सलाम
May 4, 2020 • बाल मुकुन्द ओझा

(बाल मुकुन्द ओझा)

एक तरफ देश और दुनिया कोरोना से जंग लड़ रहा है दूसरी और हमारे सैनिक सीमा पर आतंकवाद से लड़ रहे हैं। कोरोना वायरस विरुद्ध जंग में भारत विश्व स्तर पर सहायता देकर अपनी सकारात्मक पहचान को और मजबूत कर रहा है। वहीं पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों के कारण विश्व मंच पर बेपर्दा हो रहा है। पाकिस्तान की नापाक हरकतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। आए दिन पाकिस्तानी सेना संघर्ष विराम का उल्लंघन कर आतंकियों को घुसपैठ कराने की फिराक में जुटी हुई है। सेना की चैकियों के साथ ही रिहायशी इलाकों को भी निशाना बना रही है। कोरोना की महामारी व रमजान के पवित्र महीने में भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाक नियंत्रित आतंकी शांति भंग कर कश्मीर में अपनी बेजा हरकतों से बाज नहीं आ रहे है। यहाँ तक की नागरिक ठिकानों पर भी लगातार हमले कर रहे है जिनका भारतीय सैनिक मुंह तोड़ जवाब दे रहे है। 
जम्मू-कश्मीर के हंदवाड़ा में सुरक्षाबलों और आंतकियों के बीच एनकाउंटर में 21 राष्ट्रीय रायफल्स के कमांडिंग कर्नल ऑफिसर आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूद समेत पांच लोग शहीद हो गए। सुरक्षाकर्मियों ने मुठभेड़ में दो आतंकी को भी ढेर कर दिया. मरने वाले दोनों आतंकी लश्कर-ए-तैयबा के थे. एक आतंकी स्थानीय बताया जा रहा है। 
कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा, 21-राष्ट्रीय राइफल्स की कमान संभाल रहे थे. 21-राष्ट्रीय राइफल्स हंदवाड़ा इलाके में निगेहबानी करती है और कर्नल आशुतोष शर्मा एक जांबाज ऑफिसर. शुक्रवार को जैसे ही उन्हें आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली वो अपनी टीम का नेतृत्व करते हुए सर्च ऑपरेशन के लिए निकल पड़े। लेकिन जिस घर में आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी दरअसल वो वहां नहीं थे। कर्नल आशुतोष शर्मा आतंकियों को घेरने जिस घर में दाखिल हुए आतंकी दरअसल उसी घर में थे। शनिवार दोपहर को बाहर से कमांड ले रहे ऑफिसर्स का कमांडिंग ऑफिसर से संपर्क टूट गया। आखिरकार रविवार को एक घर से सभी लोगों का शव बरामद हुआ. इसमें दो आतंकी समेत पांच सुरक्षाकर्मियों का मृत शरीर भी मौजूद था।
21 राष्ट्रीय राइफल्स यूनिट के कमांडिंग ऑफिसर रहे कर्नल आशुतोष अपनी साहस और वीरता की वजह से पहले भी चर्चा में रहे हैं. उन्हें दो बार वीरता पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। शहीद आशुतोष पिछले पांच सालों में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में अपनी जान गंवाने वाले कर्नल रैंक के पहले कमांडिंग अफसर थे ।
इस साल जनवरी से अब तक जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में हुई मुठभेड़ में 62 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। भारत की तरह कोरोना वायरस से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहा है और लगातार आतंकियों को सीमा पार भेज रहा है। पिछले महीने पाकिस्तान के सीजफायर उल्लंघन का जवाब देते हुए भारतीय सेना ने दुधनियाल स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इसमें आठ आतंकी और 15 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे।
हंदवाड़ा एनकाउंटर में शहीद हुए कर्नल आशुतोष शर्मा की दुनिया उनकी 7 साल की बेटी तमन्ना के इर्द-गिर्द ही थी। वह अक्सर अपने साथियों से अपनी बेटी की बातें ही बताया करते थे। आखिरी बार दोनों की मुलाकात में जयपुर में एक पिज्जा आउटलेट पर हुई थी। आखिरी तस्वीर में उनकी बेटी तमन्ना उनकी गोद में बैठी हुई है और दोनों बेहद खुश दिख रहे हैं। 45 साल के कर्नल अपनी ड्यूटी के लिए भी उतने ही सजग रहते थे। वह बेहद निर्भीक थे, एनकाउंटर स्पॉट पर वह आगे से आगे जाने को तैयार रहते थे। गांव-गांव दौरा करते थे, अपने सैनिकों की सलामती को वह हमेशा प्राथमिकता देते थे। उनकी पत्नी पल्लवी शर्मा कहती हैं, श्सिर्फ सेना में शामिल होकर कोई देश की सेवा नहीं कर सकता है। इसके लिए एक अच्छा इंसान और जिम्मेदार नागरिक होना भी जरूरी है। हर किसी को अपना काम पूरी जिम्मेदारी से करना चाहिए, चाहे वे किसी भी क्षेत्र में जाएं। उनकी पत्नी पल्लवी शर्मा ने बताया, श्वह पिछले साल होली पर हमसे मिलने आए थे। यह उनकी सरप्राइज विजिट थी। मैं यह नहीं सुनना चाहती कि लोगों को उनके शहीद होने का दुख है। मुझे उनपर गर्व है। वह अक्सर कई ऑपरेशन में हिस्सा लेते थे और फ्रंट से लीड करते थे।