ठोस उपायों से ही किसानों की आय दुगनी होगी
October 24, 2019 •  देवानंद राय
( देवानंद राय)
वैसे तो हम कृषि प्रधान देश के रूप में जाने जाते हैं पर किसानों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है जिस देश में किसान को अन्नदाता कहा जाता है वहां का किसान कर्ज के तले दबकर आत्महत्या कर लेता है यह हमारे समाज और देश दोनों के लिए एक बड़ा धब्बा है भारत में 60% आबादी खेती किसानी से जुड़ी हुई है पर एक रिपोर्ट पर एक सर्वे बताती है कि हर दिन हजारों की संख्या में लोग खेती बाड़ी से दूर हो रहे हैं और हमें हर रोज देश के किसी न किसी हिस्से से किसानों की आत्महत्या की खबर मिलती रहती है सवाल यह है कि जब हमारी अर्थव्यवस्था की चावल दाल और दूध उत्पादन में विश्व के देशों में से हमारे यहां का किसान गरीब रह जा रहा है उसके लिए यह मुहावरा किसान कर्ज में जन्म लेता है और कर्ज में ही मर जाता है क्यों अब अधिक सत्य प्रतीत हो रहा है क्या हमारे नीति नियंता इस पर गंभीरता से नहीं सरकार कह रही है कि 2022 तक वह किसानों की आय दोगुनी करना चाहती है इस पल का स्वागत होना चाहिए सिर्फ स्वागत और इसके प्रचार-प्रसार तक ही सीमित ना इसे वास्तविक धरातल पर उतारा किसानों की आय बढ़ाने के लिए उत्पाद केंद्रित होने के बजाय आए केंद्र योजना पर ज्यादा फोकस करना होगा कृषि उत्पादों का निर्यात और उनसे मिलने वाले लाभ सीधे तौर पर किसानों को नहीं मिल पाती जिस कारण फसलों को बेचने वाला व्यापारी अमीर हो गया और फसलों को उगाने वाला किसान आजादी के 70 वर्ष बाद भी गरीब का गरीब ही रह गया देश में भी आर्थिक सर्वे 2016 के अनुसार देश के 17 राज्यों अर्थात देश के लगभग आधे हिस्से में खेती खेतिहर परिवारों की आवश्यकता मनी 20000 से भी कम है देश का थिंक टैंक नीति आयोग का कहना है कि वर्ष 2010 से 2015 के मध्य प्रदेश के किसान की वार्षिक आय में वार्षिक वृद्धि आधे प्रतिशत अर्थात 0.44% से भी कम एक आंकड़े के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा खेती भारत में खेतों पर सबसे अधिक लोगों की निर्भरता मुझे लगता है कि सरकार को किसानों के लिए नई नीति बनानी चाहिए तथा किसानो को बागवानी और पशु पालन भी खेती-बाड़ी के साथ करना चाहिए ताकि अन्य आय का स्रोत उनके पास बना रहे किसानों की स्थिति सुधारने के लिए हमें अपने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी सुधारने की आवश्यकता है इसी वर्ष हमने देखा कि प्री मानसून कितने देर से आया और जिसके कारण पूरे देश में सूखे जैसे हालात बन चुके थे पानी की कमी और सिंचाई व्यवस्था कैसे सुधार हो इस पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है फसल को पानी चाहिए और पानी के लिए किसान मानसून पर निर्भर है जो कभी किसी की सुनता नहीं जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पहले और देर से आना धीरे-धीरे सामान्य होता जा रहा है फसल को जल चाहिए बीच को भी जल जल पर किसान को सिंचाई के लिए जितना जल्दी कभी उसे मिल पाता है जिसका सीधा असर ही नहीं पड़ता है वहीं से शुरू होता है सरकार जितनी जल्दी कारपोरेट का बात सुनकर पालन करती है अगर वैसा ही व्यवहार किसानों के साथ बनने वाले नीतियों की आधी से अधिक समस्याएं हल हो जाएंगे हम अर्थव्यवस्था में डूइंग बिजनेस की बात करते हैं तो क्यों ना हम अब इज डूइंग फार्मिंग की बात करें ताकि हम किसानों की आय दोगुनी करने को सार्थक बना सकें यह तो हुई फसल बोने और गाने पर सुधार पर इसके बाद भी किसानों की समस्याएं और भी हैं जिनमें फसलों का सही दाम ना मिल पाना एक मुख्य समस्या है देश के कुछ राज्यों ने कर्ज माफी जैसे लोकलुभावन योजनाओं के जगह कुछ ऐसी योजनाएं बनाई जो वाकई किसान की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है जिनमें केरल, तेलंगाना,उड़ीसा और आंध्र प्रदेश|तेलंगाना में किसान को फसल बोने के वक्त एडवांस पेमेंट मिलता है ताकि वह साहूकार के कर्ज तले न दबे इसे रायत बंधु स्कीम कहा जाता है।पर इस स्कीम में उन किसानों को लाभ नहीं मिलता जो किराए पर जमीन लेकर खेती करते हैं। उड़ीसा में भी इसी प्रकार की योजना जिसे कालिया के नाम से जाना जाता है पर इसमें उन किसानों को भी शामिल किया गया जिनके पास खेत नहीं थे या जो किराए पर खेती कर रहे थे सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सात सूत्री रणनीति बनाई है उसका पालन अगर अक्षरशः होने लगे तो निश्चित तौर पर आय दुगनी होगी जिनमें प्रति बूंद अधिक फसल मिट्टी की गुणवत्ता के आधार पर खाद और फसल का उत्पादन, गोदाम बनाने तथा कोल्ड चेन में बड़ा निवेश राष्ट्रीय कृषि बाजार की प्लेटफार्म की शुरुआत, कम कीमत पर फसल बीमा योजना मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में सहायक आय के स्रोत के रूप में डेयरी, पशु पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन तथा बागवानी को हरसंभव बढ़ावा देने का प्रयास किसानों की दशा तथा दिशा बदलने के लिए और उनकी आय को दुगनी करने के लिए हमें हर दिन युद्ध स्तर पर कार्य करना होगा तथा ठोस कदम उठाने होंगे ताकि हम खेती-बाड़ी को घाटे का सौदा ना बनाकर लाभ का सौदा बनाएं जिससे हमारा अन्नदाता सुखी और समृद्ध हो सके।