युवाओं को आत्मविश्वास दे रहा है स्टार्टअप
October 26, 2019 •  देवानन्द राय
( देवानन्द राय)
सोचिए कुछ साल पहले जब कोई युवा या कोई भी व्यक्ति जो देश के किसी छोटे गांव से शहर में किसी समस्या का नया हल निकालता था या कोई नया बिजनेस मॉडल बताता था या फिर कोई नई चीज के अविष्कार खोज पर लोगों का ध्यान आकर्षित करता था तो लोग पहले उसका मजाक उड़ाते थे फिर कहते थे आईडिया तो अच्छा है पर इसमें पैसा कौन लगाएगा परंतु पश्चिमी देशों में शुरू से ही युवाओं के नए विचारों इनोवेशन और नवाचार पर ध्यान दिया गया और उनके स्टार्टअप पर पूरा भरोसा जताया गया हाल के कुछ वर्षों में हमारे देश में भी खुद को ग्लोबली चेंज के दायरे में लाया और युवाओं के नए मॉडल नई खोज नए विचार पर ध्यान देना स्टार्ट किया फिर जब सरकार ने इसे गंभीरता से लिया तो देश में स्टार्ट अप इंडिया की शुरुआत हुई जिससे युवा अपना ज्ञान तकनीक कौशल का प्रयोग कर कम लागत में जन उपयोगी और बहू की वस्तुओं के का आविष्कार कर रहा है ओला, उबर तथा मेट्रो सिटीज में किराए पर मिलने फर्नीचर किराए पर मिलने वाली बाईक, कार इत्यादि नए स्टार्टअप का ही हिस्सा है स्टार्टअप इंडिया ने देश के करोड़ों युवाओं को एक बड़ा आत्मविश्वास दिया है सही मायने में देखे तो यही युवा शक्ति का सही दिशा में जाने वाले इंजन स्टार्ट हो चुकी है युवाओं के नए विचारों का मजाक नहीं बनता उन्हें हर पल हर स्तर पर प्रोत्साहन से लेकर फंडिंग उपलब्ध कराने तक सरकार और प्राइवेट फंडिंग एजेंसी सक्रिय हैं बहुत से युवाओं ने इस योजना का लाभ लिया है भारत युवाओं का देश है विश्व की सबसे बड़ी युवा शक्ति हमारे पास है इस कारण देश में एक ऐसी योजना कितना भी थी जो देश के युवाओं को नौकर नहीं मालिक बनाए हर कोई जिस कंपनी में काम करता है उसका सीईओ बनना चाहता है पर अधिकतर लोगों का यह सपना सपना ही रह जाता है परंतु जब से स्टार्ट अपने युवाओं को एक शादी है तब से कई कंपनियों में काम करने वाले प्रोफेशनल ने नौकरी छोड़कर स्टार्टअप शुरू किया है और सफल भी हुए हैं मानो युवाओं के सपनों को पंख मिल गया देश के हर कोने का एक नई उड़ान भरने को तैयार हैं कारपोरेट दिग्गजों का कहना है कि अधिकतर भारतीय स्टार्टअप घरेलू तथा परिवहन से जुड़ी हुई हैं इनमें लोगों की बढ़ती रुचि को देखकर लगभग 70% निवेश भी घरेलू जरूरतों के स्टाफ को मिलता है देश के 28% बेंगलुरु में हैं जिनके 13% संस्थापक 36 साल से कम है अब देश के हर महीने 500 से 800 स्टार्ट शुरू हो रहे हैं फंडिंग के मामले में भी बेंगलुरु आगे बेंगलुरु दुनिया के पहले चार शहरों में से एक है जहां सबसे ज्यादा फंडिंग उपलब्ध होती है सबसे ज्यादा फंडिंग ई-कॉमर्स वाले स्टार्ट पर होती है फिर दूसरे नंबर पर मोबाइल एप्स पर होती है अगर ध्यान से देखें तो स्टार्टअप योजना वाकई में युवाओं को भी बनाती है हमारे कॉलेज के खेल ज्ञान का आम जीवन में महत्व नहीं है जितना प्रैक्टिकल ज्ञान का वर्तमान शिक्षा प्रणाली तो बनाती है जो आज का युवा चाहता है परंतु अगर आप में काबिलियत है लोगों के समस्याओं को सुलझाने के तरीके और थोड़ा मार्केट रिसर्च के बारे में जानकारी है तो निश्चित तौर पर आपका स्टार्टअप बिजनेस करियर का शानदार स्टार्ट कर आएगा इस योजना का मुख्य लक्ष्य यही है कि देश में एक मजबूत आर्थिक तंत्र लाया जाए जिससे अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिले और आर्थिक असमानता को दूर किया जाए स्टार्टअप योजना 16 जनवरी 2016 को आधिकारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा शुरू की गई थी जिसमें नए स्टार्टअप पर पहले 3 साल तक इनकम टैक्स में छूट जैसे आकर्षक लाभ भी था वैसे इस योजना की घोषणा 15 अगस्त 2015 में ही मोदी जी ने किया था आइए देश के कुछ प्रसिद्ध स्टार्टअप पर नजर डालें आज शायद ही कोई ऐसा स्मार्टफोन होगा जिसमें पेटीएम ना हो विजय शेखर शर्मा ने पेटीएम के लिए रखी थी वर्तमान में पेटीएम का बाजारी मूल्य 650000 करोड़ से भी अधिक है अब हम छोटी दूरी के लिए चौराहे पर खड़े होकर जी बस या टेंपो का इंतजार नहीं करते हैं 4G के स्पीड में हम ओला बुक करते हैं ओला भी वर्ष 2010 में देश देश में आईटी सिटी के नाम से मशहूर बेंगलुरु में आईआईटी से पढ़े दो छात्रों ने शुरू किया ओला सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है या ऑस्ट्रेलिया में भी सुविधाएं दे रहा है आज ऑनलाइन सामान मंगाना हो तो हर किसी की जुबां पर फ्लिपकार्ट फटाफट आ जाता है इसकी शुरुआत 2007 में दिल्ली आए हैं कि के दो छात्रों ने की थी इसी तरह खाने को लेकर प्रसिद्ध जोमैटो की 2008 में दीपेंद्र गोयल के द्वारा शुरू हुई और आज भारत सहित 22 देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है अब इस लिस्ट में हाल ही में एक नया नाम जुड़ा है बायजु जो वर्तमान में भारतीय क्रिकेट टीम का आधिकारिक स्पॉन्सर भी है जिसकी शुरुआत 2011 में रवींंद्रन ने की थी जो आज भारत के सबसे कम उम्र के अरबपति हैं हमारा देश कृषि प्रधान देश है जो युवा कभी खेतीवाड़ी से दूर भागता था आज वह एग्रीकल्चर में भी कर रहा है देश में वर्तमान में 450  स्टार्टअप है और एक सर्वे के अनुसार दुनिया का हर नौवां एग्री टेक स्टार्टअप भारत से ही निकल रहा है एग्री टेक इन इंडिया इमर्जिंग ट्रेड्स इन 2019 रिपोर्ट के मुताबिक देश में एग्रीटेक स्टार्टअप की सालाना ग्रोथ 25% है अगर स्टार्टक की कहानी जितनी सफलता से भरी है तो उनकी असफलता की कहानी भी मार्केट में उतनी ही पड़ी है यह कड़वा सच है कि सारे स्टार्टअप सफल नहीं हो पाते एक उदाहरण के तौर पर देखें तो अगर स्टार्टअप किसी महीने में शुरू होते हैं तो उनमें से 90% स्टार्ट अगले महीने में ही बंद होने की ओर चल पड़ते हैं या यूं कहें सही रणनीति ना होने के कारण और बाजार का रिसर्च ना होने के कारण भी फेल हो जाते हैं अगले 6 महीने से 1 साल तक पहुंचते-पहुंचते मुश्किल से दो से तीन ही स्टार कस्टमर के हिसाब से चलते हैं हम सफल कहते हैं पर बिजनेस स्टार्टअप और प्रयोग सफलता और असफलता तो लगी रहती है आज के माध्यम से भारत का हर युवा के भीतर उद्यमी बनने की भावना विकसित हो रही है अब नौकरी नहीं करना चाहता नौकरी देने पर ध्यान दे रहा है यही कारण है कि प्रधानमंत्री जी कई बार अपने हाथों में इस बात का जिक्र करते रहे हैं अब इसका बेटा यह नहीं कर रहा है यह निश्चित तौर पर देश में सकारात्मक परिवर्तन लाने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का शानदार पहल है